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UP: सिद्धार्थनगर: सोहांस-नौगढ़ मार्ग पर 5 करोड़ का पुल अधूरा, बारिश में 1 लाख की आबादी का सफर होगा ठप

Sun, 07 Jun 2026 01:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sun, 07 Jun 2026 01:30 AM IST
सार

जलनिकासी की समस्या को दूर करने और सड़क को सुरक्षित करने के लिए लगभग पांच करोड़ की लागत से बड़े पुल का निर्माण शुरू कराया गया। फरवरी के आसपास निर्माण शुरू होने के बाद मुख्य सड़क से नीचे बाईपास बना दिया गया लेकिन निर्माण की गति बहुत धीमी है। वहीं, बाढ़ और नदी पास बन रहा पुल अधूरा है।

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Construction is in limbo, and if it rains, the travel of a population of one lakh will be in danger.

विस्तार

मानसून दस्तक देने को तैयार है लेकिन सोहांस-नौगढ़ मार्ग पर बन रहे पुल का निर्माण अब भी अधूरा है। महराजगंज और नेपाल के साथ ही लोटन ब्लॉक क्षेत्र के लोगों के लिए लाइफ लाइन कहे जाने वाली इस मार्ग पर पांच करोड़ रुपये की लागत से बन रहे पुल की छत की ढलाई नहीं हुई है।

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मानसून की दस्तक के बाद ही इस पहाड़ी जमुआर नदी का पानी तेजी से बढ़ता है, ऐसे में बारिश होते ही एक लाख से अधिक आबादी का आवागमन पूरी तरह से ठप हो जाएगा। उन्हें वैकल्पिक रास्तों से 10 से 15 किलोमीटर अतिरिक्त चक्कर लगाकर मुख्यालय आना-जाना पड़ेगा।
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शहर से निकलने वाला नौगढ़-सोहांस मार्ग लोटन ब्लॉक क्षेत्र के कई गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग होने के साथ ही महराजगंज जनपद और नेपाल के लोगों के लिए अभी अहम है। इस मार्ग से जिला मुख्यालय के साथ ही स्कूल-कॉलेज और कारोबार करने वाले लोगों का बड़ी तादाद में आवागमन होता है।
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कहा जाए तो यह लगभग एक लाख की आबादी के लिए लाइफलाइन है। बाढ़ प्रभावित इस के इलाके में जमुआर नदी पर पुल बनाने के साथ ही लगभग दो 200 मीटर आगे एक पुल था, लेकिन बारिश और बाढ़ के बाद पानी सड़क पर चढ़ने से आवागमन रोकना पड़ता था।

कारण पुल का आकार कम होने के कारण पानी निकल नहीं पाता था। जलनिकासी की समस्या को दूर करने और सड़क को सुरक्षित करने के लिए लगभग पांच करोड़ की लागत से बड़े पुल का निर्माण शुरू कराया गया। फरवरी के आसपास निर्माण शुरू होने के बाद मुख्य सड़क से नीचे बाईपास बना दिया गया लेकिन निर्माण की गति बहुत धीमी है।

वहीं, बाढ़ और नदी पास बन रहा पुल अधूरा है। यहां पहली बारिश में ही जलभराव हो जाता है। मानसून सिर पर है, ऐसे में बारिश होते ही बाईपास डूब जाएगा। यह अस्थायी मार्ग निचले हिस्से से होकर गुजरता है और हल्की बारिश में भी जलमग्न होने लगता है।

स्थानीय निवासी रामनेवास, तीरथ लोधी, जयप्रकाश और रियाज ने कहा कि वह इसी क्षेत्र के हैं। उन्होंने कहा कि यदि मानसून आने से पहले पुल की छत नहीं डाली गई तो आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा।

स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों, किसानों और व्यापारियों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ेगी। स्थिति यह होगी कि लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए करीब सोहांस होते हुए उसका से निकलना पड़ेगा या फिर बर्डपुर से होकर जाना पड़ेगा।


इसमें 10-15 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। यह क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित रहता है और कई महीनों तक पानी भरा रहता है। ऐसे में पुल का निर्माण केवल विकास कार्य नहीं बल्कि लोगों की दैनिक जरूरत से जुड़ा मुद्दा है।

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