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सर्वेक्षण के बाद तय होगा 18 गांवों की जमीन का मुआवजा
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सर्वेक्षण के बाद तय होगा 18 गांवों की जमीन का मुआवजा
सिद्धार्थनगर। खलीलाबाद-बहराइच नई रेल परियोजना में शामिल बांसी क्षेत्र के 18 गांवों की भूमि का समाघात सर्वेक्षण कराया जाएगा। उसके बाद रेल लाइन के लिए अधिगृहीत की जाने वाली भूमि का मुआवजा तय होगा।
जिला प्रशासन इसके लिए संस्था की तलाश कर रही है, जो रेल परियोजना के लिए अधिगृहीत की जाने वाली निजी व सरकारी भूमि में पड़ने वाले मकान, वृक्ष, गड्ढे, नदी व नाले आदि का सर्वेक्षण करेगी, जिसकी रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन उसके लिए मुआवजे की राशि तय करेगी।
खलीलाबाद से बहराइच तक जाने वाली नई रेल परियोजना जिले के बांसी और डुमरियागंज तहसील क्षेत्र से होकर गुजरेगी। इसके तहत बांसी क्षेत्र के 18 गांवों के किसानों की 35.0785 हेक्टेयर भूमि अधिगृहीत की जानी है। रेल लाइन बिछाने के लिए जिस भूमि को अधिगृहीत किया जाएगा, उसे सरकारी अथवा निजी भूमि पर अर्धनिर्मित भवन, मकान, सड़क, वृक्ष, नदी, पोखरा व नाला आदि का सर्वे किया जाएगा। इससे विस्थापित होने वाले लोगों के मुआवजे के आवंटन और पुनर्वास के लिए प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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एडीएम उमाशंकर का कहना है कि इन गांवों में सामाजिक समाघात का आकलन कर रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर ही संबंधित भूमि के अधिग्रहण के लिए कार्यवाही शुरू की जाएगी। साथ ही नदी, नाले और सड़क आदि पड़ने पर जरूरी उपाय भी किए जा सकेंगे।
पेशेवर संस्था को मिलेगी वरीयता
अधिगृहीत की जाने वाली भूमि के सामाजिक समाघात का सर्वे करने के लिए पेशेवर कंपनी अथवा संस्था को वरीयता दी जाएगी। एडीएम ने बताया कि प्रशासन की तरफ से मांगे गए आवेदन के बाद उसी संस्था का चयन किया जाएगा, जिसमें पर्याप्त मानव संसाधन योग्य स्तर प्रबंधन क्षमता रखने वाले कर्मचारी व अधिकारी होंगे। जिसमें पेशेवर प्रबंधन, अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री व मानव वैज्ञानिक आदि शामिल हों।
ये 18 गांव होंगे शामिल
नई रेल लाइन परियोजना में बांसी क्षेत्र के सुमहा, गौरा पचपेड़वा, कम्हरिया बुजुर्ग, बगहवा, बरगदवा, पाला, पाली, सेहरी बुजुर्ग, पकरैला, पेड़ार, गिधौरा, परसिया, अकसरा माफी, बभनपुरवा, सिसवा, मिठवल बुजुर्ग, सीसईकला और अहिरौली लाल गांव की भूमि शामिल होगी।
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सिद्धार्थनगर। खलीलाबाद-बहराइच नई रेल परियोजना में शामिल बांसी क्षेत्र के 18 गांवों की भूमि का समाघात सर्वेक्षण कराया जाएगा। उसके बाद रेल लाइन के लिए अधिगृहीत की जाने वाली भूमि का मुआवजा तय होगा।
जिला प्रशासन इसके लिए संस्था की तलाश कर रही है, जो रेल परियोजना के लिए अधिगृहीत की जाने वाली निजी व सरकारी भूमि में पड़ने वाले मकान, वृक्ष, गड्ढे, नदी व नाले आदि का सर्वेक्षण करेगी, जिसकी रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन उसके लिए मुआवजे की राशि तय करेगी।
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खलीलाबाद से बहराइच तक जाने वाली नई रेल परियोजना जिले के बांसी और डुमरियागंज तहसील क्षेत्र से होकर गुजरेगी। इसके तहत बांसी क्षेत्र के 18 गांवों के किसानों की 35.0785 हेक्टेयर भूमि अधिगृहीत की जानी है। रेल लाइन बिछाने के लिए जिस भूमि को अधिगृहीत किया जाएगा, उसे सरकारी अथवा निजी भूमि पर अर्धनिर्मित भवन, मकान, सड़क, वृक्ष, नदी, पोखरा व नाला आदि का सर्वे किया जाएगा। इससे विस्थापित होने वाले लोगों के मुआवजे के आवंटन और पुनर्वास के लिए प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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एडीएम उमाशंकर का कहना है कि इन गांवों में सामाजिक समाघात का आकलन कर रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर ही संबंधित भूमि के अधिग्रहण के लिए कार्यवाही शुरू की जाएगी। साथ ही नदी, नाले और सड़क आदि पड़ने पर जरूरी उपाय भी किए जा सकेंगे।
पेशेवर संस्था को मिलेगी वरीयता
अधिगृहीत की जाने वाली भूमि के सामाजिक समाघात का सर्वे करने के लिए पेशेवर कंपनी अथवा संस्था को वरीयता दी जाएगी। एडीएम ने बताया कि प्रशासन की तरफ से मांगे गए आवेदन के बाद उसी संस्था का चयन किया जाएगा, जिसमें पर्याप्त मानव संसाधन योग्य स्तर प्रबंधन क्षमता रखने वाले कर्मचारी व अधिकारी होंगे। जिसमें पेशेवर प्रबंधन, अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री व मानव वैज्ञानिक आदि शामिल हों।
ये 18 गांव होंगे शामिल
नई रेल लाइन परियोजना में बांसी क्षेत्र के सुमहा, गौरा पचपेड़वा, कम्हरिया बुजुर्ग, बगहवा, बरगदवा, पाला, पाली, सेहरी बुजुर्ग, पकरैला, पेड़ार, गिधौरा, परसिया, अकसरा माफी, बभनपुरवा, सिसवा, मिठवल बुजुर्ग, सीसईकला और अहिरौली लाल गांव की भूमि शामिल होगी।