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Siddharthnagar News: हवा साफ, शहर गंदा... फिर स्वच्छता सर्वेक्षण में कैसे चमके सिद्धार्थनगर ?
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शोहरतगढ़ नगर पंचायत के मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर में फेंका गया कूड़ा। संवाद
सिद्धार्थनगर। तराई बेल्ट में शामिल इस जिले में वायु की गुणवत्ता भले ही बेहतर है लेकिन स्वच्छता सर्वेक्षण के मानक पर यहां के सभी 11 नगर निकाय खरी नहीं उतर पा रही हैं। ऐसे में एक्यूआई बेहतर होना स्वच्छता सर्वेक्षण में ऊंची रैंक की गारंटी नहीं। सर्वेक्षण में कचरा संग्रह, गीला-सूखा कचरा अलग करना, सड़क-नाली की सफाई, कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण और नागरिक फीडबैक जैसे कई मानक अहम हैं।
जिले के प्रत्येक नगर निकायों में सफाईकर्मियों की लंबी फौज, कचरा प्रबंधन के कथित इंतजाम के बाद भी सर्वे में इन मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। शहर व कस्बों में कचरा उठाने की व्यवस्था पर जोर है लेकिन सर्वे की अंतिम कड़ी में शामिल कचरे के वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस व निस्तारित करने की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। इस कारण यहां के नगर निकाय गंदगी की श्रेणी से उबर नहीं पा रहे हैं।
शहर के सभी 25 वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रह और गीला-सूखा कचरा अलग करने की कवायद हो रही है लेकिन संग्रह के बाद कचरा आखिर कहां और किस प्रक्रिया से निस्तारित होगा, यह सवाल बना हुआ है। नगर पालिका सिद्धार्थनगर व नगर पंचायत उसका बाजार में एमआरएफ सेंटर के लिए जमीन का विवाद रोड़ा है। वहीं बिस्कोहर में निर्माण के बाद एमआरएफ सेंटर का संचालन नहीं हो रहा है।
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जिले के शेष आठ नगरीय निकायों में एमआरएफ की व्यवस्था होने का दावा है। हालांकि इन निकायों में एमआरफ सेंटर संचालन के बाद भी स्वच्छता सर्वे में सुधार नहीं हो पा रहा है। नगर पालिका सिद्धार्थनगर में 2018 से नगर में प्रतिदिन करीब 22 टन कूड़ा निकलने का अनुमान है लेकिन वर्तमान में निकलने वाले कचरे में अलग करने का प्रोसेस नहीं हो रहा है। साथ ही इसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित भी नहीं हो रहा है। हालांकि पिछले वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण में नगर पालिका सिद्धार्थनगर की रैंकिंग 3055 से 1814 तक पहुंची, यानी एक साल में 1241 पायदान का सुधार हुआ है।
इसके बावजूद बेहतर रैंक के लिए केवल कूड़ा उठाना नहीं, उसके पूरे निस्तारण की व्यवस्था जरूरी है। इस तरह स्वच्छता सर्वेक्षण में साफ हवा कोई मानक नहीं है बल्कि शहर की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता की परीक्षा होती है। साथ ही कचरे के संग्रह से आगे सेग्रीगेशन, प्रोसेसिंग और वैज्ञानिक विधि से अंतिम निस्तारण के मानक पर जिले के नगर निकाय के खरा नहीं उतर पाने से स्वच्छता रैंकिंग में पीछे रहते है।
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स्वच्छता सर्वे के मानक पर खरा नहीं है शहर
स्वच्छता सर्वे में कचरा प्रबंधन, परिवहन, धूल नियंत्रण, खुले में कचरे में आग लगने पर नियंत्रण और शहरी नियोजन में निरंतर सुधार ही रैंकिंग सुधार कर सकता है। इसमें यहां के नगर निकाय खरा नहीं उतर पा रहे हैं। नगर पालिका सिद्धार्थनगर में कूड़ा उठाने के लिए प्रतिदिन चार नियमित व 25 संविदा समेत आउटसोर्सिंग के सैकड़ों सफाईकर्मी कार्यरत हैं। वहीं कूड़ा निस्तारण केंद्र स्थापित करने के लिए कई जगह भूमि चिह्नित होने के बाद भी इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है। वर्तमान में पकड़ी चौराहे के पास स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र पर कूड़ा डंप तो किया जाता है लेकिन इसका निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इस कारण यहां कूड़े में आग लगने पर उसके धुएं से आसपास के लोगों का दम घुटता है। वहीं नौगढ़ पुल के पास सड़क किनारे कूड़ा जलने के दौरान राहगीरों को सांस लेने में दिक्कत होती है।
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संसाधन पर्याप्त, फिर भी स्वच्छता रैंकिंग में पीछे
बांसी। पर्याप्त संसाधन और सफाईकर्मियों के होने के बाद भी नगर पालिका परिषद बांसी की सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। वर्ष 2024-25 के स्वच्छ सर्वेक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर नगर पालिका बांसी का स्थान 1585 के सापेक्ष 435 और राज्य स्तर पर 329 के सापेक्ष 244 रहा है। नगर पालिका परिषद बांसी ने नगर की सफाई और कूड़ा उठान के लिए नियमित, संविदा और आउट सोर्सिंग के लगभग 150 कर्मियों को लगा रखा है। ढुलाई के लिए दो दर्जन से अधिक वाहन लगा रखे है, जिसमें, ट्रैक्टर-ट्राॅली, पिकअप, मैजिक, जेसीबी आदि शामिल हैं। नगर पालिका में एमआरएफ सेंटर बना है लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए ठीक रास्ता न होने के कारण बरसात के दिनों में यहां कूड़ा गाड़ी नहीं पहुंच पाती है, जिससे नगर में निकलने वाले कूड़े को सड़क या बांध के किनारे गिराना पड़ रहा है।
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नगर को स्वच्छ बनाने के लिए वह दृढ़संकल्पित हैं। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए कर्मचारियों को उचित निर्देश भी दिए जाते हैं।
-जय प्रकाश सिंह यादव, अधिशासी अधिकारी
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शोहरतगढ़ में सक्रिय है एमआरएफ सेंटर
कचरा प्रबंधन में अन्य नगर निकायों की तुलना में शोहरतगढ़ नगर पंचायत की स्थिति बेहतर है। यहां कूड़ा उठाने के लिए 95 सफाईकर्मी हैं। जो सभी वार्डों में घरों और सड़कों से कचरा इकट्ठा कर कूड़ा उठाने वाली गाड़ी से बढ़नी मार्ग के बगल स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र पर पहुंचाते हैं। यहां प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन का कार्य होता है। यहां प्लास्टिक और धातु के कचरे को मशीनों की मदद से अलग किया जाता है। फिर प्लास्टिक को कंप्रेशर मशीन से बंडल बनाकर वेंडरों को बेचा जाता है। एमआरएफ सेंटर के जरिये अब तक 8 518 किलोग्राम प्लास्टिक वेंडरों को बेचकर लगभग ढाई लाख रुपये की आय हुई है। इससे नगर पंचायत की आय में वृद्धि के साथ ही नगर की स्वच्छता में भी सुधार हुआ है। चेयरमैन उमा अग्रवाल ने कहा कि एमआरएफ सेंटर के संचालन से नगर सुंदर और स्वच्छ दिख रहा है।
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नगर निकायों में एमआरएफ सेंटर स्थापित करने एवं उनके संचालन के लिए निर्देशित किया गया है। दो जगहों पर भूमि संबंधी विवाद के कारण सेंटर स्थापित नहीं हो सके है। सभी निकायों को नगर को स्वच्छ रखने एवं कूड़ा के प्रबंधन करते हुए स्वच्छता रैंकिंग में सुधार का भी निर्देश दिया गया है।
-गौरव श्रीवास्तव, एडीएम
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जिले के प्रत्येक नगर निकायों में सफाईकर्मियों की लंबी फौज, कचरा प्रबंधन के कथित इंतजाम के बाद भी सर्वे में इन मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। शहर व कस्बों में कचरा उठाने की व्यवस्था पर जोर है लेकिन सर्वे की अंतिम कड़ी में शामिल कचरे के वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस व निस्तारित करने की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। इस कारण यहां के नगर निकाय गंदगी की श्रेणी से उबर नहीं पा रहे हैं।
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शहर के सभी 25 वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रह और गीला-सूखा कचरा अलग करने की कवायद हो रही है लेकिन संग्रह के बाद कचरा आखिर कहां और किस प्रक्रिया से निस्तारित होगा, यह सवाल बना हुआ है। नगर पालिका सिद्धार्थनगर व नगर पंचायत उसका बाजार में एमआरएफ सेंटर के लिए जमीन का विवाद रोड़ा है। वहीं बिस्कोहर में निर्माण के बाद एमआरएफ सेंटर का संचालन नहीं हो रहा है।
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जिले के शेष आठ नगरीय निकायों में एमआरएफ की व्यवस्था होने का दावा है। हालांकि इन निकायों में एमआरफ सेंटर संचालन के बाद भी स्वच्छता सर्वे में सुधार नहीं हो पा रहा है। नगर पालिका सिद्धार्थनगर में 2018 से नगर में प्रतिदिन करीब 22 टन कूड़ा निकलने का अनुमान है लेकिन वर्तमान में निकलने वाले कचरे में अलग करने का प्रोसेस नहीं हो रहा है। साथ ही इसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित भी नहीं हो रहा है। हालांकि पिछले वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण में नगर पालिका सिद्धार्थनगर की रैंकिंग 3055 से 1814 तक पहुंची, यानी एक साल में 1241 पायदान का सुधार हुआ है।
इसके बावजूद बेहतर रैंक के लिए केवल कूड़ा उठाना नहीं, उसके पूरे निस्तारण की व्यवस्था जरूरी है। इस तरह स्वच्छता सर्वेक्षण में साफ हवा कोई मानक नहीं है बल्कि शहर की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता की परीक्षा होती है। साथ ही कचरे के संग्रह से आगे सेग्रीगेशन, प्रोसेसिंग और वैज्ञानिक विधि से अंतिम निस्तारण के मानक पर जिले के नगर निकाय के खरा नहीं उतर पाने से स्वच्छता रैंकिंग में पीछे रहते है।
स्वच्छता सर्वे के मानक पर खरा नहीं है शहर
स्वच्छता सर्वे में कचरा प्रबंधन, परिवहन, धूल नियंत्रण, खुले में कचरे में आग लगने पर नियंत्रण और शहरी नियोजन में निरंतर सुधार ही रैंकिंग सुधार कर सकता है। इसमें यहां के नगर निकाय खरा नहीं उतर पा रहे हैं। नगर पालिका सिद्धार्थनगर में कूड़ा उठाने के लिए प्रतिदिन चार नियमित व 25 संविदा समेत आउटसोर्सिंग के सैकड़ों सफाईकर्मी कार्यरत हैं। वहीं कूड़ा निस्तारण केंद्र स्थापित करने के लिए कई जगह भूमि चिह्नित होने के बाद भी इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है। वर्तमान में पकड़ी चौराहे के पास स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र पर कूड़ा डंप तो किया जाता है लेकिन इसका निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इस कारण यहां कूड़े में आग लगने पर उसके धुएं से आसपास के लोगों का दम घुटता है। वहीं नौगढ़ पुल के पास सड़क किनारे कूड़ा जलने के दौरान राहगीरों को सांस लेने में दिक्कत होती है।
संसाधन पर्याप्त, फिर भी स्वच्छता रैंकिंग में पीछे
बांसी। पर्याप्त संसाधन और सफाईकर्मियों के होने के बाद भी नगर पालिका परिषद बांसी की सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। वर्ष 2024-25 के स्वच्छ सर्वेक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर नगर पालिका बांसी का स्थान 1585 के सापेक्ष 435 और राज्य स्तर पर 329 के सापेक्ष 244 रहा है। नगर पालिका परिषद बांसी ने नगर की सफाई और कूड़ा उठान के लिए नियमित, संविदा और आउट सोर्सिंग के लगभग 150 कर्मियों को लगा रखा है। ढुलाई के लिए दो दर्जन से अधिक वाहन लगा रखे है, जिसमें, ट्रैक्टर-ट्राॅली, पिकअप, मैजिक, जेसीबी आदि शामिल हैं। नगर पालिका में एमआरएफ सेंटर बना है लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए ठीक रास्ता न होने के कारण बरसात के दिनों में यहां कूड़ा गाड़ी नहीं पहुंच पाती है, जिससे नगर में निकलने वाले कूड़े को सड़क या बांध के किनारे गिराना पड़ रहा है।
नगर को स्वच्छ बनाने के लिए वह दृढ़संकल्पित हैं। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए कर्मचारियों को उचित निर्देश भी दिए जाते हैं।
-जय प्रकाश सिंह यादव, अधिशासी अधिकारी
शोहरतगढ़ में सक्रिय है एमआरएफ सेंटर
कचरा प्रबंधन में अन्य नगर निकायों की तुलना में शोहरतगढ़ नगर पंचायत की स्थिति बेहतर है। यहां कूड़ा उठाने के लिए 95 सफाईकर्मी हैं। जो सभी वार्डों में घरों और सड़कों से कचरा इकट्ठा कर कूड़ा उठाने वाली गाड़ी से बढ़नी मार्ग के बगल स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र पर पहुंचाते हैं। यहां प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन का कार्य होता है। यहां प्लास्टिक और धातु के कचरे को मशीनों की मदद से अलग किया जाता है। फिर प्लास्टिक को कंप्रेशर मशीन से बंडल बनाकर वेंडरों को बेचा जाता है। एमआरएफ सेंटर के जरिये अब तक 8 518 किलोग्राम प्लास्टिक वेंडरों को बेचकर लगभग ढाई लाख रुपये की आय हुई है। इससे नगर पंचायत की आय में वृद्धि के साथ ही नगर की स्वच्छता में भी सुधार हुआ है। चेयरमैन उमा अग्रवाल ने कहा कि एमआरएफ सेंटर के संचालन से नगर सुंदर और स्वच्छ दिख रहा है।
नगर निकायों में एमआरएफ सेंटर स्थापित करने एवं उनके संचालन के लिए निर्देशित किया गया है। दो जगहों पर भूमि संबंधी विवाद के कारण सेंटर स्थापित नहीं हो सके है। सभी निकायों को नगर को स्वच्छ रखने एवं कूड़ा के प्रबंधन करते हुए स्वच्छता रैंकिंग में सुधार का भी निर्देश दिया गया है।
-गौरव श्रीवास्तव, एडीएम