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Siddharthnagar News: लापरवाही से बच्चे की मौत, अस्पताल संचालक और स्टाफ पर प्राथमिकी दर्ज
Thu, 28 May 2026 01:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 28 May 2026 01:35 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
इटवा। कस्बे के निजी अस्पताल में नवजात की मौत के मामले में क्षेत्र के सहदेइया गांव निवासी चंद्रमणि की तहरीर पर इटवा पुलिस ने प्राइवेट अस्पताल के संचालक और स्टाफ के खिलाफ मंगलवार देर रात प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
परिवार का आरोप था कि जल्दबाजी में ऑपरेशन से प्रसव करवा दिया गया, जिससे नवजात की जान चली गई जबकि की हालत मां गंभीर हो गई।
क्षेत्र के सहदेईया गांव निवासी चंद्रमणि ने मंगलवार को पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया कि 23 मई को उनकी पत्नी वंदना को प्रसव पीड़ा हुई तो रात्रि 11 बजे जनता सेवा हॉस्पिटल इटवा लेकर गया, जहां स्टाफ के लोगों ने योग्य चिकित्सकों की टीम होने की बात कहकर पत्नी को भर्ती कर लिया।
इस दौरान जांच में देरी होने का कारण पूछने पर प्रसव का समय न होने की बात कही। आरोप है कि गेट पर ही वह चिकित्सक और उनके स्टाफ के आने की प्रतीक्षा में ही थे कि उनकी पत्नी का बगैर किसी जांच व बगैर प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ, सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ के ऑपरेशन कर जबरदस्ती प्रसव करा दिया गया।
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इसके चलते बच्चे की मौत हो गई और जच्चा की हालत भी बिगड़ने लगी। यह देखकर पीड़ित परिवार के लोगों ने किसी तरह वहां से मरीज को दूसरे अस्पताल में ले जाकर भर्ती कराया। इसके बाद प्रसूता की जान बच सकी। पीड़ित ने इस मामले में जांच करके कार्रवाई की मांग की थी।
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इटवा। कस्बे के निजी अस्पताल में नवजात की मौत के मामले में क्षेत्र के सहदेइया गांव निवासी चंद्रमणि की तहरीर पर इटवा पुलिस ने प्राइवेट अस्पताल के संचालक और स्टाफ के खिलाफ मंगलवार देर रात प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
परिवार का आरोप था कि जल्दबाजी में ऑपरेशन से प्रसव करवा दिया गया, जिससे नवजात की जान चली गई जबकि की हालत मां गंभीर हो गई।
क्षेत्र के सहदेईया गांव निवासी चंद्रमणि ने मंगलवार को पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया कि 23 मई को उनकी पत्नी वंदना को प्रसव पीड़ा हुई तो रात्रि 11 बजे जनता सेवा हॉस्पिटल इटवा लेकर गया, जहां स्टाफ के लोगों ने योग्य चिकित्सकों की टीम होने की बात कहकर पत्नी को भर्ती कर लिया।
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इस दौरान जांच में देरी होने का कारण पूछने पर प्रसव का समय न होने की बात कही। आरोप है कि गेट पर ही वह चिकित्सक और उनके स्टाफ के आने की प्रतीक्षा में ही थे कि उनकी पत्नी का बगैर किसी जांच व बगैर प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ, सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ के ऑपरेशन कर जबरदस्ती प्रसव करा दिया गया।
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इसके चलते बच्चे की मौत हो गई और जच्चा की हालत भी बिगड़ने लगी। यह देखकर पीड़ित परिवार के लोगों ने किसी तरह वहां से मरीज को दूसरे अस्पताल में ले जाकर भर्ती कराया। इसके बाद प्रसूता की जान बच सकी। पीड़ित ने इस मामले में जांच करके कार्रवाई की मांग की थी।