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Siddharthnagar News: बढ़ रहे कैंसर के रोगी, डॉक्टर नहीं हायर सेंटर जाते हैं मरीज
Sun, 04 Feb 2024 12:39 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 04 Feb 2024 12:39 AM IST
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सिद्धार्थनगर। जान निगल जाने वाली कैंसर बीमारी तेजी से बढ़ रही है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में हर माह कैंसर के लक्षण वाले 8 से 10 मरीज मिल रहे हैं। यहां न तो चिकित्सक हैं और न ही जांच कोई सुविधा। ऐसे स्थिति में आखिरी स्टेज पर लोगों को जानकारी हो रही है। जबतक हायर सेंटर पहुंच रहे हैं। बीमारी खतरनाक स्टेज को पार कर जा रही है। कैंसर के रोगियों के आंकड़ें चौकाने वाले हैं। सरकारी रिकार्ड के मुताबिक 134 कैंसर मरीजों को बीते वर्ष मुख्यमंत्री विवेकाधीन सहायता राशि दी जा चुकी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैंसर के रोगी किस प्रकार से बढ़ रहे हैं।
कैंसर एक जानलेवा बीमारी है, तंबाकू, पान मसाला सहित अन्य मादक पदार्थों के सेवन से होता है। मुंह, जीभ और गले में कैंसर के केस अधिक आते हैं। इसमें युवा वर्ग की तादाद अधिक है। ऐसा चिकित्सकों का कहना है। चिकित्सकों की माने तो जिले में लगभग 500 कैंसर के रोगी होंगे। क्योंकि अकेले माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में हर माह कैंसर के लक्षण वाले 8 से 10 मरीज पहुंच रहे हैं। हालांकि कैंसर मरीजों की कोई सर्वे रिपोर्ट नहीं है। अगर सर्वे किया जाए तो इनकी तादाद और बढ़ जाएगी। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में कैंसर के जांच की ना तो कोई सुविधा है और न ही चिकित्सक हैं। ऐसे में लक्षण मिलने पर चिकित्सक बायोप्सी जांच करवाते हैं। जांच में लक्षण पुख्ता होने के बाद हायर सेंटर भेज देते हैं। मेडिकल कॉलेज में जांच की सुविधा हो तो शायद मरीजों को पहले ही जानकारी लग जाए। एक चिकित्सक के मुताबिक अन्य जनपदों की तुलना में यहां कैंसर के केस अधिक मिल रहे हैं, जो जांच का विषय है। क्यों लोगों में कैंसर बढ़ रहा है, जांच कराई जाए तो कारण पता चलेगा और बीमारी पर अंकुश लगाई जा सकती है।
प्रशासन के आंकड़े दे रहे मरीजों के बढ़ने की गवाही
प्रशासन के रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2023 में 499 गंभीर रोगियों को इलाज के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए सहायता के रूप में 7.28 करोड़ धनराशि दी गई है। इसमें कैंसर के मरीजों की संख्या 134 रही है। यह वे मरीज हैं, जो सहायता के लिए आवेदन किए तो वह सामने आ गए। न जाने कितने लोग ऐसे हैं जो इलाज करा रहे हैं और उनका कोई रिकार्ड ही नहीं है।
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यह लक्षण दिखे तो हो जाएं सावधान
अगर कहीं मांस की गुठली में एकाएक वृद्धि होने लगे। दर्द के साथ ही खून आने लगे। खाने में परेशानी हो, जलन हो। गले में दर्द बना रहे, आवाज में भारीपन हो जाए। पानी निगला न जा रहा हो। घाव तीन सप्ताह से अधिक समय भर न रहा हो तो तत्काल चिकित्सक के पास जाएं। उनकी सलाह पर दवा लें और जांच कराएं। क्योंकि यह कैंसर का लक्षण हो सकता है। इसमें लापरवाही घातक हो सकती है। क्योंकि इन लक्षणों से जुड़े मरीज हर माह कई मिल रहे हैं।
-डॉ. संजय कुमार शर्मा, नाक, कान गला रोग विशेषज्ञ, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
एनएमसी के नियम के तहत ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती होती है। हर माह कैंसर के लक्षण वाले पांच से अधिक मरीज मिल रहे हैं। जो मरीज मिलते हैं, उन्हें हायर सेंटर भेज दिया जाता है। लोगों में जागरुकता की कमी है। लोगों को जागरुक किया जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि बीमारी क्या है। क्यों और किस वजह से होती है। कैंसर दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन करके जागरुक किया जाएगा।
-डॉ. एके झा, प्राचार्य माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
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कैंसर एक जानलेवा बीमारी है, तंबाकू, पान मसाला सहित अन्य मादक पदार्थों के सेवन से होता है। मुंह, जीभ और गले में कैंसर के केस अधिक आते हैं। इसमें युवा वर्ग की तादाद अधिक है। ऐसा चिकित्सकों का कहना है। चिकित्सकों की माने तो जिले में लगभग 500 कैंसर के रोगी होंगे। क्योंकि अकेले माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में हर माह कैंसर के लक्षण वाले 8 से 10 मरीज पहुंच रहे हैं। हालांकि कैंसर मरीजों की कोई सर्वे रिपोर्ट नहीं है। अगर सर्वे किया जाए तो इनकी तादाद और बढ़ जाएगी। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में कैंसर के जांच की ना तो कोई सुविधा है और न ही चिकित्सक हैं। ऐसे में लक्षण मिलने पर चिकित्सक बायोप्सी जांच करवाते हैं। जांच में लक्षण पुख्ता होने के बाद हायर सेंटर भेज देते हैं। मेडिकल कॉलेज में जांच की सुविधा हो तो शायद मरीजों को पहले ही जानकारी लग जाए। एक चिकित्सक के मुताबिक अन्य जनपदों की तुलना में यहां कैंसर के केस अधिक मिल रहे हैं, जो जांच का विषय है। क्यों लोगों में कैंसर बढ़ रहा है, जांच कराई जाए तो कारण पता चलेगा और बीमारी पर अंकुश लगाई जा सकती है।
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प्रशासन के आंकड़े दे रहे मरीजों के बढ़ने की गवाही
प्रशासन के रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2023 में 499 गंभीर रोगियों को इलाज के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए सहायता के रूप में 7.28 करोड़ धनराशि दी गई है। इसमें कैंसर के मरीजों की संख्या 134 रही है। यह वे मरीज हैं, जो सहायता के लिए आवेदन किए तो वह सामने आ गए। न जाने कितने लोग ऐसे हैं जो इलाज करा रहे हैं और उनका कोई रिकार्ड ही नहीं है।
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यह लक्षण दिखे तो हो जाएं सावधान
अगर कहीं मांस की गुठली में एकाएक वृद्धि होने लगे। दर्द के साथ ही खून आने लगे। खाने में परेशानी हो, जलन हो। गले में दर्द बना रहे, आवाज में भारीपन हो जाए। पानी निगला न जा रहा हो। घाव तीन सप्ताह से अधिक समय भर न रहा हो तो तत्काल चिकित्सक के पास जाएं। उनकी सलाह पर दवा लें और जांच कराएं। क्योंकि यह कैंसर का लक्षण हो सकता है। इसमें लापरवाही घातक हो सकती है। क्योंकि इन लक्षणों से जुड़े मरीज हर माह कई मिल रहे हैं।
-डॉ. संजय कुमार शर्मा, नाक, कान गला रोग विशेषज्ञ, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
एनएमसी के नियम के तहत ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती होती है। हर माह कैंसर के लक्षण वाले पांच से अधिक मरीज मिल रहे हैं। जो मरीज मिलते हैं, उन्हें हायर सेंटर भेज दिया जाता है। लोगों में जागरुकता की कमी है। लोगों को जागरुक किया जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि बीमारी क्या है। क्यों और किस वजह से होती है। कैंसर दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन करके जागरुक किया जाएगा।
-डॉ. एके झा, प्राचार्य माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज