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Siddharthnagar News: कथा का नौ दिनों तक श्रवण करने से जीव का हो जाता है उद्धार
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आचार्य श्रीकृष्ण शास्त्री। संवाद
सुदामा चरित्र के साथ श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान का हुआ समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के धनोहरी गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा वाचक आचार्य श्रीकृष्ण शास्त्री ने भागवत कथा के अंतिम दिन कई प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। इसमें ऊषा चरित्र, नृग चरित्र, सुदामा प्रसंग, परीक्षित मोक्ष की कथा का बड़े ही रोचक अंदाज में कथा सुनाई।
आचार्य ने श्रद्धालुओं को भागवत अपने जीवन में उतारने को कहा। साथ ही श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की मिसाल पेश की। समाज को समानता का संदेश दिया। कथा वाचक ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का नौ दिनों तक श्रवण करने से जीव का उद्धार हो जाता है, इस कथा कराने वाले भी पुण्य के भागी होते हैं। सुदामा चरित्र को विस्तार से सुनाते हुए श्रीकृष्ण सुदामा की निश्छल मित्रता का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे बिना याचना के कृष्ण ने गरीब सुदामा की स्थिति को सुधारा।
इस दाैरान सुदामा की मनमोहक झांकियों का चित्रण किया गया, जिसे देखकर हर कोई भावविभोर हो उठा। अंत में कृष्ण के दिव्य लोक पहुंचने का वर्णन किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के धनोहरी गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा वाचक आचार्य श्रीकृष्ण शास्त्री ने भागवत कथा के अंतिम दिन कई प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। इसमें ऊषा चरित्र, नृग चरित्र, सुदामा प्रसंग, परीक्षित मोक्ष की कथा का बड़े ही रोचक अंदाज में कथा सुनाई।
आचार्य ने श्रद्धालुओं को भागवत अपने जीवन में उतारने को कहा। साथ ही श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की मिसाल पेश की। समाज को समानता का संदेश दिया। कथा वाचक ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का नौ दिनों तक श्रवण करने से जीव का उद्धार हो जाता है, इस कथा कराने वाले भी पुण्य के भागी होते हैं। सुदामा चरित्र को विस्तार से सुनाते हुए श्रीकृष्ण सुदामा की निश्छल मित्रता का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे बिना याचना के कृष्ण ने गरीब सुदामा की स्थिति को सुधारा।
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इस दाैरान सुदामा की मनमोहक झांकियों का चित्रण किया गया, जिसे देखकर हर कोई भावविभोर हो उठा। अंत में कृष्ण के दिव्य लोक पहुंचने का वर्णन किया।