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ईंट, सीमेंट, सरिया महंगा-काम कराने से पीछे हट रहे ठेकेदार

Mon, 30 May 2022 11:48 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 30 May 2022 11:48 PM IST
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Bricks, cement, bars are costly contractors withdrawing from getting the work done
ईंट, सीमेंट, सरिया महंगा-काम कराने से पीछे हट रहे ठेकेदार
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सिद्धार्थनगर। पीडब्लूडी की मूल्य सूची में 50 किग्रा सीमेंट के एक बैग की कीमत 250 रुपये है, वहीं बाजार में इसकी कीमत 450 रुपये है। इसी तरह भवन निर्माण की अन्य सामग्रियों की सरकारी कीमत भी बाजार मूल्य से बेहद कम है। इससे सरकारी भवनों के निर्माण की निविदा लेने से ठेकेदार कतरा रहे हैं। इसी कारण कुछ दिन पूर्व सरकारी भवन की मरम्मत संबंधी 15 कार्यों की दो निविदा प्रक्रियाओं में नौ कार्यों पर कोई ठेकेदार शामिल ही नहीं हुआ।
प्रदेश के सभी सरकारी विभागों में निर्माण कराने के लिए पीडब्लूडी के ही मानक निर्धारित किए जाते हैं। इसी क्रम में पीडब्लूडी की तरफ से निर्धारित भवन निर्माण सामग्रियों का मूल्य भी अन्य विभागों के निर्माण में लागू किए जाते हैं। पीडब्लूडी सूची में एक हजार ईंट का मूल्य छह हजार रुपये निर्धारित है, जबकि बाजार मूल्य आठ हजार रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह सरिया की सरकारी दर 4700 रुपये प्रति क्विंटल है। बाजार मूल्य सात हजार रुपये से 7200 रुपये प्रति क्विंटल तक है। ऐसे में सरकारी भवनों के निर्माण व मरम्मत कराने से ठेकेदार कतरा रहे हैं।
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ठेकेदार उत्पल शर्मा, देवेंद्र कुमार और इकबाल खां का कहना है कि बाजार मूल्य से सरकारी दर बेहद कम होने के कारण भवनों के निर्माण व मरम्मत कराने में घाटा हो रहा है। इसी कारण भवन मरम्मत व निर्माण कार्य की निविदा प्रक्रिया से दूर रहना उचित है। पीडब्लूडी के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार का कहना है कि निर्माण सामग्री की मूल्य सूची का निर्धारण प्रदेश स्तर से होता है। वर्तमान बाजार मूल्य से सरकारी दर में अंतर है। शासन स्तर से प्राप्त निर्देशों का अनुपालन कराया जाता है।
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भवन मरम्मत की दो निविदा से बनाई दूरी
राजकीय इंटर कॉलेज एवं कर्मचारियों के सरकारी आवास की मरम्मत के लिए पीडब्लूडी की तरफ से 16 मई एवं 25 मई को निविदा निकाली गई थी। 16 मई में भवन मरम्मत के 11 कार्यों में पांच पर किसी ने निविदा नहीं डाली। वहीं, 25 मई के निविदा प्रक्रिया में भी ठेकेदार ने दूरी बना ली। भवन निर्माण सामग्री का सरकारी से बाजार मूल्य अधिक होने के कारण जानकार ठेकेदार निविदा में शामिल होने से कतरा रहे हैं।

नगद धरोहर राशि जमा करने से भी कतरा रहे ठेकेदार
अब तक निविदा प्रक्रिया में धरोहर के तौर पर किसान विकास पत्र आदि अभिलेख की प्रतिलिपि जमा होती रही, वर्तमान में निविदा डालने के लिए कार्य मूल्य के 10 प्रतिशत धनराशि बैंक खाते से विभाग के खाते में जमा करनी होती है, जो टेंडर नहीं मिलने की दशा में कई माह बाद वापस हो रही है। इस कारण रकम फंसने के डर से भी ठेकेदार निविदा लेने से कतरा रहे हैं।
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