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आयुर्वेद से पर्यटकों के इलाज की कवायद
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 06 May 2018 10:46 PM IST
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hospital
सिद्धार्थनगर। सब कुछ ठीक ठाक रहा तो आने वाले दिनों में कपिलवस्तु पहुंचने वाले विदेशी पर्यटकों का उपचार देशी तरीके से किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के सभी पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटकों के स्वास्थ्य सुविधा को ध्यान में रखते हुए उनके उपचार में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति अपनाने की कवायद शुरू की गई है। इसके जरिए आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा मिलेगा।
इस संबंध में महानिदेशक पर्यटन की ओर से उप निदेशक पर्यटन प्रीति श्रीवास्तव के पास पत्र आया है।पत्र के आधार पर बताया गया कि वर्तमान में एलोपैथिक चिकित्सा पद्धतियों के विपरीत अन्य कई महत्वपूर्ण चिकित्सा पद्धतियां लोकप्रिय हो रही हैं। क्योंकि इनके साइड इफेक्ट नहीं होते और उपचार में धनराशि भी कम खर्च होती है। इस पत्र के बाद क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि उत्तर प्रदेश में आगंतुक पर्यटकों के स्वास्थ्य, सुविधा, सुरक्षा के दृष्टिगत वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के तौर पर जिले में आयुर्वेद तथा अन्य वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों यथा योग, प्राणिक, हीलिंग, रेकी, एक्युप्रेशर, नेचुरोपैथी, एरोमापैथी, कलर थेरपी इत्यादि के क्षेत्र में कार्यरत प्रतिष्ठित संस्थाओं, रजिस्टर्ड स्वयंसेवी संस्थाओं को चिह्नित कर उनका स्पष्ट विवरण अविलंब उपलब्ध कराने की अपेक्षा की है।
क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी अरविंद कुमार राय ने बताया कि संस्था का चयन होने के बाद कपिलवस्तु समेत जनपद के अन्य पर्यटन स्थलों पर आने वाले पयर्टकों का उपचार एलोपैथिक के बजाय अन्य वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति से कराने की पहल की जाएगी। प्रदेश सरकार ने पर्यटकों के सेहत का ध्यान रखते हुए यह कदम उठाया है।
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इस संबंध में महानिदेशक पर्यटन की ओर से उप निदेशक पर्यटन प्रीति श्रीवास्तव के पास पत्र आया है।पत्र के आधार पर बताया गया कि वर्तमान में एलोपैथिक चिकित्सा पद्धतियों के विपरीत अन्य कई महत्वपूर्ण चिकित्सा पद्धतियां लोकप्रिय हो रही हैं। क्योंकि इनके साइड इफेक्ट नहीं होते और उपचार में धनराशि भी कम खर्च होती है। इस पत्र के बाद क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि उत्तर प्रदेश में आगंतुक पर्यटकों के स्वास्थ्य, सुविधा, सुरक्षा के दृष्टिगत वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के तौर पर जिले में आयुर्वेद तथा अन्य वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों यथा योग, प्राणिक, हीलिंग, रेकी, एक्युप्रेशर, नेचुरोपैथी, एरोमापैथी, कलर थेरपी इत्यादि के क्षेत्र में कार्यरत प्रतिष्ठित संस्थाओं, रजिस्टर्ड स्वयंसेवी संस्थाओं को चिह्नित कर उनका स्पष्ट विवरण अविलंब उपलब्ध कराने की अपेक्षा की है।
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क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी अरविंद कुमार राय ने बताया कि संस्था का चयन होने के बाद कपिलवस्तु समेत जनपद के अन्य पर्यटन स्थलों पर आने वाले पयर्टकों का उपचार एलोपैथिक के बजाय अन्य वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति से कराने की पहल की जाएगी। प्रदेश सरकार ने पर्यटकों के सेहत का ध्यान रखते हुए यह कदम उठाया है।
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