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आधी रात के बाद बारिश ने जगाया
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 21 May 2016 11:07 PM IST
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ग्राम थरौली में आंधी से गिरा पेड़।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मौसम ने फिर करवट ली है। शुक्रवार को दिनभर उमस और गर्मी के बाद आधी रात के बाद करीब दो बजे तेज आंधी के साथ बारिश हुई। इससे मौसम सुहाना हो गया और गर्मी से लोगों को काफी हद तक निजात मिल गई। इस दौरान जगह-जगह बिजली के खंभे गिरने से और तार टूटने से विद्युत आपूर्ति चरमरा गई है।
जिला मुख्यालय के कुछ हिस्सों में सुबह 11 बजे आपूर्ति शुरू कर दी गई, लेकिन बार-बार ट्रिपिंग के चलते शाम 5 बजे तक आपूर्ति सुचारु नहीं हो पाई थी। ग्रामीण क्षेत्रों में देर शाम तक अंधेरा छाया रहा। पेड़ गिरने से आवागमन भी बाधित हुआ।
तेज हवाओं से सबसे ज्यादा नुकसान आम की फसल को हुआ है। हल्की बारिश खरीफ की फसल के लिए फायदेमंद बताई जा रही है। शुक्रवार देर शाम से ही आसमान में बादल छाने से मौसम खुशनुमा हो गया था। रात करीब दो बजे तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई।
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बारिश से ज्यादा असर आंधी का रहा। तेज हवाओं के कारण पुराने पेड़ उखड़ गए। घरों के ऊपर लगे बैनर, पोस्टर, होर्डिंग, टिनशेड उड़ गए। थरौली गांव के पास नवीन मंडी मार्ग पर पेड़ गिरने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
विद्युत तारों पर पेड़ों की टहनियां गिरने से ब्रेक डाउन हो गया। इससे रात 2 बजे के बाद से ही आपूर्ति भी ठप हो गई। पूरी रात लोगों ने अंधेरे में गुजारी। सुबह करीब 11 बजे बिजली आई, मगर चंद मिनट रहने के बाद चली गई।
बार-बार ट्रिपिंग के चलते बिजली आने-जाने का क्रम बना रहा। बर्डपुर, लोटन, बांसी, खेसरहा, पथरा, मिश्रौलिया सहित अन्य क्षेत्रों में भी आंधी के बाद से बिजली गुल रही। देर शाम तक ज्यादातर क्षेत्रों में बिजली नहीं आ पाई थी।
एक्सईएन राममूरत का कहना था कि आंधी के कारण करीब दो दर्जन स्थानों पर तारों पर पेड़ की टहनियां गिरने से ब्रेकडाउन हुआ था। दोपहर 2 बजे तक सभी फीडर शुरू कर दिए गए थे। कुछ स्थानों पर लोकल फाल्ट के कारण आपूर्ति बाधित है। इसे भी शीघ्र ही दुरुस्त कर लिया जाएगा।
शुक्रवार की रात हुई बारिश को कृषि विशेषज्ञों ने खरीफ की फसलों के लिए अच्छा माना है। जिला कृषि अधिकारी एसएन चौधरी के मुताबिक खरीफ की खेती के लिए यह अच्छी बारिश है। किसान खेत तैयार कर सकते हैं। ढैंचा की बुवाई के लिए यह उत्तम समय है।
ढैंचा हरी खाद के रूप में मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में उपयोगी होगा। उन्होंने तेज हवाओं के कारण आम की फसलों को काफी नुकसान बताया। आंधी से आम और केले की फसल पर बुरा असर पड़ा है।
तेज हवाओं के साथ शुक्रवार की रात हुई बारिश का असर सुबह सड़कों पर दिखा। जलनिकासी के समुचित इंतजाम न होने से ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों पर पानी लग गया है। टूटी सड़कों पर जगह-जगह पानी लगने से राहगीरों को आवागमन में फजीहत झेलनी पड़ी। पकड़ी से पिपरी मार्ग पर पकड़ी चौराहे के पास पानी लगने से यात्री परेशान रहे। लोटन, इटवा, बर्डपुर कस्बे में भी कई जगह जलजमाव की समस्या से लोग जूझते रहे।
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जिला मुख्यालय के कुछ हिस्सों में सुबह 11 बजे आपूर्ति शुरू कर दी गई, लेकिन बार-बार ट्रिपिंग के चलते शाम 5 बजे तक आपूर्ति सुचारु नहीं हो पाई थी। ग्रामीण क्षेत्रों में देर शाम तक अंधेरा छाया रहा। पेड़ गिरने से आवागमन भी बाधित हुआ।
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तेज हवाओं से सबसे ज्यादा नुकसान आम की फसल को हुआ है। हल्की बारिश खरीफ की फसल के लिए फायदेमंद बताई जा रही है। शुक्रवार देर शाम से ही आसमान में बादल छाने से मौसम खुशनुमा हो गया था। रात करीब दो बजे तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई।
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बारिश से ज्यादा असर आंधी का रहा। तेज हवाओं के कारण पुराने पेड़ उखड़ गए। घरों के ऊपर लगे बैनर, पोस्टर, होर्डिंग, टिनशेड उड़ गए। थरौली गांव के पास नवीन मंडी मार्ग पर पेड़ गिरने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
विद्युत तारों पर पेड़ों की टहनियां गिरने से ब्रेक डाउन हो गया। इससे रात 2 बजे के बाद से ही आपूर्ति भी ठप हो गई। पूरी रात लोगों ने अंधेरे में गुजारी। सुबह करीब 11 बजे बिजली आई, मगर चंद मिनट रहने के बाद चली गई।
बार-बार ट्रिपिंग के चलते बिजली आने-जाने का क्रम बना रहा। बर्डपुर, लोटन, बांसी, खेसरहा, पथरा, मिश्रौलिया सहित अन्य क्षेत्रों में भी आंधी के बाद से बिजली गुल रही। देर शाम तक ज्यादातर क्षेत्रों में बिजली नहीं आ पाई थी।
एक्सईएन राममूरत का कहना था कि आंधी के कारण करीब दो दर्जन स्थानों पर तारों पर पेड़ की टहनियां गिरने से ब्रेकडाउन हुआ था। दोपहर 2 बजे तक सभी फीडर शुरू कर दिए गए थे। कुछ स्थानों पर लोकल फाल्ट के कारण आपूर्ति बाधित है। इसे भी शीघ्र ही दुरुस्त कर लिया जाएगा।
शुक्रवार की रात हुई बारिश को कृषि विशेषज्ञों ने खरीफ की फसलों के लिए अच्छा माना है। जिला कृषि अधिकारी एसएन चौधरी के मुताबिक खरीफ की खेती के लिए यह अच्छी बारिश है। किसान खेत तैयार कर सकते हैं। ढैंचा की बुवाई के लिए यह उत्तम समय है।
ढैंचा हरी खाद के रूप में मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में उपयोगी होगा। उन्होंने तेज हवाओं के कारण आम की फसलों को काफी नुकसान बताया। आंधी से आम और केले की फसल पर बुरा असर पड़ा है।
तेज हवाओं के साथ शुक्रवार की रात हुई बारिश का असर सुबह सड़कों पर दिखा। जलनिकासी के समुचित इंतजाम न होने से ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों पर पानी लग गया है। टूटी सड़कों पर जगह-जगह पानी लगने से राहगीरों को आवागमन में फजीहत झेलनी पड़ी। पकड़ी से पिपरी मार्ग पर पकड़ी चौराहे के पास पानी लगने से यात्री परेशान रहे। लोटन, इटवा, बर्डपुर कस्बे में भी कई जगह जलजमाव की समस्या से लोग जूझते रहे।