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किसानों का गन्ने की खेती से मोह भंग, कम हुआ रकबा
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गन्ने की फसल। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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किसानों का गन्ने की खेती से मोह भंग, कम हुआ रकबा
- 25 वर्ष पूर्व जिले के पांचों तहसीलों में होती थी गन्ने की खेती
- जिले में चीनी मिल नहीं होने, मूल्य का भुगतान देरी से होने से परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। आसपास के कई चीनी मिल बंद होने और बस्ती, बलरामपुर व नेपाल के बढ़नी स्थित चीनी मिलों में तौल के बाद भुगतान में परेशानी के कारण किसानों ने गन्ने की खेती से मुंह मोड़ लिया है। नतीजा यह रहा कि जहां 25 वर्ष पूर्व जिले के पांचों तहसीलों के बड़े रकबे में गन्ने की खेती होती थी, वहीं अब कुछ स्थानों पर गन्ने की बुवाई होती है। गन्ना विभाग के अनुसार वर्तमान में जिले में 60 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है।
कुछ वर्ष पहले जिले के नौगढ़, बांसी, शोहरतगढ़, इटवा एवं डुमरियागंज तहसीलों के कछार क्षेत्र में किसान गन्ना की खेती करते थे, लेकिन नजदीक में स्थित फरेंदा व रूधौली चीनी मिलों के बंद हो जाने से नौगढ़, बांसी क्षेत्र के किसान गन्ने की खेती करना बंद कर दिए। इसके साथ ही बस्ती, बलरामपुर एवं बढ़नी चीनी मिलों में गन्ना तौल कराने के बाद भुगतान में हो रही परेशानी के कारण शोहरतगढ़, इटवा और डुमरियागंज के किसान भी गन्ने की खेती में रुचि लेना कम कर दिया।
भनवापुर प्रतिनिधि के अनुसार डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के भनवापुर ब्लॉक के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के किसानों का सबसे महत्वपूर्ण फसल गन्ना हुआ करता था। वर्तमान में दूसरे जिले के चीनी मिल प्रबंधन के मनमानी और जिले में कोई चीनी मिल ना होने के कारण किसान गन्ने की खेती कम कर दिए हैं। यहां के किसान गन्ने की उपज बस्ती जिले के रूधौली में मिल को बेचने पर मजबूर हैं। मिल प्रबंधन जिले के बढ़नी गन्ना समिति के 11 गन्ना क्रय केंद्रों के माध्यम से किसानों को गन्ने की उपज खरीदता है। गन्ना क्षेत्रफल कम होने के कारण दो क्रय केंद्रों को एक में अटैच करना पड़ा।
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क्षेत्र के गन्ना किसान कृष्ण देव शुक्ल, राम सेवक, शिव शंकर, बृजनंदन शुक्ला ने बताया कि हम लोग हिजुरा गन्ना क्रय केंद्र पर अपने उपज को बेचते हैं। पहले जहां आठ से 10 बीघा गन्ने की बुवाई करते थे वहीं, चार से छह बीघा ही गन्ने की खेती करते हैं। भुगतान में दिक्कत के कारण आने वाले समय में गन्ने की खेती बंद करना पड़ेगा।
दो क्रय केंद्र बंद, तीसरे से किया संबद्ध
भनवापुर। पिछले चार पेराई सत्र से लगातार घट गन्ना क्षेत्रफल के कारण 11 क्रय केंद्रों में तरहर तथा सोहना क्रय केंद्र को बंद कर दिया गया है। इन केंद्रों से जुड़े गन्ना किसानों को 15 किमी दूर हिजुरा जाकर गन्ना उपज को तौल कराना मजबूरी हो गया है।
विभाग की तरफ से किसानों को जागरूक कर गन्ना की खेती का दायरा बढ़ाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। किसानों की समस्याओं का निदान करते हुए उन्हें गन्ना क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास जारी है।
- रंजीत कुमार निराला, जिला गन्ना अधिकारी
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वर्ष गन्ने की खेती का रकबा
1995 1.25 लाख हेक्टेयर
2000 90 हजार हेक्टेयर
2005 80 हजार हेक्टेयर
2010 70 हजार हेक्टेयर
2015 57 हजार हेक्टेयर
2020 56 हजार हेक्टेयर
2021 55 हजार हेक्टेयर
2022 60 हजार हेक्टेयर
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- 25 वर्ष पूर्व जिले के पांचों तहसीलों में होती थी गन्ने की खेती
- जिले में चीनी मिल नहीं होने, मूल्य का भुगतान देरी से होने से परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। आसपास के कई चीनी मिल बंद होने और बस्ती, बलरामपुर व नेपाल के बढ़नी स्थित चीनी मिलों में तौल के बाद भुगतान में परेशानी के कारण किसानों ने गन्ने की खेती से मुंह मोड़ लिया है। नतीजा यह रहा कि जहां 25 वर्ष पूर्व जिले के पांचों तहसीलों के बड़े रकबे में गन्ने की खेती होती थी, वहीं अब कुछ स्थानों पर गन्ने की बुवाई होती है। गन्ना विभाग के अनुसार वर्तमान में जिले में 60 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है।
कुछ वर्ष पहले जिले के नौगढ़, बांसी, शोहरतगढ़, इटवा एवं डुमरियागंज तहसीलों के कछार क्षेत्र में किसान गन्ना की खेती करते थे, लेकिन नजदीक में स्थित फरेंदा व रूधौली चीनी मिलों के बंद हो जाने से नौगढ़, बांसी क्षेत्र के किसान गन्ने की खेती करना बंद कर दिए। इसके साथ ही बस्ती, बलरामपुर एवं बढ़नी चीनी मिलों में गन्ना तौल कराने के बाद भुगतान में हो रही परेशानी के कारण शोहरतगढ़, इटवा और डुमरियागंज के किसान भी गन्ने की खेती में रुचि लेना कम कर दिया।
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भनवापुर प्रतिनिधि के अनुसार डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के भनवापुर ब्लॉक के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के किसानों का सबसे महत्वपूर्ण फसल गन्ना हुआ करता था। वर्तमान में दूसरे जिले के चीनी मिल प्रबंधन के मनमानी और जिले में कोई चीनी मिल ना होने के कारण किसान गन्ने की खेती कम कर दिए हैं। यहां के किसान गन्ने की उपज बस्ती जिले के रूधौली में मिल को बेचने पर मजबूर हैं। मिल प्रबंधन जिले के बढ़नी गन्ना समिति के 11 गन्ना क्रय केंद्रों के माध्यम से किसानों को गन्ने की उपज खरीदता है। गन्ना क्षेत्रफल कम होने के कारण दो क्रय केंद्रों को एक में अटैच करना पड़ा।
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क्षेत्र के गन्ना किसान कृष्ण देव शुक्ल, राम सेवक, शिव शंकर, बृजनंदन शुक्ला ने बताया कि हम लोग हिजुरा गन्ना क्रय केंद्र पर अपने उपज को बेचते हैं। पहले जहां आठ से 10 बीघा गन्ने की बुवाई करते थे वहीं, चार से छह बीघा ही गन्ने की खेती करते हैं। भुगतान में दिक्कत के कारण आने वाले समय में गन्ने की खेती बंद करना पड़ेगा।
दो क्रय केंद्र बंद, तीसरे से किया संबद्ध
भनवापुर। पिछले चार पेराई सत्र से लगातार घट गन्ना क्षेत्रफल के कारण 11 क्रय केंद्रों में तरहर तथा सोहना क्रय केंद्र को बंद कर दिया गया है। इन केंद्रों से जुड़े गन्ना किसानों को 15 किमी दूर हिजुरा जाकर गन्ना उपज को तौल कराना मजबूरी हो गया है।
विभाग की तरफ से किसानों को जागरूक कर गन्ना की खेती का दायरा बढ़ाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। किसानों की समस्याओं का निदान करते हुए उन्हें गन्ना क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास जारी है।
- रंजीत कुमार निराला, जिला गन्ना अधिकारी
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वर्ष गन्ने की खेती का रकबा
1995 1.25 लाख हेक्टेयर
2000 90 हजार हेक्टेयर
2005 80 हजार हेक्टेयर
2010 70 हजार हेक्टेयर
2015 57 हजार हेक्टेयर
2020 56 हजार हेक्टेयर
2021 55 हजार हेक्टेयर
2022 60 हजार हेक्टेयर