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Siddharthnagar News: आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोपी दोषमुक्त
Tue, 04 Jul 2023 12:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 04 Jul 2023 12:27 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जनपद एवं सत्र न्यायाधीश संजय कुमार मलिक ने आत्महत्या के लिए उकसाने एवं जानमाल की धमकी देने के मामले में आरोपी संदीप शर्मा को दोषमुक्त कर दिया है। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप साबित न कर पाने पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है।
थाना मिश्रौलिया के एक व्यक्ति ने पुलिस को दिए तहरीर में आरोप लगाया था कि उसकी पुत्री को गांव के ही संदीप शर्मा डरा-धमका कर मुंबई ले गया था। बाद में उसकी पुत्री कोघर लाकर छोड़ दिया। संदीप के शादी से मना करने पर पुत्री ने सात नवंबर 2021 को खुदकुशी कर ली। उसका आरोप था कि संदीप और उसकी पुत्री से घटना के पहले तक फोन पर लगातार बात हो रही थी। पुलिस ने 15 मई 20212 को एफआईआर दर्ज किया और विवेचना करके न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट व मामले के तथ्यों में पाया कि गवाहों की गवाही में काफी विरोधाभास है। अभियोजन पक्ष लगाए गए आरोपों को साबित करने में विफल रहने के कारण मामले को संदेहयुक्त पाया। कोर्ट ने आरोपी को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त ठहराया और उसे समस्त आरोपों से बरी कर दिया।
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सिद्धार्थनगर। जनपद एवं सत्र न्यायाधीश संजय कुमार मलिक ने आत्महत्या के लिए उकसाने एवं जानमाल की धमकी देने के मामले में आरोपी संदीप शर्मा को दोषमुक्त कर दिया है। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप साबित न कर पाने पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है।
थाना मिश्रौलिया के एक व्यक्ति ने पुलिस को दिए तहरीर में आरोप लगाया था कि उसकी पुत्री को गांव के ही संदीप शर्मा डरा-धमका कर मुंबई ले गया था। बाद में उसकी पुत्री कोघर लाकर छोड़ दिया। संदीप के शादी से मना करने पर पुत्री ने सात नवंबर 2021 को खुदकुशी कर ली। उसका आरोप था कि संदीप और उसकी पुत्री से घटना के पहले तक फोन पर लगातार बात हो रही थी। पुलिस ने 15 मई 20212 को एफआईआर दर्ज किया और विवेचना करके न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट व मामले के तथ्यों में पाया कि गवाहों की गवाही में काफी विरोधाभास है। अभियोजन पक्ष लगाए गए आरोपों को साबित करने में विफल रहने के कारण मामले को संदेहयुक्त पाया। कोर्ट ने आरोपी को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त ठहराया और उसे समस्त आरोपों से बरी कर दिया।
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