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बरसात सेे किसानों के चेहरे पर खुशी
Siddhartha nagar
Updated Mon, 03 Jun 2013 05:30 AM IST
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सिद्धार्थनगर। तीन दिन की बरसात से किसानों के चेहरे खिल गए हैं। अधिकांश किसानों ने खरीफ फसल की तैयारी प्रारंभ कर दी है। बरसात ने जमीन को नमी प्रदान कर दी है। जिससे किसानों को खेतों को तैयार करने में सहूलियत हो गई है।
तीन दिन हुई बारिश ने न सिर्फ लोगों को गर्मी से राहत दी है बल्कि किसानों को भी बड़ी सहूलियत मिल गई है। इस बरसात ने उन्हें खेत की जुताई में काफी मदद की है। बेहद गर्म धरती को पानी मिलने से उसमें कुछ नमी आई तो है परंतु पर्याप्त नहीं हो पाई है। किसानों के लिए यही लाभप्रद है क्योंकि इस थोड़ी से बरसात ने खेतों को जुताई के लिए तैयार कर दिया है। यदि यह बरसात नहीं होती तो कृषकों को पानी का इंतजार करना पड़ता। साथ ही जो किसान सक्षम हैं वह बोरिंग आदि से खेताें को पानी पहुंचाकर उसे नमी प्रदान करते और जुताई के लिए उसे तैयार करते। बगैर नमी के खेतों की जुताई संभव नहीं है। इस बाबत कृषि विज्ञान केन्द्र, सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. मारकंडेय सिंह का कहना है कि किसानों के लिए यह बारिश लाभदायक है। उनका कहना है कि इस कम बरसात से एक तरफ तो खेतों में नमी आ गई जिससे किसान भाई खेतों की जुताई कर उसे खरीफ के लिए तैयार कर सकते हैं दूसरी तरफ कम बारिश के कारण जुताई के बाद खेतों में बचे हुए खरपतवार भी नष्ट हो जाएंगे। जो कि अगली फसल के लिए फायदेमंद है। उन्होंने बताया कि बरसात होने के कारण अगली फसल की तैयारी के दौरान किसानों को चाहिए की वह ढैंचा की बुआई कर उसका लाभ ले सकते हैं। ढ़ैंचा के कई लाभ हैं उदाहरण के लिए यह खरपतवार को नष्ट करने में सहायक होता है तथा खेतों में कार्बन को बढ़ाता है। वहीं मात्र 45 दिनों में खरीफ की रोपाई से पहले ही यह तैयार हो जाता है। डॉ. मारकंडेय ने बताया कि इस बरसात के कारण खेतों में पर्याप्त नमीं है जो किसान सीधे खेतों में धान की बुआई करना चाहते हैं वह कर सकते हैं। जुताई के समय ही ढैंचा बो दें साथ ही टू फोर डी नामक रसायन का भी प्रयोग करें।
खेतों में लोहे की कमी
कृषि वैज्ञानिक डॉ. मारकंडेय सिंह का कहना है कि नर्सरी तैयार करते समय माइक्रो न्यूट्रियंस का विशेष ध्यान रखें। वर्तमान में देखने में आ रहा है कि खेतों में लौह तत्व की कमी है। ऐसे में किसानों को चाहिए की वह नर्सरी से पहले वह खेतों में जिंक व फेरस सल्फेट डालें।
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तीन दिन हुई बारिश ने न सिर्फ लोगों को गर्मी से राहत दी है बल्कि किसानों को भी बड़ी सहूलियत मिल गई है। इस बरसात ने उन्हें खेत की जुताई में काफी मदद की है। बेहद गर्म धरती को पानी मिलने से उसमें कुछ नमी आई तो है परंतु पर्याप्त नहीं हो पाई है। किसानों के लिए यही लाभप्रद है क्योंकि इस थोड़ी से बरसात ने खेतों को जुताई के लिए तैयार कर दिया है। यदि यह बरसात नहीं होती तो कृषकों को पानी का इंतजार करना पड़ता। साथ ही जो किसान सक्षम हैं वह बोरिंग आदि से खेताें को पानी पहुंचाकर उसे नमी प्रदान करते और जुताई के लिए उसे तैयार करते। बगैर नमी के खेतों की जुताई संभव नहीं है। इस बाबत कृषि विज्ञान केन्द्र, सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. मारकंडेय सिंह का कहना है कि किसानों के लिए यह बारिश लाभदायक है। उनका कहना है कि इस कम बरसात से एक तरफ तो खेतों में नमी आ गई जिससे किसान भाई खेतों की जुताई कर उसे खरीफ के लिए तैयार कर सकते हैं दूसरी तरफ कम बारिश के कारण जुताई के बाद खेतों में बचे हुए खरपतवार भी नष्ट हो जाएंगे। जो कि अगली फसल के लिए फायदेमंद है। उन्होंने बताया कि बरसात होने के कारण अगली फसल की तैयारी के दौरान किसानों को चाहिए की वह ढैंचा की बुआई कर उसका लाभ ले सकते हैं। ढ़ैंचा के कई लाभ हैं उदाहरण के लिए यह खरपतवार को नष्ट करने में सहायक होता है तथा खेतों में कार्बन को बढ़ाता है। वहीं मात्र 45 दिनों में खरीफ की रोपाई से पहले ही यह तैयार हो जाता है। डॉ. मारकंडेय ने बताया कि इस बरसात के कारण खेतों में पर्याप्त नमीं है जो किसान सीधे खेतों में धान की बुआई करना चाहते हैं वह कर सकते हैं। जुताई के समय ही ढैंचा बो दें साथ ही टू फोर डी नामक रसायन का भी प्रयोग करें।
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खेतों में लोहे की कमी
कृषि वैज्ञानिक डॉ. मारकंडेय सिंह का कहना है कि नर्सरी तैयार करते समय माइक्रो न्यूट्रियंस का विशेष ध्यान रखें। वर्तमान में देखने में आ रहा है कि खेतों में लौह तत्व की कमी है। ऐसे में किसानों को चाहिए की वह नर्सरी से पहले वह खेतों में जिंक व फेरस सल्फेट डालें।
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