{"_id":"71-53043","slug":"Siddhartha-nagar-53043-71","type":"story","status":"publish","title_hn":"सपा ने जताया माता प्रसाद पांडेय पर भरोसा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सपा ने जताया माता प्रसाद पांडेय पर भरोसा
Siddhartha nagar
Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। समाजवादी पार्टी ने सिद्धार्थनगर जनपद की डुमरियागंज लोकसभा सीट से अपने प्रत्याशी का चयन कर दिया। उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष तथा इटवा विधान सभा क्षेत्र के विधायक माता प्रसाद पांडेय यहां से सपा के उम्मीदवार होंगे। सपा ने प्रत्याशी घोषित कर चुनावी तापमान गरम कर दिया है।
इटवा क्षेत्र के ग्राम पिरैला में काफी गरीब परिवार में जन्मे माता प्रसाद पांडेय शुरू से ही मेधावी रहे हैं। पिता गोमती प्रसाद पांडेय किसान थे। खेती ही उनका मुख्य पेशा रहा। माता यशोदा देवी के प्रिय पुत्र माता प्रसाद पांडेय ने पढ़ाई को ही मुख्य ध्येय बनाया। राजनीति शास्त्र में मास्टर डिग्री लेने के बाद उन्होंने एलएलबी किया। वर्ष 1977 के चुनाव में उन्होंने इटवा से चुनाव लड़ने की ठानी, लेकिन जनता पार्टी से उन्हें टिकट नहीं मिला। विश्वनाथ पांडेय को टिकट मिल गया। इससे माता प्रसाद पांडेय चुनाव नहीं लड़ सकें। वर्ष 1980 के चुनाव में वह दलित मजदूर किसान पार्टी से पहली बार विधायक चुने गए। वर्ष 1984 में जनता दल से तथा 1989 में लोकदल से विधायक बने। इसके बाद लोकदल में दो फाड़ हुआ। माता प्रसाद पांडेय लोकदल अजीत के साथ शुरू में रहे। बाद में लोकदल बहुगुणा में मुलायम सिंह यादव के साथ चले गए। तब से मुलायम सिंह यादव के साथ हैं। वह लगातार वर्ष 1989 तक इटवा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किए। इसके बाद उन्हें स्वास्थ्य मंत्री का पद मिला। वर्ष 1991 में चुनाव हारे। हार का यह सिलसिला वर्ष 1993 और 1997 में भी जारी रहा। वर्ष 2002 के चुनाव में उन्हें इस सीट पर फिर विजय मिली और सरकार में श्रम मंत्री का पद मिला। फिर कुछ माह बाद इन्हें विधानसभा अध्यक्ष बना दिया गया। वर्ष 2007 के चुनाव में दोबारा इन्होंने जीत दर्ज की, लेकिन सरकार बसपा की बनी। इसके बाद वर्ष 2012 के चुनाव में इन्होंने जीत की हैट्रिक लगाई। दोबारा विधानसभा अध्यक्ष बनाए गए। बता दें कि विधायक रहते हुए इन्होंने वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव भी लड़ा था, लेकिन जीत नहीं मिली थी। पार्टी ने दोबारा इन पर विश्वास जताया है।
विज्ञापन
इटवा क्षेत्र के ग्राम पिरैला में काफी गरीब परिवार में जन्मे माता प्रसाद पांडेय शुरू से ही मेधावी रहे हैं। पिता गोमती प्रसाद पांडेय किसान थे। खेती ही उनका मुख्य पेशा रहा। माता यशोदा देवी के प्रिय पुत्र माता प्रसाद पांडेय ने पढ़ाई को ही मुख्य ध्येय बनाया। राजनीति शास्त्र में मास्टर डिग्री लेने के बाद उन्होंने एलएलबी किया। वर्ष 1977 के चुनाव में उन्होंने इटवा से चुनाव लड़ने की ठानी, लेकिन जनता पार्टी से उन्हें टिकट नहीं मिला। विश्वनाथ पांडेय को टिकट मिल गया। इससे माता प्रसाद पांडेय चुनाव नहीं लड़ सकें। वर्ष 1980 के चुनाव में वह दलित मजदूर किसान पार्टी से पहली बार विधायक चुने गए। वर्ष 1984 में जनता दल से तथा 1989 में लोकदल से विधायक बने। इसके बाद लोकदल में दो फाड़ हुआ। माता प्रसाद पांडेय लोकदल अजीत के साथ शुरू में रहे। बाद में लोकदल बहुगुणा में मुलायम सिंह यादव के साथ चले गए। तब से मुलायम सिंह यादव के साथ हैं। वह लगातार वर्ष 1989 तक इटवा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किए। इसके बाद उन्हें स्वास्थ्य मंत्री का पद मिला। वर्ष 1991 में चुनाव हारे। हार का यह सिलसिला वर्ष 1993 और 1997 में भी जारी रहा। वर्ष 2002 के चुनाव में उन्हें इस सीट पर फिर विजय मिली और सरकार में श्रम मंत्री का पद मिला। फिर कुछ माह बाद इन्हें विधानसभा अध्यक्ष बना दिया गया। वर्ष 2007 के चुनाव में दोबारा इन्होंने जीत दर्ज की, लेकिन सरकार बसपा की बनी। इसके बाद वर्ष 2012 के चुनाव में इन्होंने जीत की हैट्रिक लगाई। दोबारा विधानसभा अध्यक्ष बनाए गए। बता दें कि विधायक रहते हुए इन्होंने वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव भी लड़ा था, लेकिन जीत नहीं मिली थी। पार्टी ने दोबारा इन पर विश्वास जताया है।
विज्ञापन