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किसी नेता का बेटा क्यों शहीदों में नहीं होता
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फोटो-
किसी नेता का बेटा क्यों शहीदों में नहीं होता...
माघ मेला मैदान में आयोजित हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन
नामी गिरामी कवि और कवियत्री हुई शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
बांसी। माघ मेला मैदान में सोमवार की रात आदर्श नगर पालिका परिषद की ओर से आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरा में एक से बढ़कर एक रचनाओं की प्रस्तुति ने लोगों को मुग्ध कर दिया। पूर्व सांसद डॉ. चंद्रशेखर त्रिपाठी की अध्यक्षता और वरिष्ठ कवि डॉ. ज्ञानेंद्र द्विवेदी दीपक के संचालन में कार्यक्रम रात आठ बजे से शुरू होकर भोर में तीन बजे तक चलता रहा।
उत्तराखण्ड के नैनीताल से आईं कवियत्री गौरी मिश्रा ने शुरुआत में जहां इश्क, मोहब्बत के तीर चलाकर लोगों की वाहवाही लूटी, वहीं, सीमा पर डटे जवानों व शहीदों के परिवार व पत्नी की बात अपनी रचना के माध्यम से सुनाते हुए खुद ही रो पड़ीं। श्रोताओं की भी आंखें छलक आईं। देशभक्ति के रंग में पूरा पंडाल रंग गया। उन्होंने कहा कि वो शामिल दिवाली, ईदों में नहीं होता, भगत व चांद बिस्मिल और हमीदों में नहीं होता। जब होता है मजदूरों किसानों का ही होता है, किसी नेता का बेटा क्यों शहीदों में नहीं होता। इसी क्रम में कुशीनगर से आए शायर अक्श वारसी ने कोई भी मुल्क हो लेकिन हमारा हो नहीं सकता, हमारे हिन्द से बढ़कर वो प्यारा हो नहीं सकता। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष और नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि चमन आरा राईनी व एसडीएम प्रबुद्ध सिंह ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन से की। इसके बाद आंबेडकर नगर से आईं कवियत्री गीता त्रिपाठी ने सरस्वती वंदना व वसीम गोरखपुरी ने नात-ए-पाक से कार्यक्रम को दिशा प्रदान की। शायर जमाल कुद्दुसी ने वो अमर है कभी नहीं मरता, सर वतन पे कटा दिया जिसने। पंक्तियां पढ़ते हुए कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की। वरिष्ठ कवि ब्रह्मदेव शास्त्री पंकज ने सुनाया कि कलम से दुश्मनों का सिर कलम करने जो हम निकले, सरहदों की हिफाजत में कहीं अपनों का दम निकले। तिरंगा सामने हो और गंगाजल गले में हो, जुबां से आखिरी अल्फाज वंदे मातरम निकले। को लोगों ने खूब सराहा। सुशील श्रीवास्तव सागर ने अपनी पारी में कहा कि आज गर्दिश में हूं कल मैं भी उबर जाऊंगा। कौन कहता है तेरे प्यार में मर जाऊंगा। हास्य कवि राकेश त्रिपाठी गंवार ने सुनाया कि किए कुकर्म का सबको मिलेगा फल आखिर। किसे पता है कि सरकार बदल जाएगी। उक्त के अलावा राजस्थान से आईं शायरा साइस्तां महजबीन ने संजीदगी भरे अंदाज में अपनी रचनाएं पेशकर खूब सराहना बटोरीं। शायरा चमन आरा राईनी ने लड़ो मिलकर दरिंदों से ये हिंदुस्तान सबका है से अपनी बात शुरू करके लोगों में देश प्रेम की भावना जागृति कर दी। बिहार से आए नन्दजी नन्दा, फैजाबाद से आये ताराचंद तन्हा, हास्य कवि रत्नेश चतुर्वेदी रतन, रिजवान अहमद, शिवसागर शहर, अरशद सिद्धार्थनगरी आदि ने भी अपनी रचनाएं सुनाकर कार्यक्रम को सफलता की बुलंदियों तक पहुंचाया। नगर पालिका अध्यक्ष मोहम्मद इद्रीस राईनी पटवारी ने सभी रचनाकारों को अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान अधिशासी अधिकारी अरविंद कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश चन्द्र उपाध्याय, हरीश चंदवानी, मो. इरफान बाकर, बरकत अली राईनी, रामदेव पांडेय, इशरत जमील, शेरअली, ईश्वरचन्द्र दूबे, मोहम्मद शमीम अहमद, तुफैल अहमद आदि मौजूद रहे।
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किसी नेता का बेटा क्यों शहीदों में नहीं होता...
माघ मेला मैदान में आयोजित हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन
नामी गिरामी कवि और कवियत्री हुई शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
बांसी। माघ मेला मैदान में सोमवार की रात आदर्श नगर पालिका परिषद की ओर से आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरा में एक से बढ़कर एक रचनाओं की प्रस्तुति ने लोगों को मुग्ध कर दिया। पूर्व सांसद डॉ. चंद्रशेखर त्रिपाठी की अध्यक्षता और वरिष्ठ कवि डॉ. ज्ञानेंद्र द्विवेदी दीपक के संचालन में कार्यक्रम रात आठ बजे से शुरू होकर भोर में तीन बजे तक चलता रहा।
उत्तराखण्ड के नैनीताल से आईं कवियत्री गौरी मिश्रा ने शुरुआत में जहां इश्क, मोहब्बत के तीर चलाकर लोगों की वाहवाही लूटी, वहीं, सीमा पर डटे जवानों व शहीदों के परिवार व पत्नी की बात अपनी रचना के माध्यम से सुनाते हुए खुद ही रो पड़ीं। श्रोताओं की भी आंखें छलक आईं। देशभक्ति के रंग में पूरा पंडाल रंग गया। उन्होंने कहा कि वो शामिल दिवाली, ईदों में नहीं होता, भगत व चांद बिस्मिल और हमीदों में नहीं होता। जब होता है मजदूरों किसानों का ही होता है, किसी नेता का बेटा क्यों शहीदों में नहीं होता। इसी क्रम में कुशीनगर से आए शायर अक्श वारसी ने कोई भी मुल्क हो लेकिन हमारा हो नहीं सकता, हमारे हिन्द से बढ़कर वो प्यारा हो नहीं सकता। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष और नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि चमन आरा राईनी व एसडीएम प्रबुद्ध सिंह ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन से की। इसके बाद आंबेडकर नगर से आईं कवियत्री गीता त्रिपाठी ने सरस्वती वंदना व वसीम गोरखपुरी ने नात-ए-पाक से कार्यक्रम को दिशा प्रदान की। शायर जमाल कुद्दुसी ने वो अमर है कभी नहीं मरता, सर वतन पे कटा दिया जिसने। पंक्तियां पढ़ते हुए कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की। वरिष्ठ कवि ब्रह्मदेव शास्त्री पंकज ने सुनाया कि कलम से दुश्मनों का सिर कलम करने जो हम निकले, सरहदों की हिफाजत में कहीं अपनों का दम निकले। तिरंगा सामने हो और गंगाजल गले में हो, जुबां से आखिरी अल्फाज वंदे मातरम निकले। को लोगों ने खूब सराहा। सुशील श्रीवास्तव सागर ने अपनी पारी में कहा कि आज गर्दिश में हूं कल मैं भी उबर जाऊंगा। कौन कहता है तेरे प्यार में मर जाऊंगा। हास्य कवि राकेश त्रिपाठी गंवार ने सुनाया कि किए कुकर्म का सबको मिलेगा फल आखिर। किसे पता है कि सरकार बदल जाएगी। उक्त के अलावा राजस्थान से आईं शायरा साइस्तां महजबीन ने संजीदगी भरे अंदाज में अपनी रचनाएं पेशकर खूब सराहना बटोरीं। शायरा चमन आरा राईनी ने लड़ो मिलकर दरिंदों से ये हिंदुस्तान सबका है से अपनी बात शुरू करके लोगों में देश प्रेम की भावना जागृति कर दी। बिहार से आए नन्दजी नन्दा, फैजाबाद से आये ताराचंद तन्हा, हास्य कवि रत्नेश चतुर्वेदी रतन, रिजवान अहमद, शिवसागर शहर, अरशद सिद्धार्थनगरी आदि ने भी अपनी रचनाएं सुनाकर कार्यक्रम को सफलता की बुलंदियों तक पहुंचाया। नगर पालिका अध्यक्ष मोहम्मद इद्रीस राईनी पटवारी ने सभी रचनाकारों को अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान अधिशासी अधिकारी अरविंद कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश चन्द्र उपाध्याय, हरीश चंदवानी, मो. इरफान बाकर, बरकत अली राईनी, रामदेव पांडेय, इशरत जमील, शेरअली, ईश्वरचन्द्र दूबे, मोहम्मद शमीम अहमद, तुफैल अहमद आदि मौजूद रहे।
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