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लिफ्ट से सिफ्ट नहीं हो पा रहे डायलिसिस के मरीज
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लिफ्ट खराब, रैंप से ले जाए जा रहे मरीज
जिला अस्पताल की तीसरी मंजिल पर है डायलिसिस यूनिट, सर्जिकल, बर्न यूनिट और ओटी
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। 100 बेड वाले जिला अस्पताल की लिफ्ट खराब है। ऐसे में अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित डायलिसिस यूनिट और दूसरी मंजिल पर स्थित सर्जिकल, बर्न यूनिट और ऑपरेशन थियेटर में मरीजों को ले जाने के लिए रैंप का सहारा ले पड़ता है। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को परिजन उठाकर ले जाते हैं या फिर स्टेचर से ले जाते हैं। इससे उन्हेें खासी दिक्कत होती है। कई बार जरा सी असावधानी तीमारदारों को चोटिल भी कर देती है। हालांकि अस्पताल के जिम्मेदार लिफ्ट की खराबी से इन्कार कर रहे हैं, जबकि मरीज व उनके परिजन लिफ्ट खराब होने की बात कह रहे हैं। सीएमएस डॉ. रोचस्मति पांडेय ने कहा कि बिजली रहने पर लिफ्ट चलती है। बिजली न रहने पर बंद कर दी जाती है।
मरीज बोर्ड, वार्ड तक पहुंचने में होती है दिक्कत
डायलिसिस यूनिट मेें भर्ती उसका क्षेत्र के पकड़ी गांव निवासी जितेंद्र नाथ राय(50), बर्डपुर निवासी कृष्णचंद (60), महराजगंज जिले के गौर निवासी शिवनरायन सिंह (60), बस्ती जिले के गनेशपुर गांव निवासी विनोद यादव (60) ने कहा है कि लिफ्ट खराब होने के कारण यहां पहुंचने लिए रैंप का सहारा लेना पड़ता है। रैंप भी खतरनाक है। थोड़ी से चूक होने पर व्यक्ति घायल हो सकता है। अस्पताल में मगर मरीजों की समस्याओं पर कोई ध्यान देने वाला कोई नहीं है। वहीं सर्जिकल वार्ड, बर्न यूनिट, ऑपरेशन थियेटर में कुल 40 गंभीर बीमारी से ग्रसित लोग पहुंचते हैं। लिफ्ट नहीं चलने के कारण इन मरीजों को दूसरे विकल्प से वार्ड तक पहुंचना पड़ता है।
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लिफ्ट खराब, रैंप से ले जाए जा रहे मरीज
जिला अस्पताल की तीसरी मंजिल पर है डायलिसिस यूनिट, सर्जिकल, बर्न यूनिट और ओटी
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। 100 बेड वाले जिला अस्पताल की लिफ्ट खराब है। ऐसे में अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित डायलिसिस यूनिट और दूसरी मंजिल पर स्थित सर्जिकल, बर्न यूनिट और ऑपरेशन थियेटर में मरीजों को ले जाने के लिए रैंप का सहारा ले पड़ता है। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को परिजन उठाकर ले जाते हैं या फिर स्टेचर से ले जाते हैं। इससे उन्हेें खासी दिक्कत होती है। कई बार जरा सी असावधानी तीमारदारों को चोटिल भी कर देती है। हालांकि अस्पताल के जिम्मेदार लिफ्ट की खराबी से इन्कार कर रहे हैं, जबकि मरीज व उनके परिजन लिफ्ट खराब होने की बात कह रहे हैं। सीएमएस डॉ. रोचस्मति पांडेय ने कहा कि बिजली रहने पर लिफ्ट चलती है। बिजली न रहने पर बंद कर दी जाती है।
मरीज बोर्ड, वार्ड तक पहुंचने में होती है दिक्कत
डायलिसिस यूनिट मेें भर्ती उसका क्षेत्र के पकड़ी गांव निवासी जितेंद्र नाथ राय(50), बर्डपुर निवासी कृष्णचंद (60), महराजगंज जिले के गौर निवासी शिवनरायन सिंह (60), बस्ती जिले के गनेशपुर गांव निवासी विनोद यादव (60) ने कहा है कि लिफ्ट खराब होने के कारण यहां पहुंचने लिए रैंप का सहारा लेना पड़ता है। रैंप भी खतरनाक है। थोड़ी से चूक होने पर व्यक्ति घायल हो सकता है। अस्पताल में मगर मरीजों की समस्याओं पर कोई ध्यान देने वाला कोई नहीं है। वहीं सर्जिकल वार्ड, बर्न यूनिट, ऑपरेशन थियेटर में कुल 40 गंभीर बीमारी से ग्रसित लोग पहुंचते हैं। लिफ्ट नहीं चलने के कारण इन मरीजों को दूसरे विकल्प से वार्ड तक पहुंचना पड़ता है।
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