{"_id":"59bc0b3e4f1c1b2a688b4bd6","slug":"71505495870-siddharthnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"30 वर्ष पुराने मदरसे का शासन ने रोका अनुदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
30 वर्ष पुराने मदरसे का शासन ने रोका अनुदान
Updated Fri, 15 Sep 2017 10:47 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिद्धार्थनगर। इटवा ब्लॉक के भदोखर गांव में तीस वर्षों से संचालित मदरसे का अनुदान शासन ने रोक दिया है। सत्यापन के दौरान मदरसे में कई खामियां मिली हैं। जिस भूमि पर मदरसे का संचालन होता आ रहा है, वह प्रबंधन के नाम ही नहीं है। कमरों का आकार भी मानक के अनुरूप नहीं है। मानक विहीन होने के बावजूद इसके संचालन पर सख्ती से शासन ने मदरसे को दिए जाने वाले सभी अनुदान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अनुदान रुकने से जहां 14 शिक्षकों का वेतन बाधित हो गया है, वहीं, बच्चों की पढ़ाई सहित अन्य सुविधाओं में भी व्यवधान की आशंका जताई जा रही है।
भदोखर गांव में मदरसा मिराजुल उलूम में कक्षा एक से 8 तक के 278 बच्चे नामांकित हैं। इन्हें अध्यापन के लिए 14 शिक्षक नियुक्त हैं। इनके अलावा आधुनिकीकरण योजना के तहत भी तीन शिक्षक कार्यरत हैं। वर्ष 1980 में मान्यता हासिल करने वाले मदरसे को वर्ष 2005 से अनुदान मिल रहा है। नियमों के तहत बिना मानक पूरा किए किसी शिक्षण संस्थान को न तो मान्यता दी जा सकती है और न ही अनुदान। पिछले दिनों शासन के निर्देश पर सत्यापन हुआ तो वर्षों से अनुदान पा रहे इस मदरसे में कई खामियां उजागर हुई। मदरसा का संचालन उस भूमि पर हो रहा है, जिस पर उसका स्वामित्व ही नहीं है। कमरे भी छोटे-छोटे आकार के हैं।
मानक के अनुसार मदरसों का कमरा 300 स्क्वायर फीट से कम का नहीं होना चाहिए। सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर शासन ने इस मदरसे का अनुदान रोक दिया है। अनुदान रुकने के साथ ही मदरसे के शिक्षकों का वेतन व शासन से प्रदत्त अन्य सुविधाओं पर भी रोक लग गई है। बताते हैं कि मदरसे में कार्यरत 14 शिक्षकों को फरवरी माह के बाद से ही वेतन नहीं मिल रहा। अब अनुदान पर रोक से उनकी चिंता बढ़ गई है। इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर भी दिख रहा है। मदरसे के प्रधानाचार्य गुलाम दस्तगीर कादरी ने बताया कि मदरसा जब स्थापित हुआ, तब छोटे आकार के ही कमरे बनते थे। नए संशोधन के बाद कमरों का आकार भी बढ़वा दिया गया है। ग्राम समाज की जमीन पर मदरसा है, जिसे मदरसे के नाम पर ट्रांसफर कराने को आवेदन दिया गया है। जल्द ही नए सिरे से आवेदन करेंगे ताकि अनुदान शुरू हो सके।
विज्ञापन
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष पांडेय ने बताया कि शासन ने पिछले महीने जिले के 16 मदरसों का सत्यापन कराया था। इसमें भदोखर में संचालित मदरसे में खामियां मिली थीं। मदरसे के पास खुद की जमीन नहीं है। शासन के निर्देश पर अनुदान पर रोक लगाया गया है। जमीन की प्रक्रिया पूरी होने तक अनुदान नहीं दिया जा सकता।
50 फीसदी मदरसों ने ही अपलोड किया अपना डाटा
सिद्धार्थनगर। मदरसों की गतिविधियों पर निगरानी के लिए शासन ने सभी मान्यता प्राप्त मदरसों को अपना संपूर्ण डाटा विभागीय पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया था। इसके लिए 15 सितंबर तक की अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी। तय तिथि तक भी जिले के आधे मदरसों ने ही जानकारी पोर्टल पर अपलोड की है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मुताबिक जिले में 600 मदरसे संचालित हैं। इनमें 16 अनुदानित हैं, जबकि 300 मदरसों को आधुनिकीकरण योजना के तहत विज्ञान अध्यापकों को मानदेय दिया जा रहा है। अब तक सिर्फ 50 फीसदी मदरसों ने ही डाटा पोर्टल पर अपलोड किया है। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष पांडेय ने बताया कि जिन मदरसों ने डाटा अपलोड नहीं किया है, उनके विरुद्ध शासन के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी। संबंधित मदरसों की मान्यता प्रत्याहरण व छात्रवृत्ति सहित अन्य योजनाओं से वंचित रखने की कार्रवाई भी की जा सकती है। फिल्हाल शासन के निर्देश का इंतजार है।
विज्ञापन
भदोखर गांव में मदरसा मिराजुल उलूम में कक्षा एक से 8 तक के 278 बच्चे नामांकित हैं। इन्हें अध्यापन के लिए 14 शिक्षक नियुक्त हैं। इनके अलावा आधुनिकीकरण योजना के तहत भी तीन शिक्षक कार्यरत हैं। वर्ष 1980 में मान्यता हासिल करने वाले मदरसे को वर्ष 2005 से अनुदान मिल रहा है। नियमों के तहत बिना मानक पूरा किए किसी शिक्षण संस्थान को न तो मान्यता दी जा सकती है और न ही अनुदान। पिछले दिनों शासन के निर्देश पर सत्यापन हुआ तो वर्षों से अनुदान पा रहे इस मदरसे में कई खामियां उजागर हुई। मदरसा का संचालन उस भूमि पर हो रहा है, जिस पर उसका स्वामित्व ही नहीं है। कमरे भी छोटे-छोटे आकार के हैं।
विज्ञापन
मानक के अनुसार मदरसों का कमरा 300 स्क्वायर फीट से कम का नहीं होना चाहिए। सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर शासन ने इस मदरसे का अनुदान रोक दिया है। अनुदान रुकने के साथ ही मदरसे के शिक्षकों का वेतन व शासन से प्रदत्त अन्य सुविधाओं पर भी रोक लग गई है। बताते हैं कि मदरसे में कार्यरत 14 शिक्षकों को फरवरी माह के बाद से ही वेतन नहीं मिल रहा। अब अनुदान पर रोक से उनकी चिंता बढ़ गई है। इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर भी दिख रहा है। मदरसे के प्रधानाचार्य गुलाम दस्तगीर कादरी ने बताया कि मदरसा जब स्थापित हुआ, तब छोटे आकार के ही कमरे बनते थे। नए संशोधन के बाद कमरों का आकार भी बढ़वा दिया गया है। ग्राम समाज की जमीन पर मदरसा है, जिसे मदरसे के नाम पर ट्रांसफर कराने को आवेदन दिया गया है। जल्द ही नए सिरे से आवेदन करेंगे ताकि अनुदान शुरू हो सके।
विज्ञापन
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष पांडेय ने बताया कि शासन ने पिछले महीने जिले के 16 मदरसों का सत्यापन कराया था। इसमें भदोखर में संचालित मदरसे में खामियां मिली थीं। मदरसे के पास खुद की जमीन नहीं है। शासन के निर्देश पर अनुदान पर रोक लगाया गया है। जमीन की प्रक्रिया पूरी होने तक अनुदान नहीं दिया जा सकता।
50 फीसदी मदरसों ने ही अपलोड किया अपना डाटा
सिद्धार्थनगर। मदरसों की गतिविधियों पर निगरानी के लिए शासन ने सभी मान्यता प्राप्त मदरसों को अपना संपूर्ण डाटा विभागीय पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया था। इसके लिए 15 सितंबर तक की अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी। तय तिथि तक भी जिले के आधे मदरसों ने ही जानकारी पोर्टल पर अपलोड की है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मुताबिक जिले में 600 मदरसे संचालित हैं। इनमें 16 अनुदानित हैं, जबकि 300 मदरसों को आधुनिकीकरण योजना के तहत विज्ञान अध्यापकों को मानदेय दिया जा रहा है। अब तक सिर्फ 50 फीसदी मदरसों ने ही डाटा पोर्टल पर अपलोड किया है। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष पांडेय ने बताया कि जिन मदरसों ने डाटा अपलोड नहीं किया है, उनके विरुद्ध शासन के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी। संबंधित मदरसों की मान्यता प्रत्याहरण व छात्रवृत्ति सहित अन्य योजनाओं से वंचित रखने की कार्रवाई भी की जा सकती है। फिल्हाल शासन के निर्देश का इंतजार है।