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बाढ़ में आई रेत ‘बंजर’ हुए खेत
Updated Wed, 06 Sep 2017 10:20 PM IST
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बांसी (सिद्धार्थनगर)। बाढ़ का पानी उतरने के बाद तबाही के निशां सामने आने लगे हैं। पहले बाढ़ में हुए तबाही से किसानों की कमर टूट गई थी, अब जैसे-जैसे नदी का पानी खेतों से उतर रहा, जमीन को देख उनका दिल बैठने लगा है। नदी के पास के अधिकांश गांवों की उपजाऊ भूमि पर रेत की परत चढ़ गई है। रबी व खरीफ की फसल अब कैसे पैदा होगी, इसकी चिंता किसानों को सता रही है।
जिले में आई बाढ़ ने सबसे अधिक तबाही असोगवा-नगवा बांध को काट कर की थी। सतवाढ़ी गांव के पास हुए कटान से आसपास के सैकड़ों बीघा खेतों में बाढ़ का पानी आ गया था। जब पानी उतरा तो खेतों में मिट्टी का स्थान रेत ने ले लिया है। अब इन खेतों में फसल पैदा असंभव दिख रहा है। यह देख किसान चिंता में डूब गए हैं। असोगवा-नगवा बांध पर कटान के बाद नदी की मुख्य धारा ने गांव की तरफ का रूख कर लिया था। इसका परिणाम यह हुआ कि गांव के चौदह घर धराशायी हो गए। नवैइला व सतवाढ़ी गांव के सैकड़ों बीघा खेत को बाढ़ ने आगोश में ले लिया था। पानी उतरने के बाद इनमें तीन से चार फीट बालू पट गए हैं। किसानों का मानना है कि अब इन खेतों में धान व गेहूं की पैदावार न के बराबर होगी। इस बार कि बाढ़ ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। प्रकृति की इस मार से उन्हें वर्षों तक जंग लड़ना होगा। बाढ़ के पानी के साथ आए रेत से सबसे ज्यादा खेत नवैइला गांव के प्रभावित हुए हैं। ग्राम नवैइला के संतराम यादव, रामलखन यादव, आशिक अली, सुगना, फराहिम, रामउग्रह, काशी, विश्वनाथ, जगदीश, सुदीश, सुभान अली, रामनयन, पुरुषोत्तम, दुर्गा प्रसाद, प्रहलाद यादव, दयाराम यादव व सतवाढ़ी के नसीब अली, बुद्धू, रमजान, सई मोहम्मद, चंद्रिका और अब्दुल हक़ आदि के खेत में मिट्टी के स्थान पर रेत आ गया है। ग्राम नवैइला निवासी संतराम कहते हैं कि बांध में कटान होने पर नदी की धारा दक्षिण की तरफ घूम गई। जिससे गांव के खेतों में तीन फिट से अधिक बालू पट गया है। चार बीघा खेत रेत में बदल चुका है। रामलखन ने कहा कि किस्मत ही खराब है। बाढ़ ने फसल बर्बाद किया ही खेत में बालू आने से सब चौपट हो गया। इन खेतो में खेती करना मुश्किल है। आशिक अली कहते हैं कि जीवन में कई बार बाढ़ को देखा व सामना किया है। लेकिन इतनी भयावह बाढ़ कभी नहीं आई थी। चार बीघा खेत बालू से पट गया है जो कोई भी फसल के योग्य नहीं रह गया। जीवकोपार्जन की समस्या आ गई है। सब कुछ ऊपर वाले के हाथ में है। सुगना कहती है कि दो बीघा खेत में मिट्टी की जगह रेत दिख रहा है। अब खेती कैसे होगी। चिंता खाए जा रही है।
पिच रोड पर भी जमा बालू
बांसी। कटान के बाद नदी ने ऐसा रूख बदला कि सब कुछ तबाह हो गया। नवइला गांव से असोगवा-नगवा बांध को जोडने वाली पिच रोड का वजूद समाप्त हो गया। इस रोड पर भी तीन से चार फीट बालू लग गया है। रोड का कुछ हिस्सा कटान स्थल के पास बने कुंड में समा गया है।
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जिले में आई बाढ़ ने सबसे अधिक तबाही असोगवा-नगवा बांध को काट कर की थी। सतवाढ़ी गांव के पास हुए कटान से आसपास के सैकड़ों बीघा खेतों में बाढ़ का पानी आ गया था। जब पानी उतरा तो खेतों में मिट्टी का स्थान रेत ने ले लिया है। अब इन खेतों में फसल पैदा असंभव दिख रहा है। यह देख किसान चिंता में डूब गए हैं। असोगवा-नगवा बांध पर कटान के बाद नदी की मुख्य धारा ने गांव की तरफ का रूख कर लिया था। इसका परिणाम यह हुआ कि गांव के चौदह घर धराशायी हो गए। नवैइला व सतवाढ़ी गांव के सैकड़ों बीघा खेत को बाढ़ ने आगोश में ले लिया था। पानी उतरने के बाद इनमें तीन से चार फीट बालू पट गए हैं। किसानों का मानना है कि अब इन खेतों में धान व गेहूं की पैदावार न के बराबर होगी। इस बार कि बाढ़ ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। प्रकृति की इस मार से उन्हें वर्षों तक जंग लड़ना होगा। बाढ़ के पानी के साथ आए रेत से सबसे ज्यादा खेत नवैइला गांव के प्रभावित हुए हैं। ग्राम नवैइला के संतराम यादव, रामलखन यादव, आशिक अली, सुगना, फराहिम, रामउग्रह, काशी, विश्वनाथ, जगदीश, सुदीश, सुभान अली, रामनयन, पुरुषोत्तम, दुर्गा प्रसाद, प्रहलाद यादव, दयाराम यादव व सतवाढ़ी के नसीब अली, बुद्धू, रमजान, सई मोहम्मद, चंद्रिका और अब्दुल हक़ आदि के खेत में मिट्टी के स्थान पर रेत आ गया है। ग्राम नवैइला निवासी संतराम कहते हैं कि बांध में कटान होने पर नदी की धारा दक्षिण की तरफ घूम गई। जिससे गांव के खेतों में तीन फिट से अधिक बालू पट गया है। चार बीघा खेत रेत में बदल चुका है। रामलखन ने कहा कि किस्मत ही खराब है। बाढ़ ने फसल बर्बाद किया ही खेत में बालू आने से सब चौपट हो गया। इन खेतो में खेती करना मुश्किल है। आशिक अली कहते हैं कि जीवन में कई बार बाढ़ को देखा व सामना किया है। लेकिन इतनी भयावह बाढ़ कभी नहीं आई थी। चार बीघा खेत बालू से पट गया है जो कोई भी फसल के योग्य नहीं रह गया। जीवकोपार्जन की समस्या आ गई है। सब कुछ ऊपर वाले के हाथ में है। सुगना कहती है कि दो बीघा खेत में मिट्टी की जगह रेत दिख रहा है। अब खेती कैसे होगी। चिंता खाए जा रही है।
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पिच रोड पर भी जमा बालू
बांसी। कटान के बाद नदी ने ऐसा रूख बदला कि सब कुछ तबाह हो गया। नवइला गांव से असोगवा-नगवा बांध को जोडने वाली पिच रोड का वजूद समाप्त हो गया। इस रोड पर भी तीन से चार फीट बालू लग गया है। रोड का कुछ हिस्सा कटान स्थल के पास बने कुंड में समा गया है।
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