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रहमतों की बारिश का महींना है माह-ए-रमजान
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फोटो कैप्सन-09एसडीएन83पी व 84पी- रमजान को लेकर डुमरियागंज मंदिर चौराहे पर सजीं खजूर व सेवई की दुकानें।
मुबारक रमजान में होती है रहमतों की बारिश
इबादत के बदले रोजेदारों को मिलती है गुनाहों से माफी
कुरान में जिक्र है रमजान की अहमियत, मौसम की तल्खियां बेअसर
हाशिम रिजवी
डुमरियागंज। माह-ए-रमजान रहमत व बरकत की बारिश का ऐसा महीना है जिसमें हर तरफ इबादत का सिलसिला चलता है। रमजानुल मुबारक का महीना मुसलमानों के लिए सबसे अफजल महीना माना गया है। इस महीने को तीन अशरों में बांटा गया है। पहला अशरा रहमतों का है। खुदा की तरफ से रहमत बरसती है। भीषण गर्मी और जिस्म को झुलसा देने वाली धूप के बावजूद रोजेदार अपनी इबादत में जुटे हुए हैं। उनकी इबादत के सामने मौसम की तल्खियां भी कोई असर नहीं डाल पा रही हैं।
शिया जामा मस्जिद के पेश नमाज मौलाना मोहम्मद हसन ने बताया कि पहला अशरा रहमत का है। दूसरा बरकत और तीसरा मगफिरत का है। तीनों अशरों को 10-10 दिनों में बांटा गया है। हर 10 दिन को अशरा कहा जाता है। रमजान के महीने में हर अमल का अज्र बेहद बढ़ा दिया जाता है। रमजान की फजीलत और इसकी अहमियत का जिक्र कुरान पाक में है। पैगंबर इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब ने फरमाया है कि रमजान का पहला अशरा रहमत वाला है। दूसरा गुनाहों से माफी मांगने का है और तीसरा और आखिरी अशरा जहन्नम की आग से फनह (मुक्ति) पाने का है।
धार्मिक ग्रंथ (कुरान) नाजिल हुई, जो इस्लाम की मुकद्दस पाक ग्रंथ है। इसके दूसरे पारे में आयत नंबर 183 में रोजा रखना हर मुसलमान के लिए जरूरी बताया गया है। जामा मस्जिद डुमरियागंज के पेश इमाम मुफ्ती अहसानुल्लाह कासिमी ने रमजान की फजीलत को बताते हुए कहा कि रोजा सिर्फ भूखे- प्यासे रहने का नाम नहीं बल्कि खुद पर नियंत्रण करना, अश्लील या गलत काम से बचना है। कहा कि इस मुबारक महीने में किसी तरह के झगड़े या गुस्से से बचना चाहिए।
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तरावीह और कलाम पाक की तिलावत का सिलसिला जारी
मुकद्दस रमजान को लेकर तहसील क्षेत्र के मुस्लिम बहुल गांव में तरावीह और कलाम पाक की तिलावत का सिलसिला लगातार जारी है, जो पूरे एक महीने तक चलेगा। क्षेत्र के हल्लौर, कादिराबाद, बसडिलिया, जबजौवा, वासा दरगाह, सिकहरा, डुमरियागंज, बयारा सहित क्षेत्र में स्थित मस्जिदों और इबादतगाहों पर कलाम पाक की तिलावत और तरावीह की नमाज अदा करने के लिए रोजेदार भारी तादात में जुट रहे हैं।
रमजान को लेकर सज गई खजूर व सेवइयों की दुकानें
माह-ए-रमजान के तहत नगर सहित क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्र के चौराहों पर इफ्तार के लिए खजूर व सेवइयों की दुकानों के साथ ही फलों की कतारबद्ध दुकानें सज गई हैं। लोग इफ्तार और सेहरी के लिए फल और सेवई और लच्छों की खरीद करते दिखाई देने लगे हैं।
रोजा इफ्तार पार्टी से बढ़ता है सौहार्द
बांसी क्षेत्र के अकबरपुर जमुनी गांव में आयोजित हुई पार्टी
अमर उजाला ब्यूरो
बांसी। तहसील क्षेत्र के अकबरपुर जमुनी गांव में समाजसेवी शमीम खान ने आपसी प्रेम व सद्भाव को कायम रखने के लिए गुरुवार को रोजा इफ्तार पार्टी का आयोजन किया। इसमें जमुनी गांव के अलावा आसपास के रोजेदार काफी संख्या में शामिल हुए। रोजा इफ्तार पार्टी में शामिल पूर्व विधायक लालजी यादव ने कहा कि इस तरह के आयोजन से हमारी अनेकता में एकता की संस्कृति को बल मिलता है। समाज को तोड़ने वाली शक्तियों का मनोबल टूटता है। नगर पालिका अध्यक्ष बांसी मो. इद्रीश पटवारी ने कहा कि आज का यह आयोजन आपसी समरसता की मिसाल है। हमें इस परंपरा को कायम रखना है। इस दौरान आयोजक शमीम खान, मौलाना अब्दुल खबीर मदनी, मो. हनीफ, हुसैन अहमद, रियाज अहमद प्रधान, मो. यूसुफ करीम, सलीम और मो. नासिर आदि मौजूद थे।
मुबारक रमजान में होती है रहमतों की बारिश
इबादत के बदले रोजेदारों को मिलती है गुनाहों से माफी
कुरान में जिक्र है रमजान की अहमियत, मौसम की तल्खियां बेअसर
हाशिम रिजवी
डुमरियागंज। माह-ए-रमजान रहमत व बरकत की बारिश का ऐसा महीना है जिसमें हर तरफ इबादत का सिलसिला चलता है। रमजानुल मुबारक का महीना मुसलमानों के लिए सबसे अफजल महीना माना गया है। इस महीने को तीन अशरों में बांटा गया है। पहला अशरा रहमतों का है। खुदा की तरफ से रहमत बरसती है। भीषण गर्मी और जिस्म को झुलसा देने वाली धूप के बावजूद रोजेदार अपनी इबादत में जुटे हुए हैं। उनकी इबादत के सामने मौसम की तल्खियां भी कोई असर नहीं डाल पा रही हैं।
शिया जामा मस्जिद के पेश नमाज मौलाना मोहम्मद हसन ने बताया कि पहला अशरा रहमत का है। दूसरा बरकत और तीसरा मगफिरत का है। तीनों अशरों को 10-10 दिनों में बांटा गया है। हर 10 दिन को अशरा कहा जाता है। रमजान के महीने में हर अमल का अज्र बेहद बढ़ा दिया जाता है। रमजान की फजीलत और इसकी अहमियत का जिक्र कुरान पाक में है। पैगंबर इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब ने फरमाया है कि रमजान का पहला अशरा रहमत वाला है। दूसरा गुनाहों से माफी मांगने का है और तीसरा और आखिरी अशरा जहन्नम की आग से फनह (मुक्ति) पाने का है।
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धार्मिक ग्रंथ (कुरान) नाजिल हुई, जो इस्लाम की मुकद्दस पाक ग्रंथ है। इसके दूसरे पारे में आयत नंबर 183 में रोजा रखना हर मुसलमान के लिए जरूरी बताया गया है। जामा मस्जिद डुमरियागंज के पेश इमाम मुफ्ती अहसानुल्लाह कासिमी ने रमजान की फजीलत को बताते हुए कहा कि रोजा सिर्फ भूखे- प्यासे रहने का नाम नहीं बल्कि खुद पर नियंत्रण करना, अश्लील या गलत काम से बचना है। कहा कि इस मुबारक महीने में किसी तरह के झगड़े या गुस्से से बचना चाहिए।
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तरावीह और कलाम पाक की तिलावत का सिलसिला जारी
मुकद्दस रमजान को लेकर तहसील क्षेत्र के मुस्लिम बहुल गांव में तरावीह और कलाम पाक की तिलावत का सिलसिला लगातार जारी है, जो पूरे एक महीने तक चलेगा। क्षेत्र के हल्लौर, कादिराबाद, बसडिलिया, जबजौवा, वासा दरगाह, सिकहरा, डुमरियागंज, बयारा सहित क्षेत्र में स्थित मस्जिदों और इबादतगाहों पर कलाम पाक की तिलावत और तरावीह की नमाज अदा करने के लिए रोजेदार भारी तादात में जुट रहे हैं।
रमजान को लेकर सज गई खजूर व सेवइयों की दुकानें
माह-ए-रमजान के तहत नगर सहित क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्र के चौराहों पर इफ्तार के लिए खजूर व सेवइयों की दुकानों के साथ ही फलों की कतारबद्ध दुकानें सज गई हैं। लोग इफ्तार और सेहरी के लिए फल और सेवई और लच्छों की खरीद करते दिखाई देने लगे हैं।
रोजा इफ्तार पार्टी से बढ़ता है सौहार्द
बांसी क्षेत्र के अकबरपुर जमुनी गांव में आयोजित हुई पार्टी
अमर उजाला ब्यूरो
बांसी। तहसील क्षेत्र के अकबरपुर जमुनी गांव में समाजसेवी शमीम खान ने आपसी प्रेम व सद्भाव को कायम रखने के लिए गुरुवार को रोजा इफ्तार पार्टी का आयोजन किया। इसमें जमुनी गांव के अलावा आसपास के रोजेदार काफी संख्या में शामिल हुए। रोजा इफ्तार पार्टी में शामिल पूर्व विधायक लालजी यादव ने कहा कि इस तरह के आयोजन से हमारी अनेकता में एकता की संस्कृति को बल मिलता है। समाज को तोड़ने वाली शक्तियों का मनोबल टूटता है। नगर पालिका अध्यक्ष बांसी मो. इद्रीश पटवारी ने कहा कि आज का यह आयोजन आपसी समरसता की मिसाल है। हमें इस परंपरा को कायम रखना है। इस दौरान आयोजक शमीम खान, मौलाना अब्दुल खबीर मदनी, मो. हनीफ, हुसैन अहमद, रियाज अहमद प्रधान, मो. यूसुफ करीम, सलीम और मो. नासिर आदि मौजूद थे।