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नाम को लेकर यहां भी छलक चुका है ‘दर्द’
Thu, 07 Mar 2019 10:26 PM IST
brijesh kumar
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Published by: brijesh kumar
Updated Thu, 07 Mar 2019 10:26 PM IST
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JJ Singh Joins SAD
- फोटो : अमर उजाला
सिद्धार्थनगर। नाम को लेकर जिले में भी कई बार जनप्रतिनिधियों का दर्द छलक चुका है। कई बार ये दर्द मंच से बयां हो चुके हैं। वे अपने दर्द का जिक्र उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से लेकर जिले के प्रभारी मंत्री चेतन चौहान तक के सामने कर चुके हैं। आज भी ये जनप्रतिनिधि मौके-बेमौके पर दर्द बयां कर रहे हैं।
संतकबीरनगर में सांसद शरद त्रिपाठी और मेंहदावल विधायक राकेश सिंह बघेल के बीच शिलापट्ट पर नाम न होने के मुद्दे पर विवाद और मारपीट के बाद जिले की राजनीति भी गरमा गई है। वजह यह है कि यहां भी नाम को लेकर विवाद हो चुके हैं। फर्क बस इतना है कि मामला मारपीट तक नहीं पहुंचा। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में जब सरकार बनी तो उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद खजुरडाढ़ पुल का शिलान्यास करने आए थे। शोहरतगढ़ विधायक चौधरी अमर सिंह ने मंच से केशव मौर्य के सामने कहा था कि कार्यक्रम में उनका नाम तक नहीं लिखा जाता। कार्यक्रम की जानकारी भी नहीं दी जाती। मामले को तब किसी तरह संभाला गया।
शोहरतगढ़ में विद्युत उपकेंद्र के शिलान्यास के समय भी शिलापट्ट पर नाम न होने पर विधायक नाराज हो गए। किसी तरह अन्य जनप्रतिनिधियों ने उन्हें शांत कराया। कलेक्ट्रेट सभागार में हुईं बैठकों में कई बार प्रभारी मंत्री चेतन चौहान के सामने भी विधायक चौधरी अमर सिंह अधिकारियों को नसीहत दे चुके हैं कि शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रम में कम से कम शिलापट्ट पर उनके नाम का उल्लेख करें। कुुछ ऐसा ही दर्द इटवा विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी का भी है। खुले मंच से वह अभी एक सप्ताह पूर्व ही कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के सामने कह चुके हैं कि अधिकारी उन्हें पहचानते तक नहीं हैं। उनका यह दर्द जब से सरकार बनी है तब से है। इससे पहले भी वह कई बार यह बात खुले मंच से कह चुके हैं। ऐसा भी नहीं है कि मनभेद कम हुआ है। जिले में कई जनप्रतिनिधियों में मनमुटाव चल रहा है।
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संतकबीरनगर में सांसद शरद त्रिपाठी और मेंहदावल विधायक राकेश सिंह बघेल के बीच शिलापट्ट पर नाम न होने के मुद्दे पर विवाद और मारपीट के बाद जिले की राजनीति भी गरमा गई है। वजह यह है कि यहां भी नाम को लेकर विवाद हो चुके हैं। फर्क बस इतना है कि मामला मारपीट तक नहीं पहुंचा। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में जब सरकार बनी तो उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद खजुरडाढ़ पुल का शिलान्यास करने आए थे। शोहरतगढ़ विधायक चौधरी अमर सिंह ने मंच से केशव मौर्य के सामने कहा था कि कार्यक्रम में उनका नाम तक नहीं लिखा जाता। कार्यक्रम की जानकारी भी नहीं दी जाती। मामले को तब किसी तरह संभाला गया।
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शोहरतगढ़ में विद्युत उपकेंद्र के शिलान्यास के समय भी शिलापट्ट पर नाम न होने पर विधायक नाराज हो गए। किसी तरह अन्य जनप्रतिनिधियों ने उन्हें शांत कराया। कलेक्ट्रेट सभागार में हुईं बैठकों में कई बार प्रभारी मंत्री चेतन चौहान के सामने भी विधायक चौधरी अमर सिंह अधिकारियों को नसीहत दे चुके हैं कि शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रम में कम से कम शिलापट्ट पर उनके नाम का उल्लेख करें। कुुछ ऐसा ही दर्द इटवा विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी का भी है। खुले मंच से वह अभी एक सप्ताह पूर्व ही कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के सामने कह चुके हैं कि अधिकारी उन्हें पहचानते तक नहीं हैं। उनका यह दर्द जब से सरकार बनी है तब से है। इससे पहले भी वह कई बार यह बात खुले मंच से कह चुके हैं। ऐसा भी नहीं है कि मनभेद कम हुआ है। जिले में कई जनप्रतिनिधियों में मनमुटाव चल रहा है।
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