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भगवान भरोसे चल रही यहां पढ़ाई
Updated Tue, 12 Sep 2017 10:07 PM IST
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सिद्धार्थनगर। नगर के सिंहेश्वरी इंटर कॉलेज की पहचान बेहतर व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाले संस्थान के रूप में रही है। दशकों पूर्व हर अभिभावक के मन में यह अभिलाषा रहती थी कि उनके बच्चे का दाखिला इस कॉलेज में हो। इसके लिए वह हर संभव प्रयास भी करता था, मगर आज वह स्थिति नहीं रही। विद्यालय में दाखिले के लिए मारा-मारी जरूर चलती है, लेकिन पहले का दौर और वह रुचि नहीं है। कारण अब विद्यालयों में अव्यवस्थाएं बढ़ गई हैं। दशकों पूर्व बने भवन जर्जर हो चुके हैं। बारिश में छत से पानी टपकता है। विद्यालय के कई कमरे कंडम घोघित हो चुके हैं, जबकि अधिकांश कमरों की स्थिति अभी भी दयनीय है। आए दिन छत से प्लास्टर टूटकर गिरते हैं। बावजूद बच्चे उसी में बैठ कर पढ़ते हैं। छात्रों की संख्या के सापेक्ष शौचालय की भी व्यवस्था कम है। यह शौचालय भी गंदगी से पटा रहता है। भवन कंडम होने के बाद से छात्रावास बंद हो गया है। पदों के सापेक्ष शिक्षकों की भारी कमी है। प्रवक्ता के दस पदों पर तैनाती है, लेकिन सहायक शिक्षक के 18 पदों के सापेक्ष सिर्फ छह कार्यरत हैं। इन्हीं शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई हो रही है। इस वर्ष विद्यालय में कुल 1181 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय के जिम्मेदारों के मुताबिक पिछले वर्षों से अधिक है। कुल मिलाकर छात्रों की संख्या के अनुपात में शिक्षक न होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कॉलेज में प्रयोगशाला है, मगर संसाधनों की कमी से उसका सही संचालन नहीं हो पा रहा।
शिक्षकों की कमी से खाली रहती है घंटी
इंटर के छात्र विनय चौधरी कहते हैं कि शिक्षकों की कमी के चलते कभी कभार एक-दो घंटी खाली रह जाती है, बाकी पढ़ाई ठीक चल रही है। इंटर के छात्र दुर्गेश यादव व अरबाज सिद्दीकी बताते हैं कि सबसे अधिक पढ़ाई में तो कठिनाई आ ही रही है। इसके अलावा विद्यालय में पर्याप्त शौचालय न होने से अधिक कठिनाई होती है। भवन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है, थोड़ी सी बारिश होने पर छत टपकने लगता है। समस्याएं अनगिनत हैं।
नियमित चलता है एनसीसी कैडेटों का प्रशिक्षण व खेल
पढ़ाई के साथ-साथ खेल अति आवश्यक है। विद्यालय में खेल का वातावरण बेहद अच्छा है। विद्यालय में एनसीसी का भी कोर्स है। यहां एनसीसी में चयनित कैडेटों को नियमित परेड कराया जाता है और उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा खेल शिक्षक बच्चों को वॉलीबाल सहित अन्य खेलों के प्रशिक्षित करते हैं।
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बोले प्रधानाचार्य
प्रधानाचार्य लेफ्टिनेंट डॉ. नीरज श्रीवास्तव कहते हैं कि शिक्षकों की कमी है, फिर भी बेहतर व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है। प्रयास यही रहता है कि किसी कक्षा में कोई घंटी खाली न रहे। शिक्षकों की तैनाती के संबंध में पत्र कई बार विभागीय अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। हां भवन की स्थिति गड़बड़ है। भवन काफी पुराना होने के कारण जर्जर हो चुका है। हमेशा विद्यालय के लिए कुछ बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है।
जनप्रतिनिधि दें ध्यान तो लौटे आए विद्यालय के दिन
विद्यालय के मरम्मत पर शासन तो ध्यान नहीं दे रहा हैं। अगर सांसद व विधायक ध्यान दें दे तो मिटता हुआ सिंहेश्वरी इंटर कॉलेज का अस्तित्व बच जाएगा। धनाभाव में विद्यालय भवन दम तोड़ रहा है।
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शिक्षकों की कमी से खाली रहती है घंटी
इंटर के छात्र विनय चौधरी कहते हैं कि शिक्षकों की कमी के चलते कभी कभार एक-दो घंटी खाली रह जाती है, बाकी पढ़ाई ठीक चल रही है। इंटर के छात्र दुर्गेश यादव व अरबाज सिद्दीकी बताते हैं कि सबसे अधिक पढ़ाई में तो कठिनाई आ ही रही है। इसके अलावा विद्यालय में पर्याप्त शौचालय न होने से अधिक कठिनाई होती है। भवन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है, थोड़ी सी बारिश होने पर छत टपकने लगता है। समस्याएं अनगिनत हैं।
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नियमित चलता है एनसीसी कैडेटों का प्रशिक्षण व खेल
पढ़ाई के साथ-साथ खेल अति आवश्यक है। विद्यालय में खेल का वातावरण बेहद अच्छा है। विद्यालय में एनसीसी का भी कोर्स है। यहां एनसीसी में चयनित कैडेटों को नियमित परेड कराया जाता है और उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा खेल शिक्षक बच्चों को वॉलीबाल सहित अन्य खेलों के प्रशिक्षित करते हैं।
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बोले प्रधानाचार्य
प्रधानाचार्य लेफ्टिनेंट डॉ. नीरज श्रीवास्तव कहते हैं कि शिक्षकों की कमी है, फिर भी बेहतर व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है। प्रयास यही रहता है कि किसी कक्षा में कोई घंटी खाली न रहे। शिक्षकों की तैनाती के संबंध में पत्र कई बार विभागीय अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। हां भवन की स्थिति गड़बड़ है। भवन काफी पुराना होने के कारण जर्जर हो चुका है। हमेशा विद्यालय के लिए कुछ बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है।
जनप्रतिनिधि दें ध्यान तो लौटे आए विद्यालय के दिन
विद्यालय के मरम्मत पर शासन तो ध्यान नहीं दे रहा हैं। अगर सांसद व विधायक ध्यान दें दे तो मिटता हुआ सिंहेश्वरी इंटर कॉलेज का अस्तित्व बच जाएगा। धनाभाव में विद्यालय भवन दम तोड़ रहा है।