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कन्याकुमारी से हिमालय तक सभी भारतीय एक
Updated Mon, 19 Jun 2017 10:11 PM IST
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सिद्धार्थनगर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद गोरक्ष प्रांत के प्रांतीय अभ्यास वर्ग में सोमवार को सामाजिक समरसता विषय पर विस्तार से जानकारी दी गई। दिव्य प्रेम सेवा मिशन हरिद्वार के संस्थापक आशीष गौतम ने अभ्यास वर्ग के द्वितीय सत्र मेें बतौर विशिष्ट अतिथि विचार रहे।
उन्होंने कहा कि मैं श्रेष्ठ हूं, यह विचार अच्छा है, लेकिन दूसरा व्यक्ति तुच्छ है, यह सोचना गलत है। सामाजिक, जातिगत, ऊंच-नीच का भाव जागृत कर अंग्रेजों ने समाज का वर्षों तक शोषण किया, जिसके कारण ही समाज में आज भी छुआछुत की भावना बनी हुई है। कन्याकुमारी से हिमालय तक और नागालैंड से गुजरात तक प्रत्येक भारतीय एक समान है। भारतीय दर्शन को समझाते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का चरित्र हमारे लिए सामाजिक समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण है। किसी भी राष्ट्र और समाज के शरीर के विकास के लिए मन, मस्तिष्क सहित सभी अंगों का स्वस्थ होना जरूरी है। इसके पूर्व प्रथम सत्र में प्रांत अध्यक्ष डॉ. राजशरण शाही ने सैद्धांतिक भूमिका पर प्रकाश डाला। कहा कि जब देश गुलाम था तो सामने कई चुनौतियां थी। आजादी के बाद देश के पुनर्निमाण के मकसद से विद्यार्थी परिषद की स्थापना हुई है। शिक्षण संस्थानों के माध्यम से युवाओं को राष्ट्रवादी बनने के लिए विद्यार्थी परिषद सक्रिय है। कार्यक्रम मेें इटवा विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी, प्रांत संगठन मंत्री कमलनयन, प्रांत मंत्री राकेश मौर्य, जिला प्रमुख डॉ. नलनिकांत त्रिपाठी, विभाग प्रमुख डॉ. सुषमा पांडेय, प्रांत सहमंत्री शिवशक्ति शर्मा, तेलंगाना प्रांत के संगठन मंत्री रामू, सौरभ कुमार त्रिपाठी, शुभम श्रीवास्तव, नित्यानंद शुक्ला, राघवेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि मैं श्रेष्ठ हूं, यह विचार अच्छा है, लेकिन दूसरा व्यक्ति तुच्छ है, यह सोचना गलत है। सामाजिक, जातिगत, ऊंच-नीच का भाव जागृत कर अंग्रेजों ने समाज का वर्षों तक शोषण किया, जिसके कारण ही समाज में आज भी छुआछुत की भावना बनी हुई है। कन्याकुमारी से हिमालय तक और नागालैंड से गुजरात तक प्रत्येक भारतीय एक समान है। भारतीय दर्शन को समझाते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का चरित्र हमारे लिए सामाजिक समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण है। किसी भी राष्ट्र और समाज के शरीर के विकास के लिए मन, मस्तिष्क सहित सभी अंगों का स्वस्थ होना जरूरी है। इसके पूर्व प्रथम सत्र में प्रांत अध्यक्ष डॉ. राजशरण शाही ने सैद्धांतिक भूमिका पर प्रकाश डाला। कहा कि जब देश गुलाम था तो सामने कई चुनौतियां थी। आजादी के बाद देश के पुनर्निमाण के मकसद से विद्यार्थी परिषद की स्थापना हुई है। शिक्षण संस्थानों के माध्यम से युवाओं को राष्ट्रवादी बनने के लिए विद्यार्थी परिषद सक्रिय है। कार्यक्रम मेें इटवा विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी, प्रांत संगठन मंत्री कमलनयन, प्रांत मंत्री राकेश मौर्य, जिला प्रमुख डॉ. नलनिकांत त्रिपाठी, विभाग प्रमुख डॉ. सुषमा पांडेय, प्रांत सहमंत्री शिवशक्ति शर्मा, तेलंगाना प्रांत के संगठन मंत्री रामू, सौरभ कुमार त्रिपाठी, शुभम श्रीवास्तव, नित्यानंद शुक्ला, राघवेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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