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अवैध खनन कर माफिया लगा रहे है राजस्व को चपत
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अवैध खनन कर माफिया लगा रहे राजस्व को चूना
इटवा क्षेत्र में रात के अंधेरे में होता है अवैध खनन
अमर उजाला ब्यूरो
इटवा। तहसील क्षेत्र में प्रदेश सरकार की किसानों को दी गई मिट्टी की खनन छूट का फायदा खनन माफिया उठा रहे हैं। हालत यह है कि स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता के चलते तहसील क्षेत्र में रात के अंधेरे में मिट्टी की अवैध खनन कर खनन माफिया लाखों रुपये प्रति माह सरकारी राजस्व को चूना लगा रहे हैं। मगर जिम्मेदार अवैध खनन को लेकर बेखबर हैं।
शासन की ओर से किसानों की जरूरत के लिए मिट्टी खनन पर रोक लगा दिया गया है। मिट्टी खनन की छूट स्थानीय तहसील क्षेत्र के खनन माफिया उठा रहे हैं। यहां के खनन माफिया अपनी किराए पर बाहर से लाए गए जेसीबी मशीन से पूरी रात खनन करते हैं। ऐसा वह उच्च अधिकारियों की नजरों से बचने के लिए करते हैं। बताया जाता है कि इस अवैध खनन में स्थानीय पुलिस की भी भूमिका बताई जा रही है। क्षेत्र के ग्रामीणों की माने तो यह खनन अवैध मिट्टी तक ही सीमित नहीं है। बल्कि बूढ़ी राप्ती नदी के इमिलिया, गदाखौवा व सोनौली नानकार के घाटों से बालू व भट्ठें में ईंट की पथाई में प्रयोग किए जाने वाले पीली मिट्टी की भी है। माफिया से जुड़े सूत्रों की माने तो इस अवैध खनन से लाखों रुपये राजस्व को चूना लगाया जा रहा है। इस संबंध में एसडीएम इटवा त्रिभुवन का कहना है कि अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा। शीघ्र ही रात में औचक निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा।
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इटवा क्षेत्र में रात के अंधेरे में होता है अवैध खनन
अमर उजाला ब्यूरो
इटवा। तहसील क्षेत्र में प्रदेश सरकार की किसानों को दी गई मिट्टी की खनन छूट का फायदा खनन माफिया उठा रहे हैं। हालत यह है कि स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता के चलते तहसील क्षेत्र में रात के अंधेरे में मिट्टी की अवैध खनन कर खनन माफिया लाखों रुपये प्रति माह सरकारी राजस्व को चूना लगा रहे हैं। मगर जिम्मेदार अवैध खनन को लेकर बेखबर हैं।
शासन की ओर से किसानों की जरूरत के लिए मिट्टी खनन पर रोक लगा दिया गया है। मिट्टी खनन की छूट स्थानीय तहसील क्षेत्र के खनन माफिया उठा रहे हैं। यहां के खनन माफिया अपनी किराए पर बाहर से लाए गए जेसीबी मशीन से पूरी रात खनन करते हैं। ऐसा वह उच्च अधिकारियों की नजरों से बचने के लिए करते हैं। बताया जाता है कि इस अवैध खनन में स्थानीय पुलिस की भी भूमिका बताई जा रही है। क्षेत्र के ग्रामीणों की माने तो यह खनन अवैध मिट्टी तक ही सीमित नहीं है। बल्कि बूढ़ी राप्ती नदी के इमिलिया, गदाखौवा व सोनौली नानकार के घाटों से बालू व भट्ठें में ईंट की पथाई में प्रयोग किए जाने वाले पीली मिट्टी की भी है। माफिया से जुड़े सूत्रों की माने तो इस अवैध खनन से लाखों रुपये राजस्व को चूना लगाया जा रहा है। इस संबंध में एसडीएम इटवा त्रिभुवन का कहना है कि अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा। शीघ्र ही रात में औचक निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा।
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