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जनसुविधा केंद्र का नहीं मिल रहा लाभ
Sun, 23 Jun 2019 10:30 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jun 2019 10:30 PM IST
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जन सुविधा केंद्र।
- फोटो : अमर उजाला
सिद्धार्थनगर। तहसील व ब्लॉक मुख्यालय का चक्कर न लगाना पड़े और गांव में लोगों को तहसील से जारी होने वाला प्रमाण पत्र बगैर भागदौड़ उपलब्ध हो जाए। इसके मद्देनजर केंद्र व राज्य सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में जनसुविधा केंद्र खुलवाए गए हैं। लेकिन लोगों को इसका लाभ नहीं मिला पा रहा है। कारण उन्हें आज तक पता ही नहीं है कि ये केंद्र कहां चल रहे हैं।
सूचना एवं प्रोद्यौगिकी विभाग के मुताबिक जिले में राज्य सरकार की ओर से 1000 व केंद्र सरकार की ओर से 900 केंद्र चल रहे हैं। जबकि जनपद में राज्य सरकार द्वारा 1199 व केंद्र सरकार की ओर से 950 जनसुविधा केंद्र खोले जाने का लक्ष्य है। सरकार ऑनलाइन व्यवस्था लागू करके लोगों तक योजनाओं की जानकारी दे रही है। ई-व्यवस्था के तहत केंद्र व राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ उनकी सुविधा के लिए गांव स्तर पर जन सुविधा केंद्र को खोलने की कवायद शुरू की जिससे इन केंद्रों पर गांव का कोई व्यक्ति जाकर सरकार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी ले सके। इसके साथ ही केंद्र पर किसी भी प्रमाण पत्र के लिए ऑलनाइन आवेदन करके प्राप्त कर सके। मगर सरकार की योजना का ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सूचना एवं प्रोद्यौगिकी विभाग के ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर अमरेंद्र दुबे ने बताया कि केंद्रों का संचालन हो रहा है। समय-समय पर निरीक्षण भी किया जाता है। अगर कहीं नहीं चल रहा होगा तो जांच करके कार्रवाई की जाएगी।
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पता नहीं कहां खुला है केंद्र
उसका ब्लॉक क्षेत्र के छितरापार गांव निवासी बेकारू, महुलानी निवासी मणिकांत तिवारी, चुरिहारी निवासी अजय पांडेय, कुआं हाट गांव निवासी राजदेव यादव आदि का कहना है कि जन सुविधा केंद्र कहां खोला गया है। इसके बारे में उन्हें आजतक कोई जानकारी नहीं मिली। कोई भी प्रमाण पत्र लेने के लिए तहसील मुख्यालय व अन्य प्राइवेट केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है। इसके लिए उन्हें अधिक रुपये देने पड़ते हैं।
ऑनलाइन मिलते हैं प्रमाण पत्र
सरकार की योजना के अनुसार इन सुविधा केंद्रों पर ग्रामीण राशन कार्ड के लिए आवेदन, जाति, निवास, चरित्र प्रमाण पत्र के लिए आवेदन, साथ ही सरकार की अन्य ऑनलाइन सेवाओं का लाभ मिलता। उन्हें गांव के ही केंद्र पर मिल जाता है।
तीन रुपये शुल्क
विभाग की माने तो जनसुविधा केंद्र चलाने वाले संचालक को एक प्रमाण पत्र में तीन से चार रुपये फीस जो सरकार की ओर से निर्धारित है, वह मिलती है।
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सूचना एवं प्रोद्यौगिकी विभाग के मुताबिक जिले में राज्य सरकार की ओर से 1000 व केंद्र सरकार की ओर से 900 केंद्र चल रहे हैं। जबकि जनपद में राज्य सरकार द्वारा 1199 व केंद्र सरकार की ओर से 950 जनसुविधा केंद्र खोले जाने का लक्ष्य है। सरकार ऑनलाइन व्यवस्था लागू करके लोगों तक योजनाओं की जानकारी दे रही है। ई-व्यवस्था के तहत केंद्र व राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ उनकी सुविधा के लिए गांव स्तर पर जन सुविधा केंद्र को खोलने की कवायद शुरू की जिससे इन केंद्रों पर गांव का कोई व्यक्ति जाकर सरकार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी ले सके। इसके साथ ही केंद्र पर किसी भी प्रमाण पत्र के लिए ऑलनाइन आवेदन करके प्राप्त कर सके। मगर सरकार की योजना का ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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सूचना एवं प्रोद्यौगिकी विभाग के ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर अमरेंद्र दुबे ने बताया कि केंद्रों का संचालन हो रहा है। समय-समय पर निरीक्षण भी किया जाता है। अगर कहीं नहीं चल रहा होगा तो जांच करके कार्रवाई की जाएगी।
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पता नहीं कहां खुला है केंद्र
उसका ब्लॉक क्षेत्र के छितरापार गांव निवासी बेकारू, महुलानी निवासी मणिकांत तिवारी, चुरिहारी निवासी अजय पांडेय, कुआं हाट गांव निवासी राजदेव यादव आदि का कहना है कि जन सुविधा केंद्र कहां खोला गया है। इसके बारे में उन्हें आजतक कोई जानकारी नहीं मिली। कोई भी प्रमाण पत्र लेने के लिए तहसील मुख्यालय व अन्य प्राइवेट केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है। इसके लिए उन्हें अधिक रुपये देने पड़ते हैं।
ऑनलाइन मिलते हैं प्रमाण पत्र
सरकार की योजना के अनुसार इन सुविधा केंद्रों पर ग्रामीण राशन कार्ड के लिए आवेदन, जाति, निवास, चरित्र प्रमाण पत्र के लिए आवेदन, साथ ही सरकार की अन्य ऑनलाइन सेवाओं का लाभ मिलता। उन्हें गांव के ही केंद्र पर मिल जाता है।
तीन रुपये शुल्क
विभाग की माने तो जनसुविधा केंद्र चलाने वाले संचालक को एक प्रमाण पत्र में तीन से चार रुपये फीस जो सरकार की ओर से निर्धारित है, वह मिलती है।