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Siddharthnagar News: कपिलवस्तु में पर्यटन विकास के लिए 134 एकड़ जमीन चिह्नित

Thu, 04 May 2023 12:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 04 May 2023 12:03 AM IST
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134 acres of land marked for tourism development in Kapilvastu
सिद्धार्थनगर। जिल में पर्यटन विकास के लिए कपिलवस्तु में 134 एकड़ जमीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की गई है। राजस्व विभाग ने स्तूप के दक्षिण, पश्चिम ओर से जमीन चिह्नित की है। जबकि अन्य जमीन भी खरीदने की कोशिश की जा रही है। जिला प्रशासन की योजना है कि कपिलवस्तु में नया शहर बसाकर यहां के विकास को तेज रफ्तार दी जाए।
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भारत-नेपाल सीमा स्थित कपिलवस्तु में प्रशासन ने 200 एकड़ जमीन में टाउनशिप प्रोजेक्ट शुरू करने की रूपरेखा तय की है, जिसमें 134 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। महात्मा बुद्ध की क्रीड़ा स्थली कपिलवस्तु के पास टाउनशिप विकसित होने से वहां जीवन स्तर ऊंचा होगा, जबकि पर्यटन सुविधाओं में वृद्धि हो जाएगी। नेपाल के लुंबिनी की तर्ज पर कपिलवस्तु का विकास करने की कोशिश की जा रही है।
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जिला प्रशासन ने कपिलवस्तु में टाउनशिप विकसित करने के लिए अलग अलग चरणों में 100-100 एकड़ जमीन खरीदने का प्रस्ताव शासन को तैयार किया है। जल्द ही ही यह प्रस्ताव शासन को भेज दिया जाएगा। नेपाल के लुंबिनी की तर्ज पर कपिलवस्तु को विकसित करने के लिए इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कपिलवस्तु के विकास में जमीन की कमी की समस्या दूर होने वाली है। पर्याप्त जमीन होगी तो टाउनशिप में आवासीय कॉलोनियों के साथ प्रमुख कार्यालय, होटल व रेस्टोरेंट खुल जाएंगे। उसके बाद स्तूप के पास देसी विदेशी पर्यटकों को आवश्यक सुविधाएं प्राप्त होंगी। कपिलवस्तु में पर्यटन विभाग की करीब 98 एकड़ जमीन थी, जिसमें सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के लिए 47 एकड़ और संस्कृति विभाग को 15 एकड़ जमीन दी गई, उसके बाद नई योजनाओं के जमीन नहीं बची।
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34 करोड़ की खरीदी जमीन
पर्यटन विकास के लिए कपिलवस्तु में 33 एकड़ जमीन खरीदी जा रही है। इसके लिए तीन बार में 34 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी जा चुकी है, जबकि इसमें 19 करोड़ रुपये बजट का इंतजार है। किसानों से समझौता हो गया है कि बजट प्राप्त होते ही शेष जमीन खरीदी जाएगी, उसके बाद नया प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकेगा।

योजनाओं की भरमार, पूरा होने का इंतजार
- कपिलवस्तु में 46 करोड़ रुपये की लागत से बुद्धा थीम पार्क बनाया गया है। इसका कार्य पूरा हो गया है। चहारदीवारी भी बना दी गई है, इसके उद्घाटन के बाद पर्यटकों को ध्यान और विश्राम के लिए सुविधाएं अच्छी हो जाएगी। वहां आर्ट गैलरी, फूड प्लाजा व वीआईपी गेस्ट हाउस सहित अन्य सुविधाएं भी है। थीम पार्क में एक साथ 1200 लोगों को बैठकर महात्मा बुद्ध पर आधारित लाइट साउंड शो को देख सकेंगे।
- कपिलवस्तु से दो किमी दूर भारत नेपाल सीमा स्थित मझौली सागर में ईको टूरिज्म के प्रोजेक्ट का प्रस्ताव भेजा गया है। 12.86 करोड़ रुपये की योजना है। इस योजना से पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में सुखद अनुभूति होगी।

- सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के सामने बौद्ध कुटीर के अधूरे निर्माण को पूरा करने के लिए 1154 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है, जिसमें 2.78 करोड़ रुपये प्राप्त हुआ है। इसके जीर्णोद्धार का कार्य शुरू हो गया है।

- कपिलवस्तु के पिपरहवा में विपश्यना केंद्र की स्थापना के लिए 24.37 करोड़ रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति मिली है। इसमें प्रथम किश्त के रूप में एक करोड़ रुपये प्राप्त हो गई है।

- कपिलवस्तु में 2.5 एकड़ जमीन में विपश्यना पार्क बनाने की योजना है। जिला प्रशासन 9.8 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के कार्य को सीएसआर प्रोजेक्ट से कराने का प्रयास है।

...ताकि यहां भी रुकें पर्यटक
जिले में हर माह 1000 से 1500 देशी पर्यटक आते हैं, जबकि 15 से 30 पर्यटक विदेशी आते हैं। कोरोना काल में पर्यटकों की संख्या कम हुई। पर्यटक यहां आते हैं और स्तूप पर शांति का अनुभव करने के बाद कहीं और चले जाते हैं। लुंबिनी विदेशी बौद्ध मठ के अलावा अच्छे होटल भी हैं।

अच्छी सुविधाओं की आवश्यकता कपिलवस्तु में सरकारी या निजी होटल नहीं है। बौद्ध अनुयायियों की साधना के लिए बेहतर स्थान नहीं है। मझौली सागर जैसे जलस्रोत में पर्यटन सुविधाओं का विकास नहीं हुआ है। कपिलवस्तु मार्ग पर परिवहन सुविधाओं का अभाव है। सड़के गड्ढे भर दिए गए लेकिन फोरलेन नहीं बनाया गया। परिवहन निगम की बड़ी बस घाटे में चलती है और इलेक्ट्रिक बसों को नहीं चलाया जा रहा है। इस क्षेत्र को सौर उर्जा से रोशन करने योजना अधर में अटकी है।


कपिलवस्तु में टाउनशिप विकसित करने के लिए 200 एकड़ जमीन खरीदने का प्रस्ताव तैयार हो गया है। इसे जल्द ही शासन को भेजा गया है। 33 एकड़ जमीन खरीदने की प्रक्रिया जारी है। कपिलवस्तु में पर्याप्त जमीन होगी तो अन्य योजनाओं को शुरू करने का रास्ता आसान हो जाएगा। सभी योजनाओं का कार्य पूरा हो जाएगा तो पर्यटन सुविधाएं पर्याप्त हो जाएंगी।
- संजीव रंजन, जिलाधिकारी
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