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जिस अमिताभ बच्चन के दीवाने हो, मैं उसके पिता का साथी हूं...

Fri, 20 Jul 2018 11:29 PM IST
siddharthnagar/नीरज मिश्र
siddharthnagar/नीरज मिश्र Updated Fri, 20 Jul 2018 11:29 PM IST
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जिस अमिताभ बच्चन के दीवाने हो, मैं उसके पिता का साथी हूं...
गोपाल दास नीरज - फोटो : SELF
सिद्धार्थनगर। पद्मश्री और पद्मभूषण गोपालदास ‘नीरज’ का सिद्धार्थनगर जिले से गहरा नाता रहा है। 24 घंटे में ही उन्होंने जिले को बखूबी पहचान लिया था। 30 दिसंबर 2009 को वे कपिलवस्तु महोत्सव महोत्सव में आयोजित मुशायरा व कवि सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। मंच में पर उनके लिए अलग से कुर्सी लगी थी। जबकि जमीन पर राहत इंदौरी, सर्वेश अस्थाना, सविता शर्मा जैसी कवत्रियी बैठीं थीं। इन लोगोें खुले मंच से कहा था कि यह हमारी खुद किस्मती है कि कविवर के चरणों में बैठने का मौका मिला।
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कार्यक्रम संयोजक समिति के सदस्य रहे नियाज कपिलवस्तुवी बताते हैं कि नीरज जी ने महोत्सव में ‘ए भाई जरा देख के चलो’ गीत के जरिए शुरुआत की। इस बीच युवाओं की टोली ने हूटिंग शुरू कर दी। इस पर उन्होंने कहा कि जिस अमिताभ बच्चन के दीवाने हो, मैं उनके पिता का साथी हूं...। अमिताभ घर का बच्चा है। इस पर युवाओं की टोली चुप हो गई। इसके बाद उन्होंने अपने सुपरहिट गीत ‘कारवां गुजर गए, गुबार देखता रहा’ गाकर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। इस बीच उन्होंने तन से भारी सांस हो इसको समझो खूब, मुर्दा जल में तैरता जिंदा जाता डूब, अद्भुत है गणतंत्र अद्भुत है षड्यंत्र साधु पड़े हैं जेल में, डाकू रहे स्वतंत्र.. की पंक्तियां पढ़कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया था।
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‘इन्हें माफ करिएगा’
मुशायरा कवि सम्मेलन की आयोजन समिति के सदस्य रहे वरिष्ठ पत्रकार नजीर मलिक बताते हैं कि उनके जैसा कवि अब कोई नहीं होगा। 30 दिसंबर 2009 की रात वह कभी नहीं भूलेगी। जब युवा उनकी हूटिंग कर रहे थे। उसी समय बसपा सरकार में डुमरियागंज के विधायक रहे स्व. मलिक तौफीक अहमद ने माइक संभाल लिया और माला तोड़कर फूलों को उनके ऊपर बिखेर कर सम्मान बढ़ाते हुए कहा कि मैं जानता हूं नीरज जी को, तुम क्या जानोगे, मरने के बाद यह सदियों तक याद रहेंगे। इसके बाद भी वे रुके नहीं। उन्होंने नीरज जी के सामने हाथ जोड़ते हुए बोले कि मैं सिद्धार्थनगर की जनता की ओर से आप से माफी चाहता हूं। ये लोग नादान हैं। इन्हें माफ करिएगा। इस पर नीरज हंस पड़े और इसके बाद अपनी तमाम रचनाओं को सुनाते हुए लोगों को अपना कायल बना दिया।
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हसरत रह गई अधूरी
यश भारती से सम्मानित मणेंद्र मिश्रा ‘मशाल’ ने बताया कि नीरज जी को बुद्ध भूमि से गहरा लगाव था। जब यश भारती सम्मान दिया गया तो उन्हें नीरज जी ने आशीर्वाद दिया था। 2016 में लखनऊ महोत्सव में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय से उन्होंने कहा था कि सिद्धार्थ विवि में कवि सम्मेलन हो तो मैं उसमें शामिल होना चाहूंगा। लेकिन उनकी वह हसरत अधूरी रह गई।
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