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गोशाला में भरा पानी, पशुओं को दिक्कतें
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पिपरी में बने गौशाला में व्याप्त जलभराव व लोहे के तार में लिपटी बिजली की केबिल
- फोटो : SRAWASTI
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तुलसीपुर / जमुनहा (श्रावस्ती)। गिलौला के ग्राम पंचायत गुजरवारा के मजरा पिपरी में अस्थाई गोशाला के चारों तरफ जलभराव है। स्थिति ऐसी दिखती है जैसे कोई आदर्श तालाब ही गोशाला में बना हो। यहां तक कि इस जलभराव में पेयजल के लिए लगा हैंडपंप, मवेशियों का नादा व सोलर लाइट भी पानी से घिरी हुई है। लापरवाही ऐसी कि बिजली का जो केबल गोशाला में रोशनी के लिए लाई गई वह इसी जलभराव वाले क्षेत्र से होकर लोहे के तार में लिपटी है।
अस्थाई गौशाला को लेकर अभी जिले में संवेदनशीलता नहीं आई है। पशुओं को ठहरने के लिए गोशाला तो बना दी गई लेकिन उसके रख रखाव व व्यवस्थाओं के नाम पर केवल औपचारिकता ही देखने को मिल रही है। ऐसा गिलौला के गुजरवारा के मजरा पिपरी में देखने को मिला। यहां अस्थाई गोशाला का निर्माण हाल में ही हुआ है। जहां गोशाला बनाई गई उसका अधिकांश हिस्सा लो लैंड है। अभी हाल में जिले में हुई बरसात में यह लो लैंड पानी से भर गया। कई दिन बीतने के बाद भी लो लैंड का पानी नहीं सूखा। ऐसे में गौशाला के पशु तो इसके कोने में बने टीन शेड में हैं। इस टीनशेड में पशुओं के लिए भूसा भी रखा हुआ है। जिसे पशु पैरों तले रौंद चुके हैं। अब वह खाने लायक भी नहीं बचा है।
वहीं इन जानवरों के लिए बना पेयजल व चारे के लिए बना नादा इसी जलभराव से घिरा है। स्थिति यह है कि लो लैंड में ही पेयजल के लिए हैंडपंप लगा है। जो पूरी तरह से डूबा है। सोलर लाइट भी लो लैंड में ही है। ऐसे में न तो रात को लाइट जलती है और न ही हैंडपंप का पानी ही पीने योग्य बचा है। लापरवाही तो तब चरम पर पहुंच गई। जबकि बिजली का केबल लो लैंड को घेरने के लिए लगे तार में ही लपेट कर गोशाला तक पहुंचाया गया। यह तार कई स्थानों पर कटा भी है। ऐसे में जलभराव वाले क्षेत्र में करंट उतरने की शंकाओं से इंकार नहीं किया गया जा सकता है। वहीं इस संबंध में ग्राम सचिव जोखन कुशवाहा कहते हैं कि जल्दी जल्दी में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत बिजली केबल को बाउंड्री में लगे लोहे के तार से बांधा गया है। जहां जलभराव है वहां की मिट्टी पहले हटाई गई थी। ताकि वहां पशुओं को नहलाया जा सके। लेकिन ऐसा क्यों किया गया इसका उनके पास जवाब नहीं था।
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अस्थाई गौशाला को लेकर अभी जिले में संवेदनशीलता नहीं आई है। पशुओं को ठहरने के लिए गोशाला तो बना दी गई लेकिन उसके रख रखाव व व्यवस्थाओं के नाम पर केवल औपचारिकता ही देखने को मिल रही है। ऐसा गिलौला के गुजरवारा के मजरा पिपरी में देखने को मिला। यहां अस्थाई गोशाला का निर्माण हाल में ही हुआ है। जहां गोशाला बनाई गई उसका अधिकांश हिस्सा लो लैंड है। अभी हाल में जिले में हुई बरसात में यह लो लैंड पानी से भर गया। कई दिन बीतने के बाद भी लो लैंड का पानी नहीं सूखा। ऐसे में गौशाला के पशु तो इसके कोने में बने टीन शेड में हैं। इस टीनशेड में पशुओं के लिए भूसा भी रखा हुआ है। जिसे पशु पैरों तले रौंद चुके हैं। अब वह खाने लायक भी नहीं बचा है।
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वहीं इन जानवरों के लिए बना पेयजल व चारे के लिए बना नादा इसी जलभराव से घिरा है। स्थिति यह है कि लो लैंड में ही पेयजल के लिए हैंडपंप लगा है। जो पूरी तरह से डूबा है। सोलर लाइट भी लो लैंड में ही है। ऐसे में न तो रात को लाइट जलती है और न ही हैंडपंप का पानी ही पीने योग्य बचा है। लापरवाही तो तब चरम पर पहुंच गई। जबकि बिजली का केबल लो लैंड को घेरने के लिए लगे तार में ही लपेट कर गोशाला तक पहुंचाया गया। यह तार कई स्थानों पर कटा भी है। ऐसे में जलभराव वाले क्षेत्र में करंट उतरने की शंकाओं से इंकार नहीं किया गया जा सकता है। वहीं इस संबंध में ग्राम सचिव जोखन कुशवाहा कहते हैं कि जल्दी जल्दी में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत बिजली केबल को बाउंड्री में लगे लोहे के तार से बांधा गया है। जहां जलभराव है वहां की मिट्टी पहले हटाई गई थी। ताकि वहां पशुओं को नहलाया जा सके। लेकिन ऐसा क्यों किया गया इसका उनके पास जवाब नहीं था।
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