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झूम कर बरसे मेघ, खेत पानी से लबालब
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शनिवार को हुई बरसात के दौरान भिनगा में मस्ती करते बच्चे व आते जाते लोग
- फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। बरसात की आस जोह चुके तराई के किसानों पर भादो अमावस के मेघ मेहरबान हुए। करीब डेढ़ माह बाद हुई अपेक्षित बरसात से खेत व खलिहान पानी से सराबोर हो गए। हालांकि काफी समय बाद हुई इस बरसात से असिंचित सिरसिया क्षेत्र के ज्यादातर किसान मायूस नजर आए। उनका मानना है कि अब क्या वर्षा जब कृषि सूखाने।
जिले में जून माह से अब तक हुई बरसात धान की खेती के लिए नाकाफी रही है। ऐसे में शुक्रवार रात हुई मूसलाधार बरसात के बाद जहां ताल-तलैया पानी से सराबोर हो गए। वहीं खेत खलिहान भी जलमग्न दिखे। इस बरसात का हरिहरपुररानी, जमुनहा, गिलौला व इकौना क्षेत्र के किसानों को तो अच्छा लाभ मिलेगा। लेकिन सिरसिया क्षेत्र के किसानों को इसका कोई विशेष फायदा होता नहीं दिख रहा है। तराई में समय से बरसात न होने के कारण जहां 10 प्रतिशत किसान धान की नर्सरी नहीं तैयार कर सके। वहीं जिन किसानों ने धान की नर्सरी तैयार कर ली थी।
उनमें से करीब 20 फीसदी किसान पानी के अभाव में धान की रोपाई नहीं कर सके। जिन किसानों ने किसी प्रकार धान की रोपाई कर ली थी। उनमें भी बरसात न होने के कारण कल्ले नहीं आ सके। ऐसे में सिरसिया क्षेत्र में इस बार धान की पैदावार आधा ही रहेगी। हालांकि कृषि विभाग 30 प्रतिशत तक ही नुकसान की बात कह रहा है। वहीं देर से हुई इस बरसात को देख इसकी आस छोड़ चुके किसान अब यह कह रहे हैं कि क्या वर्षा जब कृषि सुखाने...।
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इतने क्षेत्रफल में हुई खेती
जिले में 93151 हेक्टेअर भूमि में खेती का लक्ष्य निर्धारित हुआ था। इनमें से 74188 हेक्टेअर भूमि में धान की बोआई हुई है। जबकि 15100 हेक्टेअर भूमि में मक्का ज्वार व बाजरा, 3095 हेक्टेअर में उर्द, अरहर व मूंग, 730 हेक्टेअर में मूंगफली व सोयाबीन तथा 510 हेक्टेअर भूमि में ढैंचा व जूट की खेती की गई है।
किसान अभी बो सकते धान
धान की बोआई का समय फिलहाल निकल चुका है। लेकिन जो किसान धान की नर्सरी नहीं डाल सके अथवा रोपाई नहीं कर सके वे चाहे तो अभी सीओ-51 अथवा एनडीआर-118 प्रजाति के धान की बोआई कर सकते हैं। यह 110 दिन में तैयार हो जाएगा। किसान यदि धान नहीं बोना चाहते तो वह तोरिया की खेती करें। नुकसान की भरपाई हो जाएगी। -डॉ. अवधेश कुमार यादव जिला कृषि अधिकारी
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जिले में जून माह से अब तक हुई बरसात धान की खेती के लिए नाकाफी रही है। ऐसे में शुक्रवार रात हुई मूसलाधार बरसात के बाद जहां ताल-तलैया पानी से सराबोर हो गए। वहीं खेत खलिहान भी जलमग्न दिखे। इस बरसात का हरिहरपुररानी, जमुनहा, गिलौला व इकौना क्षेत्र के किसानों को तो अच्छा लाभ मिलेगा। लेकिन सिरसिया क्षेत्र के किसानों को इसका कोई विशेष फायदा होता नहीं दिख रहा है। तराई में समय से बरसात न होने के कारण जहां 10 प्रतिशत किसान धान की नर्सरी नहीं तैयार कर सके। वहीं जिन किसानों ने धान की नर्सरी तैयार कर ली थी।
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उनमें से करीब 20 फीसदी किसान पानी के अभाव में धान की रोपाई नहीं कर सके। जिन किसानों ने किसी प्रकार धान की रोपाई कर ली थी। उनमें भी बरसात न होने के कारण कल्ले नहीं आ सके। ऐसे में सिरसिया क्षेत्र में इस बार धान की पैदावार आधा ही रहेगी। हालांकि कृषि विभाग 30 प्रतिशत तक ही नुकसान की बात कह रहा है। वहीं देर से हुई इस बरसात को देख इसकी आस छोड़ चुके किसान अब यह कह रहे हैं कि क्या वर्षा जब कृषि सुखाने...।
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इतने क्षेत्रफल में हुई खेती
जिले में 93151 हेक्टेअर भूमि में खेती का लक्ष्य निर्धारित हुआ था। इनमें से 74188 हेक्टेअर भूमि में धान की बोआई हुई है। जबकि 15100 हेक्टेअर भूमि में मक्का ज्वार व बाजरा, 3095 हेक्टेअर में उर्द, अरहर व मूंग, 730 हेक्टेअर में मूंगफली व सोयाबीन तथा 510 हेक्टेअर भूमि में ढैंचा व जूट की खेती की गई है।
किसान अभी बो सकते धान
धान की बोआई का समय फिलहाल निकल चुका है। लेकिन जो किसान धान की नर्सरी नहीं डाल सके अथवा रोपाई नहीं कर सके वे चाहे तो अभी सीओ-51 अथवा एनडीआर-118 प्रजाति के धान की बोआई कर सकते हैं। यह 110 दिन में तैयार हो जाएगा। किसान यदि धान नहीं बोना चाहते तो वह तोरिया की खेती करें। नुकसान की भरपाई हो जाएगी। -डॉ. अवधेश कुमार यादव जिला कृषि अधिकारी