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Shravasti News: थाईलैंड के अनुयायियों ने तपोस्थली में की विशेष पूजा
Fri, 15 Dec 2023 12:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Fri, 15 Dec 2023 12:39 AM IST
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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती बृहस्पतिवार को थाईलैंड के अनुयायियों से गुलजार रही। अनुयायियों ने गंध कुटि पर बौद्ध भिक्षु आनंद सागर के नेतृत्व में विशेष प्रार्थना की। इस दौरान बौद्ध सभा का आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा के दौरान बौद्ध भिक्षु आनंद सागर ने कहा कि एक बार बुद्ध एक गांव में अपने किसान भक्त के यहां गए थे। जहां शाम को किसान द्वारा उनके प्रवचन का आयोजन किया। बुद्ध का प्रवचन सुनने के लिए गांव के सभी लोग उपस्थित थे, लेकिन वह भक्त ही कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। रात में किसान घर लौटा। बुद्ध ने पूछा, कहां चले गए थे। गांव के सभी लोग तुम्हें पूछ रहे थे। किसान ने कहा, दरअसल प्रवचन की सारी व्यवस्था हो गई थी, पर तभी अचानक मेरा बैल बीमार हो गया। पहले तो मैंने घरेलू उपचार करके उसे ठीक करने की कोशिश की, लेकिन जब उसकी तबीयत ज्यादा खराब होने लगी तो उसे लेकर पशु चिकित्सक के पास जाना पड़ा। आपका प्रवचन तो मैं बाद में भी सुन लूंगा।
अगले दिन सुबह जब गांव वाले पहुंचे तो बुद्ध ने उन्हें पूरी घटना सुनाई और फिर समझाया। उसने प्रवचन सुनने की जगह कर्म को महत्व देकर यह सिद्ध कर दिया कि मेरी शिक्षा को उसने बिल्कुल ठीक ढंग से समझा है। मेरे प्रवचन का सार यही है कि सब कुछ त्याग कर प्राणी मात्र की रक्षा करो। इस दौरान दौरान अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी ली।
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बौद्ध सभा के दौरान बौद्ध भिक्षु आनंद सागर ने कहा कि एक बार बुद्ध एक गांव में अपने किसान भक्त के यहां गए थे। जहां शाम को किसान द्वारा उनके प्रवचन का आयोजन किया। बुद्ध का प्रवचन सुनने के लिए गांव के सभी लोग उपस्थित थे, लेकिन वह भक्त ही कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। रात में किसान घर लौटा। बुद्ध ने पूछा, कहां चले गए थे। गांव के सभी लोग तुम्हें पूछ रहे थे। किसान ने कहा, दरअसल प्रवचन की सारी व्यवस्था हो गई थी, पर तभी अचानक मेरा बैल बीमार हो गया। पहले तो मैंने घरेलू उपचार करके उसे ठीक करने की कोशिश की, लेकिन जब उसकी तबीयत ज्यादा खराब होने लगी तो उसे लेकर पशु चिकित्सक के पास जाना पड़ा। आपका प्रवचन तो मैं बाद में भी सुन लूंगा।
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अगले दिन सुबह जब गांव वाले पहुंचे तो बुद्ध ने उन्हें पूरी घटना सुनाई और फिर समझाया। उसने प्रवचन सुनने की जगह कर्म को महत्व देकर यह सिद्ध कर दिया कि मेरी शिक्षा को उसने बिल्कुल ठीक ढंग से समझा है। मेरे प्रवचन का सार यही है कि सब कुछ त्याग कर प्राणी मात्र की रक्षा करो। इस दौरान दौरान अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी ली।
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