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कृषि कानून वापस होने पर भी पशोपेश में किसान
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भाकीयू के इकौना तहसील अध्यक्ष सोम शर्मा
- फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। कृषि कानूनों की वापसी की लंबी लड़ाई के बाद पीएम ने इन्हें वापस ले लिया। इस वापसी के बाद अब जिले के किसान नई पशोपेश में हैं। वे तय नहीं कर पा रहे हैं कि कानून लागू होने पर क्या नुकसान होता और अब वापसी के बाद क्या फायदा होगा। वहीं, किसान नेता इस मुद्दे पर संभल कर बोलते नजर आ रहे हैं।
सिरसिया के किसान राम बहादुर ने बताया कि पिछले कई वर्ष से वह एमएसपी के तहत अपनी फसल नहीं बेच पाए। बेचा भी तो आधा अधूरा। पैसा मिलने में भी असुविधा हुई। इससे साफ है कि अब बिल वापसी के बाद आने वाले समय में यह समस्या जस की तस रहेगी। किसान दुखराम कहते हैं कि वह आज तक समझ नहीं पाए कि इस कानूनू के लागू होने के बाद क्या नुकसान होता। अब तक जैसे फसल बेच पाया वैसे बेचा। कभी सोसाइटी तो कभी खुले बाजार में। ओम प्रकाश कहते हैं कि श्रावस्ती जैसे जिले में इस कानून से न तो कोई फायदा हुआ न ही कोई नुकसान। यहां किसान हमेशा से बिचौलियों व बाजार के भरोसे रहा है। बिचौलिए मनमाना पैसा देकर फसल लेते रहे।
शायद यही स्थिति आगे भी बनी रहे। वहीं भारतीय किसान यूनियन के मंडल अध्यक्ष विनोद शुक्ल कहते हैं कि प्रधानमंत्री का यह फैसला निश्चित ही किसानों की जीत है। 22 नवंबर को लखनऊ में संयुक्त मोर्चा की महापंचायत होनी है। अभी एमएसपी पर गारंटी सहित कई मुद्दे हैं। उस पर चर्चा होगी। वहीं, भाकीयू के इकौना तहसील अध्यक्ष सोम शर्मा कहते हैं कि देश के किसानों के सामने सरकार झुक गई है। यह संयुक्त मोर्चा किसान आंदोलन की तो जीत है, लेकिन इसका श्रेय हमारे 750 शहीद किसानों को जाता है।
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सिरसिया के किसान राम बहादुर ने बताया कि पिछले कई वर्ष से वह एमएसपी के तहत अपनी फसल नहीं बेच पाए। बेचा भी तो आधा अधूरा। पैसा मिलने में भी असुविधा हुई। इससे साफ है कि अब बिल वापसी के बाद आने वाले समय में यह समस्या जस की तस रहेगी। किसान दुखराम कहते हैं कि वह आज तक समझ नहीं पाए कि इस कानूनू के लागू होने के बाद क्या नुकसान होता। अब तक जैसे फसल बेच पाया वैसे बेचा। कभी सोसाइटी तो कभी खुले बाजार में। ओम प्रकाश कहते हैं कि श्रावस्ती जैसे जिले में इस कानून से न तो कोई फायदा हुआ न ही कोई नुकसान। यहां किसान हमेशा से बिचौलियों व बाजार के भरोसे रहा है। बिचौलिए मनमाना पैसा देकर फसल लेते रहे।
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शायद यही स्थिति आगे भी बनी रहे। वहीं भारतीय किसान यूनियन के मंडल अध्यक्ष विनोद शुक्ल कहते हैं कि प्रधानमंत्री का यह फैसला निश्चित ही किसानों की जीत है। 22 नवंबर को लखनऊ में संयुक्त मोर्चा की महापंचायत होनी है। अभी एमएसपी पर गारंटी सहित कई मुद्दे हैं। उस पर चर्चा होगी। वहीं, भाकीयू के इकौना तहसील अध्यक्ष सोम शर्मा कहते हैं कि देश के किसानों के सामने सरकार झुक गई है। यह संयुक्त मोर्चा किसान आंदोलन की तो जीत है, लेकिन इसका श्रेय हमारे 750 शहीद किसानों को जाता है।
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