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हरिहरपुररानी व लक्ष्मणपुर कोठी में लगाए पौधे
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श्रावस्ती। जिले में बुधवार को भी पौध रोपण अभियान चलाया गया। इसका शुभारंभ संयुक्त विकास आयुक्त देवी पाटन मंडल ने चहलवा व लक्ष्मनपुर कोठी से किया।
संयुक्त विकास आयुक्त राजेंद्र प्रसाद ने विकास खंड हरिहरपुररानी के चहलवा व लक्ष्मणपुर कोठी में पौधरोपण के दौरान कहाकि मानव जीवन को सुखी, समृद्धि व संतुलित बनाये रखने के लिए पौधरोपण जरूरी है। वृक्ष लगाओ जीवन को सुरक्षित बनाओ। वन पृथ्वी पर जीवन के लिए अनिवार्य हैं। यह प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में सहायक होते हैं। श्रावस्ती में बौद्ध काल से ही वन महोत्सव मनाया जाता रहा है। जिसे बौद्ध काल में शाल भंजिका महोत्सव कहा जाता था। गुप्त काल में यही महोत्सव कौमुदि महोत्सव के नाम से जाना जाता था। इस महोत्सव को मनाए जाने का एक मात्र उद्देश्य हमें अपनी परंपराओं एवं प्राचीनता को जानना व समझना है।
हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारी सभ्यता का विकास अरण्य (जंगल) में ही हुआ था। यही नहीं भगवान बुद्ध ने भी जंगल में ही जन्म लेकर संपूर्ण दुनिया को शांति एवं एकता का पाठ पढ़ाया था। इसी लिए आज हम लोगों को जंगलों को नष्ट करने के बजाय उन्हें अपना पूर्वज मानकर उनकी वृद्धि समृद्धि के लिए आगे आकर नए पौधों का रोपण करना चाहिए। वहीं उन्होंने वन कटान को रोक कर नए वृक्ष लगाने की अपील किया। इस दौरान जिला विकास अधिकारी विनय कुमार तिवारी, परियोजना निदेशक इन्द्रपाल सिंह सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
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संयुक्त विकास आयुक्त राजेंद्र प्रसाद ने विकास खंड हरिहरपुररानी के चहलवा व लक्ष्मणपुर कोठी में पौधरोपण के दौरान कहाकि मानव जीवन को सुखी, समृद्धि व संतुलित बनाये रखने के लिए पौधरोपण जरूरी है। वृक्ष लगाओ जीवन को सुरक्षित बनाओ। वन पृथ्वी पर जीवन के लिए अनिवार्य हैं। यह प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में सहायक होते हैं। श्रावस्ती में बौद्ध काल से ही वन महोत्सव मनाया जाता रहा है। जिसे बौद्ध काल में शाल भंजिका महोत्सव कहा जाता था। गुप्त काल में यही महोत्सव कौमुदि महोत्सव के नाम से जाना जाता था। इस महोत्सव को मनाए जाने का एक मात्र उद्देश्य हमें अपनी परंपराओं एवं प्राचीनता को जानना व समझना है।
हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारी सभ्यता का विकास अरण्य (जंगल) में ही हुआ था। यही नहीं भगवान बुद्ध ने भी जंगल में ही जन्म लेकर संपूर्ण दुनिया को शांति एवं एकता का पाठ पढ़ाया था। इसी लिए आज हम लोगों को जंगलों को नष्ट करने के बजाय उन्हें अपना पूर्वज मानकर उनकी वृद्धि समृद्धि के लिए आगे आकर नए पौधों का रोपण करना चाहिए। वहीं उन्होंने वन कटान को रोक कर नए वृक्ष लगाने की अपील किया। इस दौरान जिला विकास अधिकारी विनय कुमार तिवारी, परियोजना निदेशक इन्द्रपाल सिंह सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
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