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धान की नर्सरी तैयार, अब बरसात का इंतजार
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श्रावस्ती। तराई में आषाढ़ के मेघ भी बिना बरसे लौट रहे हैं। वहीं, खेतों में तैयार धान की नर्सरी रोपने के लिए किसान बरसात का इंतजार कर रहे हैं। बादलों के दगा देने से जहां खेती-किसानी का कार्य पिछड़ रहा है। वहीं, किसानों की चिंता भी बढ़ती जा रही है।
जुलाई माह प्रारंभ हो चुका है। इस माह में ताल-तलैया ही नहीं खेत व खलिहान भी पानी से सराबोर रहते थ, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं है। बरसात न होने से धरती प्यासी है। पंपिंग सेटों के सहारे धान की रोपाई करने वाले किसान भी परेशान हैं। जिन खेतों को पानी से भरने में पहले एक से डेढ़ घंटा लगता था वहीं अब पांच से छह घंटे लग रहे हैं। यह पानी भी ज्यादा देर तक खेत में नहीं रुक रहा है। ऐसे में किसान चाह कर भी धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। देखा जाए तो जुलाई माह का प्रथम पखवारा धान की रोपाई के लिए सर्वोत्तम माना गया है। वहीं, खेतों में तैयार हो चुकी धान की नर्सरी रोपाई न हो पाने के कारण बर्बाद हो रही है। यह देखकर किसानों के चेहरे मुरझाने लगे हैं। किसानों का मानना है कि यदि एक सप्ताह और ऐसा ही रहा तो पैदावार काफी प्रभावित होगी। यदि पंपिंग सेटों के सहारे धान की रोपाई की तो नुकसान होना तय है। ऐसे में धान की नर्सरी तैयार कर किसान अब बरसात का इंतजार कर रहे हैं।
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जुलाई माह प्रारंभ हो चुका है। इस माह में ताल-तलैया ही नहीं खेत व खलिहान भी पानी से सराबोर रहते थ, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं है। बरसात न होने से धरती प्यासी है। पंपिंग सेटों के सहारे धान की रोपाई करने वाले किसान भी परेशान हैं। जिन खेतों को पानी से भरने में पहले एक से डेढ़ घंटा लगता था वहीं अब पांच से छह घंटे लग रहे हैं। यह पानी भी ज्यादा देर तक खेत में नहीं रुक रहा है। ऐसे में किसान चाह कर भी धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। देखा जाए तो जुलाई माह का प्रथम पखवारा धान की रोपाई के लिए सर्वोत्तम माना गया है। वहीं, खेतों में तैयार हो चुकी धान की नर्सरी रोपाई न हो पाने के कारण बर्बाद हो रही है। यह देखकर किसानों के चेहरे मुरझाने लगे हैं। किसानों का मानना है कि यदि एक सप्ताह और ऐसा ही रहा तो पैदावार काफी प्रभावित होगी। यदि पंपिंग सेटों के सहारे धान की रोपाई की तो नुकसान होना तय है। ऐसे में धान की नर्सरी तैयार कर किसान अब बरसात का इंतजार कर रहे हैं।
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