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कुप्रथाओं के जाल से मुक्त कराना चाहते थे ज्योतिबा फूले
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कटरा (श्रावस्ती)। महामाया राजकीय महाविद्यालय खरगौरा बस्ती में सोमवार को ज्योतिबा राव फूले के जयंती समारोह पर एक गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य ने किया। शुभारंभ प्रधानाचार्य द्वारा ज्योतिराव फूले के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। गोष्ठी में प्राचार्य धर्मेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि ज्योतिबाराव गोविंदराव फूले 19 वीं सदी के एक महान समाजसुधारक, समाज प्रबोधक, विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रांतिकारी कार्यकर्ता थे। इन्हें महात्मा फूले के नाम से भी जाना जाता है।
वह समाज को कुप्रथा, अंधश्रद्धा के जाल से मुक्त करना चाहते थे। 28 नवंबर 1890 को 63 साल की उम्र में उनका निधन हुआ था। प्रोफेसर आशुतोष मिश्र ने कहा कि ज्योतिबा फूले का परिवार कई पीढ़ी पहले सतारा से पुणे आकर फूलों के गजरे आदि बनाने का काम करने लगा था। इसलिए माली के काम में लगे ये लोग फूले के नाम से जाने जाते थे। एक वर्ष की अवस्था में ही इनकी माता का निधन हो गया।
इनका लालन-पालन एक बाई ने किया। ज्योतिबा ने कुछ समय पहले तक मराठी में अध्ययन किया, बीच में पढ़ाई छूट गई और बाद में 21 वर्ष की उम्र में अंग्रेजी की सातवीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की। इनका विवाह 1840 में सावित्री बाई से हुआ। जो बाद में स्वयं एक प्रसिद्ध समाजसेवी बनीं। दलित व स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में दोनों पति-पत्नी ने मिलकर काम किया। वह एक कर्मठ और समाजसेवी की भावना रखने वाले व्यक्ति थे। गोष्ठी को प्रोफेसर एसएन वर्मा, प्रोफेसर दिलीप कुमार ने भी संबोधित किया। मौके पर उपेंद्र कुमार सोनी, राजबहादुर सहित काफी संख्या लोग मौजूद रहे।
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वह समाज को कुप्रथा, अंधश्रद्धा के जाल से मुक्त करना चाहते थे। 28 नवंबर 1890 को 63 साल की उम्र में उनका निधन हुआ था। प्रोफेसर आशुतोष मिश्र ने कहा कि ज्योतिबा फूले का परिवार कई पीढ़ी पहले सतारा से पुणे आकर फूलों के गजरे आदि बनाने का काम करने लगा था। इसलिए माली के काम में लगे ये लोग फूले के नाम से जाने जाते थे। एक वर्ष की अवस्था में ही इनकी माता का निधन हो गया।
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इनका लालन-पालन एक बाई ने किया। ज्योतिबा ने कुछ समय पहले तक मराठी में अध्ययन किया, बीच में पढ़ाई छूट गई और बाद में 21 वर्ष की उम्र में अंग्रेजी की सातवीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की। इनका विवाह 1840 में सावित्री बाई से हुआ। जो बाद में स्वयं एक प्रसिद्ध समाजसेवी बनीं। दलित व स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में दोनों पति-पत्नी ने मिलकर काम किया। वह एक कर्मठ और समाजसेवी की भावना रखने वाले व्यक्ति थे। गोष्ठी को प्रोफेसर एसएन वर्मा, प्रोफेसर दिलीप कुमार ने भी संबोधित किया। मौके पर उपेंद्र कुमार सोनी, राजबहादुर सहित काफी संख्या लोग मौजूद रहे।
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