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संयुक्त जिला अस्पताल में पौने दो करोड़ का घपला
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श्रावस्ती के भिनगा स्थित संयुक्त जिला चिकित्सालय भिनगा
- फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। संयुक्त जिला चिकित्सालय में बीते पांच वर्ष के दौरान खरीद से लेकर निर्माण व अनुरक्षण कार्यों में पौने दो करोड़ की गड़बड़ी उजागर हुई है। जांच पूरी होने के बाद सीडीओ की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। गहन स्तर पर हुई जांच के बाद तैयार रिपोर्ट में 34 बिंदूओं को शामिल किया गया है। जांच कमेटी को इस दौरान खरीद व निर्माण से जुड़ कई कार्यों के मूल दस्तावेज तक गायब मिले। इसके आधार पर ही दवा व बेड खरीद से लेकर निर्माण व अनुरक्षण कार्यों में पौने दो करोड़ के घपले की आशंका दर्शायी गयी है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में उपकरण व दवाओं की कमी को देखते हुए डीएम ने बीते पांच वर्ष में हुई खरीद, निर्माण व अनुरक्षण कार्यों की जांच के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित की थी। जांच में सामने आया कि वर्ष 2017 में यूपी मेडिकल सर्जिकल सप्लायर ने एसाइक्लोपैरा की आपूर्ति की थी लेकिन इस खरीद से जुड़े कोई भी दस्तावेज व अस्पताल के लोग कमेटी को मुहैया नहीं करा पाए। इसमें खरीद के एवज में 2,62,500 रुपये का किया गया भुगतान संदेह के घेरे में है। ऐसे ही मून फार्मा को भी 1,01,115 रुपये की आपूर्ति को लेकर किए गए भुगतान बिल भी गायब मिले। खरीद से जुड़े ऐसे ही कुछ दूसरे मामलों में 6,66,960 रुपये की अनियमितता जांच में पकड़ आयी है।
स्ट्रेचर की खरीद में भी घालमेल
जांच के दौरान संयुक्त जिला चिकित्सालय में दवाओं के साथ सर्जिकल उपकरण, पैथालॉजी में उपयोग होने वाले रसायन व उपकरण के साथ ही हुई स्ट्रेचर, बेड व अन्य प्रकार के सामानों के खरीद आर्डर व भुगतान के बिल बाउचर में भी कई जगहों पर सत्यापन के दौरान एकरूपता नहीं पाई गई। यहां तक कि अस्पताल द्वारा खरीदे गए स्ट्रेचर व व्हीलचेयर की खरीद में भी प्रथम दृष्टया 234820 रुपये की गड़बड़ी की आशंका जतायी गयी है।
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75 हजार की दवा कौन खा गया पता नहीं
जांच के दौरान 28,45,666 रुपये के मूल बिल वाउचर गायब मिले जबकि 1,14,99,601 रुपये की धनराशि के भुगतान में सीधे तौर पर अनियमित पायी गयी। यहीं नहीं जांच के दौरान 75 हजार की दवा का वितरण कहां हुआ उसका साक्ष्य भी अस्पताल प्रबंधन से जुड़े चिकित्सक नहीं दे पाए। जबकि 5,38,842 रुपये दवा खरीद का अभिलेखीय साक्ष्य विभाग के पास मौजूद नहीं मिला। इसके साथ ही 63,720 रुपये से खरीदी गई आटोक्लेव सामग्री का विवरण भी खरीद रजिस्टर में दर्ज नहीं पाया गया।
डीएम के निर्देश पर गठित कमेटी को जांच के दौरान क्या कमियां व गड़बड़ी मिली इसकी अभी कोई जानकारी नहीं है। मैने अस्पताल में सीएमएस पद का कार्यभार वर्ष 2020-21 में संभाला है। इसलिए इससे पूर्व हुई दवा व उपकरणों की खरीद के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है।
-डॉ. जेता सिंह सीएमएस
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संयुक्त जिला चिकित्सालय में उपकरण व दवाओं की कमी को देखते हुए डीएम ने बीते पांच वर्ष में हुई खरीद, निर्माण व अनुरक्षण कार्यों की जांच के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित की थी। जांच में सामने आया कि वर्ष 2017 में यूपी मेडिकल सर्जिकल सप्लायर ने एसाइक्लोपैरा की आपूर्ति की थी लेकिन इस खरीद से जुड़े कोई भी दस्तावेज व अस्पताल के लोग कमेटी को मुहैया नहीं करा पाए। इसमें खरीद के एवज में 2,62,500 रुपये का किया गया भुगतान संदेह के घेरे में है। ऐसे ही मून फार्मा को भी 1,01,115 रुपये की आपूर्ति को लेकर किए गए भुगतान बिल भी गायब मिले। खरीद से जुड़े ऐसे ही कुछ दूसरे मामलों में 6,66,960 रुपये की अनियमितता जांच में पकड़ आयी है।
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स्ट्रेचर की खरीद में भी घालमेल
जांच के दौरान संयुक्त जिला चिकित्सालय में दवाओं के साथ सर्जिकल उपकरण, पैथालॉजी में उपयोग होने वाले रसायन व उपकरण के साथ ही हुई स्ट्रेचर, बेड व अन्य प्रकार के सामानों के खरीद आर्डर व भुगतान के बिल बाउचर में भी कई जगहों पर सत्यापन के दौरान एकरूपता नहीं पाई गई। यहां तक कि अस्पताल द्वारा खरीदे गए स्ट्रेचर व व्हीलचेयर की खरीद में भी प्रथम दृष्टया 234820 रुपये की गड़बड़ी की आशंका जतायी गयी है।
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75 हजार की दवा कौन खा गया पता नहीं
जांच के दौरान 28,45,666 रुपये के मूल बिल वाउचर गायब मिले जबकि 1,14,99,601 रुपये की धनराशि के भुगतान में सीधे तौर पर अनियमित पायी गयी। यहीं नहीं जांच के दौरान 75 हजार की दवा का वितरण कहां हुआ उसका साक्ष्य भी अस्पताल प्रबंधन से जुड़े चिकित्सक नहीं दे पाए। जबकि 5,38,842 रुपये दवा खरीद का अभिलेखीय साक्ष्य विभाग के पास मौजूद नहीं मिला। इसके साथ ही 63,720 रुपये से खरीदी गई आटोक्लेव सामग्री का विवरण भी खरीद रजिस्टर में दर्ज नहीं पाया गया।
डीएम के निर्देश पर गठित कमेटी को जांच के दौरान क्या कमियां व गड़बड़ी मिली इसकी अभी कोई जानकारी नहीं है। मैने अस्पताल में सीएमएस पद का कार्यभार वर्ष 2020-21 में संभाला है। इसलिए इससे पूर्व हुई दवा व उपकरणों की खरीद के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है।
-डॉ. जेता सिंह सीएमएस