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घटने लगा राप्ती का जलस्तर, कटान तेज
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श्रावस्ती। तराई में मौसम का मिजाज शनिवार को पल-पल बदलता रहा। रात हल्की बरसात, इसके बाद चिलचिलाती धूप व बादलों की लुकाछिपी ने उमस काफी बढ़ा दी। बरसात थमने के कारण राप्ती नदी का जलस्तर भी धीरे-धीरे घटने लगा है। इससे नदी की धारा अपने किनारों को तेजी से काट रही है।
जिले में बुधवार भोर से कभी तेज तो कभी रिमझिम बरसात हो रही थी। जो शुक्रवार रात तक जारी रही। इसके बाद निकली तेज चिलचिलाती धूप से मौसम अचानक पूरी तरह बदल गया। दोपहर बाद शुरू हुई बादलों की लुकाछिपी से लोगों को भीषण उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ा। थमी बरसात के कारण राप्ती में जलस्तर घटने का सिलसिला जारी है। जिसके कारण नदी की धारा अपने किनारों को धीरे-धीरे काट रही है। शनिवार को जमुनहा के मधवापुर घाट पर नदी का जलस्तर 127.00 सेंटीमीटर मापा गया। यहां नदी का खतरे का निशान 127.00 सेंटीमीटर पर है।
संक्रामक रोग का बढ़ा खतरा
जिले में शनिवार को निकली चिलचिलाती धूप ने जहां उमस बढ़ा दी है। वहीं नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बदहाल सफाई व्यवस्था व जगह-जगह व्याप्त कीचड़ व जलभराव की समस्या के कारण संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है।
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खेतों को मिला पानी, शुरू हुई किसानी
समय पर बरसात होने के कारण जिले में खेती किसानी का कार्य तेजी से चल पड़ा है। जिन किसानों ने ट्यूबेल व नलकूपों के सहारे धान की नर्सरी तैयार कर रखी थी, उन किसानों ने बरसात के बाद धान की रोपाई शुरू कर दी है। जिन किसानों ने किन्हीं कारणों से धान की नर्सरी देर से डाली थी। उन किसानों की नर्सरी को बरसात ने संजीवनी दी है।
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जिले में बुधवार भोर से कभी तेज तो कभी रिमझिम बरसात हो रही थी। जो शुक्रवार रात तक जारी रही। इसके बाद निकली तेज चिलचिलाती धूप से मौसम अचानक पूरी तरह बदल गया। दोपहर बाद शुरू हुई बादलों की लुकाछिपी से लोगों को भीषण उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ा। थमी बरसात के कारण राप्ती में जलस्तर घटने का सिलसिला जारी है। जिसके कारण नदी की धारा अपने किनारों को धीरे-धीरे काट रही है। शनिवार को जमुनहा के मधवापुर घाट पर नदी का जलस्तर 127.00 सेंटीमीटर मापा गया। यहां नदी का खतरे का निशान 127.00 सेंटीमीटर पर है।
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संक्रामक रोग का बढ़ा खतरा
जिले में शनिवार को निकली चिलचिलाती धूप ने जहां उमस बढ़ा दी है। वहीं नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बदहाल सफाई व्यवस्था व जगह-जगह व्याप्त कीचड़ व जलभराव की समस्या के कारण संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है।
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खेतों को मिला पानी, शुरू हुई किसानी
समय पर बरसात होने के कारण जिले में खेती किसानी का कार्य तेजी से चल पड़ा है। जिन किसानों ने ट्यूबेल व नलकूपों के सहारे धान की नर्सरी तैयार कर रखी थी, उन किसानों ने बरसात के बाद धान की रोपाई शुरू कर दी है। जिन किसानों ने किन्हीं कारणों से धान की नर्सरी देर से डाली थी। उन किसानों की नर्सरी को बरसात ने संजीवनी दी है।