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अपनी परंपरा व परिवेष को बनाए रखें थारू जनजाति के लोग
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आदिवासी दिवस पर श्रीराम करतार राणा के चित्र पर माल्यार्पण करती थारू जनजाति की युवतियां
- फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। विश्व आदिवासी दिवस पर सोमवार को सिरसिया के मोतीपुर कला गांव में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में श्रीराम करतार राणा थारू कल्चर के जिलाध्यक्ष मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि श्रीराम करतार राणा थारू कल्चर के जिलाध्यक्ष हरिराम महाराज ने कहा कि थारू समुदाय के लोग अब अपने परंपरा से धीरे-धीरे दूर हो रहे हैं। जबकि यह किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। हम महाराणा प्रताप के वंशज हैं। हमें अपनी विशिष्टता पर गर्व होना चाहिए। हमारी परंपरा व परिवेश ही हमारी पहचान है। जिसे हम बचाए रखेंगे। ताकि हमारी यह परंपरा विलुप्त न हो। आधुनिकता की चकाचौंध में थारू समुदाय के बच्चे भी अपना कल्चर भूल रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। आज हमारी जो विशेष पहचान है। वह हमारे परंपरा व परिवेश की ही देन है।
इस दौरान मौजूद थारू समुदाय के लोगों ने श्रीराम करतार राणा थारू के चित्र पर माल्यार्पण कर अपनी परंपराओं को जीवित रखने का संकल्प लिया। इस दौरान ग्राम पंचायत मोतीपुर कला के संगीतालय में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुआ। जिसमें थारू समुदाय की बच्चियों, युवतियों व महिलाओं ने अपने परंपरागत परिवेश में थारू नृत्य व लोकगीत आदि प्रस्तुत किया। इस मौके पर काफी संख्या में थारू समुदाय के लोग मौजूद रहे।
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कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि श्रीराम करतार राणा थारू कल्चर के जिलाध्यक्ष हरिराम महाराज ने कहा कि थारू समुदाय के लोग अब अपने परंपरा से धीरे-धीरे दूर हो रहे हैं। जबकि यह किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। हम महाराणा प्रताप के वंशज हैं। हमें अपनी विशिष्टता पर गर्व होना चाहिए। हमारी परंपरा व परिवेश ही हमारी पहचान है। जिसे हम बचाए रखेंगे। ताकि हमारी यह परंपरा विलुप्त न हो। आधुनिकता की चकाचौंध में थारू समुदाय के बच्चे भी अपना कल्चर भूल रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। आज हमारी जो विशेष पहचान है। वह हमारे परंपरा व परिवेश की ही देन है।
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इस दौरान मौजूद थारू समुदाय के लोगों ने श्रीराम करतार राणा थारू के चित्र पर माल्यार्पण कर अपनी परंपराओं को जीवित रखने का संकल्प लिया। इस दौरान ग्राम पंचायत मोतीपुर कला के संगीतालय में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुआ। जिसमें थारू समुदाय की बच्चियों, युवतियों व महिलाओं ने अपने परंपरागत परिवेश में थारू नृत्य व लोकगीत आदि प्रस्तुत किया। इस मौके पर काफी संख्या में थारू समुदाय के लोग मौजूद रहे।
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