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मनरेगा के घोटालों पर कुंडली मारे अधिकारी
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श्रावस्ती। मनरेगा में घोटाले की पोटली पर अधिकारी ही तीन साल से कुंडली मारे बैठे हैं। इसके चलते गिलौला ब्लॉक में ही करीब पचास लाख रुपये के गबन का खुलासा तो हुआ, लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं हो पाई। इस गबन में तालाब को बिना खुदवाए ही पैसा निकालने के साथ प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत लाभार्थियों को मिलने वाली नब्बे दिन की मजदूरी के हेरफेर का मामला सर्वाधिक है।
मनरेगा योजना ग्रामीण मजदूरों को गांव में ही पूरी तरह से रोकने में असफल हा रहा है। गांव के मजदूर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर गांवों में मनरेगा योजना के तहत बड़े बड़े घोटाले हो रहे हैं। किसी का पैसा किसी के खाते में भेजा जा रहा है। ऐसा कई मामले हैं, जिसका खुलासा सोशल आडिट या फिर जांच के दौरान हुआ। जांच में घोटाले की पुष्टि होने के बाद रिकवरी भी बनाई गई।
वर्ष 2017 से लेकर 2019-20 तक घोटाले की रकम की वापसी नहीं हुई। इसका कारण है कि कागज में तो घोटाला सिद्ध हो गया, लेकिन उस पैसे को वसूलने के लिए अधिकारियों ने कोई प्रयास नहीं किया। न ही कोई कार्रवाई ही की गई। वर्षवार यदि आंकड़ों पर गौर करें तो गिलौला विकास खंड में वर्ष 2018-19 में वित्तीय अनियमितता के 44 मामले संज्ञान में आए थे। इस दौरान करीब पांच लाख रुपये की रिकवरी बनाई गई थी। इस रिकवरी के सापेक्ष 39 लोगों ने आज तक पैसा जमा नहीं किया।
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ऐसे ही वित्तीय भिन्नता में 93 मामले संज्ञान में आए थे। जिस पर लगभग चार लाख रुपये की रिकवरी सोशल ऑडिट के दौरान बनाई गई थी। आज भी यह पैसा घोटाले बाजों के पास ही पड़ा है। काम के दौरान बरती जा रही अनियमितता के लिए 135 शिकायतें दर्ज की गई। इसमें 32 मामले में जांच समिति ने घोटाला मानते हुए रिकवरी का आदेश दिया था। यह पैसा लाखों में है। ऐसे ही मनरेगा कामों में प्रक्रिया उल्लंघन के 501 मामले दर्ज किए गए। इसमें काम के बाद बोर्ड न लगने सहित कई अन्य शिकायतें शामिल है। यह मामले आज भी पेंडिंग हैं। जिस पर रिकवरी नहीं हुई है।
ऐसे ही वित्तीय वर्ष 2019-20 में भी गबन के 29 मामलों में पांच लाख की तथा स्टीमेट में भिन्नता के 118 मामलों में 32 में रिकवरी का आदेश दिया गया। वहीं प्रक्रिया भिन्नता के 320 मामले प्रकाश में आए। जिन पर लाखों रुपये की रिकवरी बनाई गई। यही स्थिति वर्ष 2017-18 की भी रही। इसमें गबन के छह मामले सोशल आडिट टीम ने पकड़े थे, जिनमें आज तक रिकवरी नहीं हो पाई।
केस एक
तालाब खुदा नहीं हो गया भुगतान
गिलौला विकास खंड की ग्राम पंचायत कमला भारी में वर्ष 2018-19 में तालाब खोदाई की जानी थी। इसके लिए दो वर्क आईडी जनरेट की गई थीं, लेकिन तालाब की बिना खोदाई किए पैसे का भुगतान पंचायत ने ले लिया। इसकी जांच एई डीआरडीए ने की थी। इस पर 194115 रुपये के गबन की पुष्टि हुई थी। आज भी इस पैसे की रिकवरी नहीं हुई और न ही तालाब ही खोदा गया।
केस दो
मेड़बंदी कराए बिना निकाला धन
गिलौला विकास खंड की रायपुर बिलेला ग्राम पंचायत में वर्ष 2019-20 में मेड़ बंदी के नाम पर 80550 रुपये का भुगतान निकाला गया था। सोशल ऑडिट टीम जब गांव पहुंची तो वहां उसे काम मिला ही नहीं था। बाद में ब्लॉक स्तर पर ही इस मामले को रफादफा कर दिया गया था। आज भी इस मामले की विधिवत जांच नहीं हो पाई। जिसके चलते इस राशि की रिकवरी नहीं हो पाई।
केस तीन
दूसरे का खाता फीड कर किया भुगतान
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 90 दिन की मजदूरी मनरेगा योजना के तहत लाभार्थी को दी जाती है। वित्तीय वर्ष 2019-20 व उसके पहले इस मजदूरी को लेकर कई घोटाले किए गए। ऐसा ही मामला किशुनपुर चंदनभारी, खरकहिया सहित गिलौला विकास खंड के कई पंचायतों में नजर आया। यहां भुगतान के लिए आवास लाभार्थियों का खाता फीड करने के बजाए विकास खंड स्तर पर दूसरे का खाता फीड कर पैसे का गबन कर लिया गया। कई लाभार्थियों के पैसे के गबन की पुष्टि सोशल ऑडिट टीम ने की। इसके बाद बी अभी तक लाभार्थियों को अपनी मजदूरी नहीं मिली।
मनरेगा में इस तरह की अनियमितताएं आपत्ति जनक हैं। ऐसे सभी मामलों की फिर से जांच कराई जाएगी, जिसमें सोशल ऑडिट के दौरान अनियमितता की पुष्टि हुई हो या फिर शिकायत का निपटारा ठीक से न हो पाया हो। - टीके शिबु, डीएम
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मनरेगा योजना ग्रामीण मजदूरों को गांव में ही पूरी तरह से रोकने में असफल हा रहा है। गांव के मजदूर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर गांवों में मनरेगा योजना के तहत बड़े बड़े घोटाले हो रहे हैं। किसी का पैसा किसी के खाते में भेजा जा रहा है। ऐसा कई मामले हैं, जिसका खुलासा सोशल आडिट या फिर जांच के दौरान हुआ। जांच में घोटाले की पुष्टि होने के बाद रिकवरी भी बनाई गई।
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वर्ष 2017 से लेकर 2019-20 तक घोटाले की रकम की वापसी नहीं हुई। इसका कारण है कि कागज में तो घोटाला सिद्ध हो गया, लेकिन उस पैसे को वसूलने के लिए अधिकारियों ने कोई प्रयास नहीं किया। न ही कोई कार्रवाई ही की गई। वर्षवार यदि आंकड़ों पर गौर करें तो गिलौला विकास खंड में वर्ष 2018-19 में वित्तीय अनियमितता के 44 मामले संज्ञान में आए थे। इस दौरान करीब पांच लाख रुपये की रिकवरी बनाई गई थी। इस रिकवरी के सापेक्ष 39 लोगों ने आज तक पैसा जमा नहीं किया।
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ऐसे ही वित्तीय भिन्नता में 93 मामले संज्ञान में आए थे। जिस पर लगभग चार लाख रुपये की रिकवरी सोशल ऑडिट के दौरान बनाई गई थी। आज भी यह पैसा घोटाले बाजों के पास ही पड़ा है। काम के दौरान बरती जा रही अनियमितता के लिए 135 शिकायतें दर्ज की गई। इसमें 32 मामले में जांच समिति ने घोटाला मानते हुए रिकवरी का आदेश दिया था। यह पैसा लाखों में है। ऐसे ही मनरेगा कामों में प्रक्रिया उल्लंघन के 501 मामले दर्ज किए गए। इसमें काम के बाद बोर्ड न लगने सहित कई अन्य शिकायतें शामिल है। यह मामले आज भी पेंडिंग हैं। जिस पर रिकवरी नहीं हुई है।
ऐसे ही वित्तीय वर्ष 2019-20 में भी गबन के 29 मामलों में पांच लाख की तथा स्टीमेट में भिन्नता के 118 मामलों में 32 में रिकवरी का आदेश दिया गया। वहीं प्रक्रिया भिन्नता के 320 मामले प्रकाश में आए। जिन पर लाखों रुपये की रिकवरी बनाई गई। यही स्थिति वर्ष 2017-18 की भी रही। इसमें गबन के छह मामले सोशल आडिट टीम ने पकड़े थे, जिनमें आज तक रिकवरी नहीं हो पाई।
केस एक
तालाब खुदा नहीं हो गया भुगतान
गिलौला विकास खंड की ग्राम पंचायत कमला भारी में वर्ष 2018-19 में तालाब खोदाई की जानी थी। इसके लिए दो वर्क आईडी जनरेट की गई थीं, लेकिन तालाब की बिना खोदाई किए पैसे का भुगतान पंचायत ने ले लिया। इसकी जांच एई डीआरडीए ने की थी। इस पर 194115 रुपये के गबन की पुष्टि हुई थी। आज भी इस पैसे की रिकवरी नहीं हुई और न ही तालाब ही खोदा गया।
केस दो
मेड़बंदी कराए बिना निकाला धन
गिलौला विकास खंड की रायपुर बिलेला ग्राम पंचायत में वर्ष 2019-20 में मेड़ बंदी के नाम पर 80550 रुपये का भुगतान निकाला गया था। सोशल ऑडिट टीम जब गांव पहुंची तो वहां उसे काम मिला ही नहीं था। बाद में ब्लॉक स्तर पर ही इस मामले को रफादफा कर दिया गया था। आज भी इस मामले की विधिवत जांच नहीं हो पाई। जिसके चलते इस राशि की रिकवरी नहीं हो पाई।
केस तीन
दूसरे का खाता फीड कर किया भुगतान
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 90 दिन की मजदूरी मनरेगा योजना के तहत लाभार्थी को दी जाती है। वित्तीय वर्ष 2019-20 व उसके पहले इस मजदूरी को लेकर कई घोटाले किए गए। ऐसा ही मामला किशुनपुर चंदनभारी, खरकहिया सहित गिलौला विकास खंड के कई पंचायतों में नजर आया। यहां भुगतान के लिए आवास लाभार्थियों का खाता फीड करने के बजाए विकास खंड स्तर पर दूसरे का खाता फीड कर पैसे का गबन कर लिया गया। कई लाभार्थियों के पैसे के गबन की पुष्टि सोशल ऑडिट टीम ने की। इसके बाद बी अभी तक लाभार्थियों को अपनी मजदूरी नहीं मिली।
मनरेगा में इस तरह की अनियमितताएं आपत्ति जनक हैं। ऐसे सभी मामलों की फिर से जांच कराई जाएगी, जिसमें सोशल ऑडिट के दौरान अनियमितता की पुष्टि हुई हो या फिर शिकायत का निपटारा ठीक से न हो पाया हो। - टीके शिबु, डीएम