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रैन बसेरों पर कब्जा, लोग खुले में ठिठुरते हुए काट रहे रात
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श्रावस्ती। जिले में न्यूनतम पारा आठ डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। वहीं प्रशासन की ओर से गरीबों को ठंड से बचाने के लिए अब तक कोई इंतजाम नहीं किए गए है। अब तक न तो गरीबों को कंबल वितरित कराया गया, और न ही सार्वजनिक स्थानों पर कहीं अलाव ही जलवाया गया है। वहीं पूर्व से स्थित रैन बसेरों पर भी अतिक्रमण है। जिसे खाली नहीं कराया गया है।
जिले में बने रैन बसेरों में कई स्थानों पर धार्मिक संस्थाओं का कब्जा है, वहीं कुछ स्थानों पर सरकारी अमला व आवारा पशु काबिज हैं। इसके चलते गरीबों को कड़ाके की ठंड में रात खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ रही है। ऐसी स्थिति कमोवेश सभी जगह है। इससे इकौना नगर सहित जिले के अन्य क्षेत्र भी अछूते नहीं हैं। इससे लोगों को कड़ाके की ठंड में रात खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ रही है। अमर उजाला ने जब जिले में बने रैन बसेरों की पड़ताल की तो सच्चाई उजागर हुई।
केस एक
सोनवा थाना क्षेत्र के दिकौली मेला परिसर में बना रैन बसेरा उपेक्षित है। यहां न तो कंबल आदि की व्यवस्था है और न अलाव की। रैन बसेरे में मवेशियों व स्थानीय दुकानदारों का कब्जा है। यहां गंदगी देखने को मिली। इसके पास लोगों के घरों का गंदा पानी भरा हुआ है। यही स्थित वहीं फोरलेन के पास दिकौली मोड़ पर बने रैन बसेरे की भी है। जहां कुछ लोगों ने गुमटी व दुकान रख कर अतिक्रमण कर रखा है।
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केस दो
इकौना नगर के रामलीला मैदान में बने रैन बसेरे पर रामलीला कमेटी का कब्जा है। स्थानीय लोगों की मानें तो रामलीला कमेटी की ओर से इसे किराए पर दिया जा रहा है। यहां बिना किराया दिए किसी को पैर रखने की भी इजाजत नहीं है। ठंड से बेहाल मजदूर पेशा लोग व स्थानीय गरीबों को इसका इस्तेमाल करने नहीं दिया जाता। यह पूरी तरह से राम लीला कमेटी की निजी संपत्ति बन कर रह गया है।
केस तीन
इकौना थाने के बगल बने इस रैनबसेरे (पुरानी कांजीहाउस) के पिछले हिस्से पर पुलिस वालों का कब्जा है। वहीं रैन बसेरे का अगला भाग टूट कर जर्जर हो गया है। जिसमें नगर पंचायत इकौना की ओर से कबाड़ रखवाया गया है। इकौना तहसील व ब्लॉक मुख्यालय होने के कारण यहां दूर दराज गांव के लोग भी आते हैं, लेकिन इस रैन बसेरे में किसी को पैर रखने की इजाजत नहीं है।
केस चार
गिलौला कस्बे में नेहरू स्मारक इंटर कॉलेज जाने वाले मार्ग के किनारे रैन बसेरा का निर्माण कराया गया था। इस पर टेंट हाउस संचालक का कब्जा है। रैन बसेरे में टेंट का सामान रखा जा रहा है। मुख्य गेट पर ताला भी लगाया जा रहा है। वहीं बौद्ध परिपथ के किनारे बसे गिलौला कस्बे में महानगरों से देर रात आने वाले लोगों को पूरी रात सड़क के किनारे गुजारना पड़ रहा है।
केस पांच
इकौना के हनुमान मंदिर के निकट बना रैन बसेरा पूरी तरह से उपेक्षित है। जिसके आसपास झाड़ियां उगी हुई हैं। जिससे जरूरतमंदों को इसकी स्थापना का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। यही स्थिति जमुनहा के कथरा माफी में सांसद निधि से बनाए गए रैन बसेरे की भी है। संसाधन विहीन होने के कारण इसका उपयोग जहां आवारा पशु बैठने में करते हैं। वहीं ग्रामीण बरसात के समय इसका प्रयोग अपने मवेशियों को बांधने में कर रहे हैं।
हटवाया जाएगा अतिक्रमण
रैन बसेरों में गरीबों को ठंड से बचाने के लिए कंबल व अलाव की लकड़ी रखवाने का निर्देश संबंधित नगर निकाय व ग्राम पंचायतों को दिया जा चुका है। रही बात अतिक्रमण की तो इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। यदि कहीं अतिक्रमण है तो उसे हटवा कर सुविधा संपन्न बनाया जाएगा। - योगानंद पांडेय, अपर जिलाधिकारी
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जिले में बने रैन बसेरों में कई स्थानों पर धार्मिक संस्थाओं का कब्जा है, वहीं कुछ स्थानों पर सरकारी अमला व आवारा पशु काबिज हैं। इसके चलते गरीबों को कड़ाके की ठंड में रात खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ रही है। ऐसी स्थिति कमोवेश सभी जगह है। इससे इकौना नगर सहित जिले के अन्य क्षेत्र भी अछूते नहीं हैं। इससे लोगों को कड़ाके की ठंड में रात खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ रही है। अमर उजाला ने जब जिले में बने रैन बसेरों की पड़ताल की तो सच्चाई उजागर हुई।
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केस एक
सोनवा थाना क्षेत्र के दिकौली मेला परिसर में बना रैन बसेरा उपेक्षित है। यहां न तो कंबल आदि की व्यवस्था है और न अलाव की। रैन बसेरे में मवेशियों व स्थानीय दुकानदारों का कब्जा है। यहां गंदगी देखने को मिली। इसके पास लोगों के घरों का गंदा पानी भरा हुआ है। यही स्थित वहीं फोरलेन के पास दिकौली मोड़ पर बने रैन बसेरे की भी है। जहां कुछ लोगों ने गुमटी व दुकान रख कर अतिक्रमण कर रखा है।
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केस दो
इकौना नगर के रामलीला मैदान में बने रैन बसेरे पर रामलीला कमेटी का कब्जा है। स्थानीय लोगों की मानें तो रामलीला कमेटी की ओर से इसे किराए पर दिया जा रहा है। यहां बिना किराया दिए किसी को पैर रखने की भी इजाजत नहीं है। ठंड से बेहाल मजदूर पेशा लोग व स्थानीय गरीबों को इसका इस्तेमाल करने नहीं दिया जाता। यह पूरी तरह से राम लीला कमेटी की निजी संपत्ति बन कर रह गया है।
केस तीन
इकौना थाने के बगल बने इस रैनबसेरे (पुरानी कांजीहाउस) के पिछले हिस्से पर पुलिस वालों का कब्जा है। वहीं रैन बसेरे का अगला भाग टूट कर जर्जर हो गया है। जिसमें नगर पंचायत इकौना की ओर से कबाड़ रखवाया गया है। इकौना तहसील व ब्लॉक मुख्यालय होने के कारण यहां दूर दराज गांव के लोग भी आते हैं, लेकिन इस रैन बसेरे में किसी को पैर रखने की इजाजत नहीं है।
केस चार
गिलौला कस्बे में नेहरू स्मारक इंटर कॉलेज जाने वाले मार्ग के किनारे रैन बसेरा का निर्माण कराया गया था। इस पर टेंट हाउस संचालक का कब्जा है। रैन बसेरे में टेंट का सामान रखा जा रहा है। मुख्य गेट पर ताला भी लगाया जा रहा है। वहीं बौद्ध परिपथ के किनारे बसे गिलौला कस्बे में महानगरों से देर रात आने वाले लोगों को पूरी रात सड़क के किनारे गुजारना पड़ रहा है।
केस पांच
इकौना के हनुमान मंदिर के निकट बना रैन बसेरा पूरी तरह से उपेक्षित है। जिसके आसपास झाड़ियां उगी हुई हैं। जिससे जरूरतमंदों को इसकी स्थापना का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। यही स्थिति जमुनहा के कथरा माफी में सांसद निधि से बनाए गए रैन बसेरे की भी है। संसाधन विहीन होने के कारण इसका उपयोग जहां आवारा पशु बैठने में करते हैं। वहीं ग्रामीण बरसात के समय इसका प्रयोग अपने मवेशियों को बांधने में कर रहे हैं।
हटवाया जाएगा अतिक्रमण
रैन बसेरों में गरीबों को ठंड से बचाने के लिए कंबल व अलाव की लकड़ी रखवाने का निर्देश संबंधित नगर निकाय व ग्राम पंचायतों को दिया जा चुका है। रही बात अतिक्रमण की तो इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। यदि कहीं अतिक्रमण है तो उसे हटवा कर सुविधा संपन्न बनाया जाएगा। - योगानंद पांडेय, अपर जिलाधिकारी