{"_id":"604e41798ebc3e59067db2c2","slug":"nepal-is-developing-industrial-area-along-the-border-srawasti-news-lko569556194","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीमा पर नेपाल विकसित कर रहा औद्योगिक क्षेत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीमा पर नेपाल विकसित कर रहा औद्योगिक क्षेत्र
विज्ञापन
नेपाल में नरैनापुर गांव विकास समिति के जयरामपुरवा में बना रहा औद्योगिक हब।
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। नेपाल, भारत की सीमा पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर रहा है। श्रावस्ती बॉर्डर से सटे जयरामपुरवा में विकसित होने वाले इस क्षेत्र में हॉस्पिटल व गोशाला का निर्माण भी होगा। इस औद्योगिक क्षेत्र से भारत व नेपाल के बीच एक व्यापारिक संबंध इस रास्ते से भी प्रारंभ होगा। इससे नेपाल की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
नेपाल इस समय आर्थिक क्षेत्र उन्नयन के लिए विभिन्न क्षेत्रों में प्रयास कर रहा है। इसके लिए नेपाल ने भारतीय सीमा से सटे इलाके में औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर रहा है। इस औद्योगिक क्षेत्र में किस देश की कंपनियां स्थापित होंगी। इसके बारे में अभी तक खुलासा नहीं हो सका है। लेकिन औद्योगिक क्षेत्र बनाने के लिए तेजी से काम चल रहा है।
ऐसा ही श्रावस्ती जिले की सीमा से सटे बघौड़ा बॉर्डर से मात्र डेढ़ किलोेमीटर की दूरी पर नेपाल के नरैनापुर गांव विकास समिति क्षेत्र के जयरामपुरवा में नेपाली 39 बीघा (भारतीय पैमाने के अनुसार 351 बीघा) भूमि को औद्योगिक क्षेत्र भूमि घोषित किया है। यहां पर डेवलेपमेंट का कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है। शुरुआती दौर में पानी की टंकी का निर्माण किया जा रहा है। इस औद्योगिक क्षेत्र में एक 25 बेड के हॉस्पिटल के साथ गोशाला का निर्माण भी चल रहा है। इस औद्योगिक क्षेत्र के निर्माण का कार्य पूर्ण होते ही श्रावस्ती का नेपालगंज से सीधा जुड़ाव होगा। इससे नेपाली अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
विज्ञापन
खुलेगा पारंपरिक रास्ता
नेपाल जाने के लिए अभी तक बहराइच का रुपईडिहा ही सबसे नजदीक पारंपरिक रास्ता है। यहां से ही वाहनों का प्रवेश चाहे वह कॉमर्शियल हो या फिर निजी हो सकता है। इसके बाद सिद्धार्थनगर के बढ़नी से नेपाल में प्रवेश करने का रास्ता है। इन दोनों सीमाओं से भारत-नेपाल के बीच व्यापारिक कार्य भी होते हैं। लेकिन श्रावस्ती से सटे इस नेपाली इलाके में प्रवेश के लिए कोई अभी तक मार्ग नहीं था। जबकि देखा जाए तो कुछ वर्ष पूर्व ही नेपाल सरकार ने श्रावस्ती सीमा से लगे बघौड़ा बॉर्डर से नेपालगंज को जोड़ने के लिए टू-लेन सड़क का निर्माण कराया था। इसी सड़क के किनारे ही अब इस औद्योगिक इकाई की स्थापना की जा रही है।
भारतीय क्षेत्र के बाजारों का भी होगा विकास
नो मेंस लैंड से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर विकसित होने वाले औद्योगिक क्षेत्र से जहां नेपाली अर्थ व्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है। वहीं इसका आंशिक लाभ सीमावर्ती भारतीय बाजारों को भी मिलेगा। दोनों देशों के बीच मैत्री संधि होने के कारण छोटे व्यापारी अपने सामान को इधर से उधर भंसार (टैक्स) अदा करके ले जा सकते हैं। ऐसी ही स्थिति भारत-नेपाल सीमा पर बहराइच में रुपईडिहा तो सिद्धार्थनगर जनपद में बढ़नी में देखी जा सकती है। जहां दोनों देशों का बाजार हमेशा एक-दूसरे के माध्यम से चढ़ा रहता है।
विज्ञापन
नेपाल इस समय आर्थिक क्षेत्र उन्नयन के लिए विभिन्न क्षेत्रों में प्रयास कर रहा है। इसके लिए नेपाल ने भारतीय सीमा से सटे इलाके में औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर रहा है। इस औद्योगिक क्षेत्र में किस देश की कंपनियां स्थापित होंगी। इसके बारे में अभी तक खुलासा नहीं हो सका है। लेकिन औद्योगिक क्षेत्र बनाने के लिए तेजी से काम चल रहा है।
विज्ञापन
ऐसा ही श्रावस्ती जिले की सीमा से सटे बघौड़ा बॉर्डर से मात्र डेढ़ किलोेमीटर की दूरी पर नेपाल के नरैनापुर गांव विकास समिति क्षेत्र के जयरामपुरवा में नेपाली 39 बीघा (भारतीय पैमाने के अनुसार 351 बीघा) भूमि को औद्योगिक क्षेत्र भूमि घोषित किया है। यहां पर डेवलेपमेंट का कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है। शुरुआती दौर में पानी की टंकी का निर्माण किया जा रहा है। इस औद्योगिक क्षेत्र में एक 25 बेड के हॉस्पिटल के साथ गोशाला का निर्माण भी चल रहा है। इस औद्योगिक क्षेत्र के निर्माण का कार्य पूर्ण होते ही श्रावस्ती का नेपालगंज से सीधा जुड़ाव होगा। इससे नेपाली अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
विज्ञापन
खुलेगा पारंपरिक रास्ता
नेपाल जाने के लिए अभी तक बहराइच का रुपईडिहा ही सबसे नजदीक पारंपरिक रास्ता है। यहां से ही वाहनों का प्रवेश चाहे वह कॉमर्शियल हो या फिर निजी हो सकता है। इसके बाद सिद्धार्थनगर के बढ़नी से नेपाल में प्रवेश करने का रास्ता है। इन दोनों सीमाओं से भारत-नेपाल के बीच व्यापारिक कार्य भी होते हैं। लेकिन श्रावस्ती से सटे इस नेपाली इलाके में प्रवेश के लिए कोई अभी तक मार्ग नहीं था। जबकि देखा जाए तो कुछ वर्ष पूर्व ही नेपाल सरकार ने श्रावस्ती सीमा से लगे बघौड़ा बॉर्डर से नेपालगंज को जोड़ने के लिए टू-लेन सड़क का निर्माण कराया था। इसी सड़क के किनारे ही अब इस औद्योगिक इकाई की स्थापना की जा रही है।
भारतीय क्षेत्र के बाजारों का भी होगा विकास
नो मेंस लैंड से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर विकसित होने वाले औद्योगिक क्षेत्र से जहां नेपाली अर्थ व्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है। वहीं इसका आंशिक लाभ सीमावर्ती भारतीय बाजारों को भी मिलेगा। दोनों देशों के बीच मैत्री संधि होने के कारण छोटे व्यापारी अपने सामान को इधर से उधर भंसार (टैक्स) अदा करके ले जा सकते हैं। ऐसी ही स्थिति भारत-नेपाल सीमा पर बहराइच में रुपईडिहा तो सिद्धार्थनगर जनपद में बढ़नी में देखी जा सकती है। जहां दोनों देशों का बाजार हमेशा एक-दूसरे के माध्यम से चढ़ा रहता है।