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Shravasti News: विशेष सचिव ने दरी पर बैठ रेशम किसानों संग की बात
Fri, 03 Feb 2023 09:27 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Fri, 03 Feb 2023 09:27 AM IST
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श्रावस्ती। किसानों से जब बात करनी हो तो किसानों के साथ बैठना होगा। यह कहते हुए गुरुवार करे रेशम किसानों के साथ बैठक करने आए विशेष सचिव कुर्सी छोड़ दरी पर बैठ गए। इस मौके पर वह सिल्क समग्र योजना के बारे में लाभार्थियों से बात किया। शासन से जब अधिकारियों का निरीक्षण जिले में होता है तो टेंंट लगा कर सब कुछ अच्छा दिखाने का प्रयास किया जाता है। साहब के लिए कुर्सी लगाई जाती है। लेकिन गुरुवार जिले के चंदर्खा बुजुर्ग व गौसपुर मे राजकीय रेशम फार्म का निरीक्षण करने आए विशेष सचिव रेशम विकास विभाग सुनील कुमार वर्मा ने जब किसानों को दरी पर बैठे देखा तो उन्होंने अपनी कुर्सी यह कहते हुए छोड़ दी कि जब किसानों से बात करने आए हैं तो उनके साथ ही बैठ कर ही बात हो पाएगी।
इसी के बाद वह किसानों के साथ जमीन पर बैठ कर उनसे योजना और उससे मिलने वाले लाभ के बारे में जानकारी ली। इस मौके पर उन्होंने गौसपुर एवं चंदर्खा बुजुर्ग स्थित राजकीय रेशम फार्म का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने शहतूत पौधरोपण की गुणवत्ता जांची। इसके साथ ही चाकी कीट पालन के कार्य को देख कर संतुष्टि तो जाहिर की। लेकिन फार्म में वायर फेंसिंग के कार्य की गुणवत्ता खराब होने के कारण नाराजगी भी जताई।
वहां मौजूद अधिकारियों को यह निर्देश दिया कि वह जल्द से जल्द समूह बना कर रेशम धागे का निर्माण शुरू करा दें। इस मौके पर उन्होंने कहा कि रेशम विभाग द्वारा आगामी पांच सालों में उत्तर प्रदेश में रेशम का उत्पादन 350 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 700 मीट्रिक टन करने का लक्ष्य रखा गया है। रेशम के उत्पादन से प्रति एकड़ 1 लाख रुपये प्रति वर्ष कमाए जा सकते हैं। जो कि परंपरागत कृषि से ज्यादा है। इस दौरान विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। संवाद
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इसी के बाद वह किसानों के साथ जमीन पर बैठ कर उनसे योजना और उससे मिलने वाले लाभ के बारे में जानकारी ली। इस मौके पर उन्होंने गौसपुर एवं चंदर्खा बुजुर्ग स्थित राजकीय रेशम फार्म का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने शहतूत पौधरोपण की गुणवत्ता जांची। इसके साथ ही चाकी कीट पालन के कार्य को देख कर संतुष्टि तो जाहिर की। लेकिन फार्म में वायर फेंसिंग के कार्य की गुणवत्ता खराब होने के कारण नाराजगी भी जताई।
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वहां मौजूद अधिकारियों को यह निर्देश दिया कि वह जल्द से जल्द समूह बना कर रेशम धागे का निर्माण शुरू करा दें। इस मौके पर उन्होंने कहा कि रेशम विभाग द्वारा आगामी पांच सालों में उत्तर प्रदेश में रेशम का उत्पादन 350 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 700 मीट्रिक टन करने का लक्ष्य रखा गया है। रेशम के उत्पादन से प्रति एकड़ 1 लाख रुपये प्रति वर्ष कमाए जा सकते हैं। जो कि परंपरागत कृषि से ज्यादा है। इस दौरान विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। संवाद
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