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वसंत पंचमी पर की गई मां सरस्वती की पूजा
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श्रावस्ती के स्वामी दयाल सरस्वती शिशु मंदिर में वसंत पंचमी पर हवन करते छात्र व शिक्षक।
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। वसंत पंचमी पर गुरुवार को जिले के विद्यालयों सहित अन्य स्थानों पर ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा की गई। इस दौरान कई निजी विद्यालयों व शैक्षणिक संस्थानों में कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। वहीं भिनगा के स्वामी दयाल सरस्वती शिशु मंदिर में हवन पूजन किया गया। इस दौरान लोगों के घरों व अनुष्ठानों में मांगलिक आयोजन भी हुए। स्कूलों में बच्चों ने हे शारदे मां, हे शारदे मां, अज्ञानता से हमें तार दे मां व सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी आदि स्तुतियों से माता सरस्वती की प्रार्थना की।
भिनगा के स्वामी दयाल सरस्वती शिशु मंदिर में बसंत पंचमी पर हवन पूजन हुआ। इस दौरान बच्चों ने या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता की स्तुति कर मां सरस्वती का पूजन किया। इस दौरान प्रधानाचार्य जय प्रकाश तिवारी ने कहा कि भारतीय गणना के अनुसार वर्ष भर में छह ऋतुएं पड़ती हैं। जिनमें (वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर) में वसंत को ऋतुराज अर्थात सभी ऋतुओं का राजा माना गया है। पंचमी से वसंत ऋतु का आगमन हो जाता है। इसलिए यह ऋतु परिवर्तन का दिन भी है। इस दिन से प्राकृतिक का सौंदर्य निखरना शुरू हो जाता है। वसंत पंचमी को विशेष रूप से सरस्वती जयंती के रूप में मनाया जाता है।
जेपी मिश्र मधुकर ने कहा कि सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़ पौधों और जीव सब था। फिर भी उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती।
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मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संसार की हर चीज में स्वर आ गया। इससे उनका नाम देवी सरस्वती पड़ा। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की वसंत पंचमी को पूजा होने लगी। क्योंकि उस दिन वसंत पंचमी था। इस मौके पर योगेश कुमार, आभा मिश्रा, अर्चना गुप्ता, पूनम, रंजना भारती, उन्नति गुप्ता, भाव्या सिंह, रोशनी गुप्ता सहित काफी संख्या में लोग व छात्र छात्राएं मौजूद रहीं।
वहीं गिलौला के कृष्ण लली सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, किसान इंटर कॉलेज सुविखा, नेहरू स्मारक इंटर कॉलेज गिलौला में भी वसंत पंचमी पर हवन पूजन किया गया। जमुनहा के सरस्वती शिशु मंदिर रानी पुरवा में सरस्वती पूजन के दौरान हवन पूजन कर विद्या का वरदान मांगा गया। इस मौके पर किशोरी लाल गुप्ता, प्रधानाचार्य शिव शंकर मिश्रा, गीता गुप्ता, मनोज गुप्ता सहित काफी संख्या में शिक्षक अभिभावक व छात्र छात्राएं मौजूद रहीं।
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भिनगा के स्वामी दयाल सरस्वती शिशु मंदिर में बसंत पंचमी पर हवन पूजन हुआ। इस दौरान बच्चों ने या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता की स्तुति कर मां सरस्वती का पूजन किया। इस दौरान प्रधानाचार्य जय प्रकाश तिवारी ने कहा कि भारतीय गणना के अनुसार वर्ष भर में छह ऋतुएं पड़ती हैं। जिनमें (वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर) में वसंत को ऋतुराज अर्थात सभी ऋतुओं का राजा माना गया है। पंचमी से वसंत ऋतु का आगमन हो जाता है। इसलिए यह ऋतु परिवर्तन का दिन भी है। इस दिन से प्राकृतिक का सौंदर्य निखरना शुरू हो जाता है। वसंत पंचमी को विशेष रूप से सरस्वती जयंती के रूप में मनाया जाता है।
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जेपी मिश्र मधुकर ने कहा कि सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़ पौधों और जीव सब था। फिर भी उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती।
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मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संसार की हर चीज में स्वर आ गया। इससे उनका नाम देवी सरस्वती पड़ा। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की वसंत पंचमी को पूजा होने लगी। क्योंकि उस दिन वसंत पंचमी था। इस मौके पर योगेश कुमार, आभा मिश्रा, अर्चना गुप्ता, पूनम, रंजना भारती, उन्नति गुप्ता, भाव्या सिंह, रोशनी गुप्ता सहित काफी संख्या में लोग व छात्र छात्राएं मौजूद रहीं।
वहीं गिलौला के कृष्ण लली सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, किसान इंटर कॉलेज सुविखा, नेहरू स्मारक इंटर कॉलेज गिलौला में भी वसंत पंचमी पर हवन पूजन किया गया। जमुनहा के सरस्वती शिशु मंदिर रानी पुरवा में सरस्वती पूजन के दौरान हवन पूजन कर विद्या का वरदान मांगा गया। इस मौके पर किशोरी लाल गुप्ता, प्रधानाचार्य शिव शंकर मिश्रा, गीता गुप्ता, मनोज गुप्ता सहित काफी संख्या में शिक्षक अभिभावक व छात्र छात्राएं मौजूद रहीं।