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Shravasti News: बच्चे के लिए मां ही होती है प्रथम गुरु
Mon, 04 Aug 2025 12:46 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Mon, 04 Aug 2025 12:46 AM IST
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गायत्री शक्तिपीठ भिनगा में आयोजित गोष्ठी में मौजूद महिलाएं। -संवाद
कटरा (श्रावस्ती)। गायत्री शक्तिपीठ भिनगा में रविवार को नारी उत्कर्ष गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की शुरुआत मां गायत्री मां के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए जिला समन्वयक दधिबल सिंह ने कहा कि नारी देवत्व की मूर्तिमान प्रतिमा है। यूं तो दोष सब में होते हैं, सर्वथा निर्दोष तो एक परमात्मा ही है। नारी सर्वत्र पूजनीय होती है। वह आध्यात्मिक गुणों की खान होती है। एक बच्चे के लिए मां ही उसकी प्रथम गुरु होती है। पुरुषार्थ प्रधान पुरुष अपनी जगह ठीक है, लेकिन आत्मिक संपदा की दृष्टि से वह नारी से पीछे ही रहेगा।
उन्होंने आगे कहा कि लगातार दुर्गति से बढ़ता आ रहा नवयुग निश्चित रूप से अध्यात्म मान्यताओं से भरा होगा। इस दौरान मनुष्यों का चिंतन व दृष्टिकोण उसी स्तर का होगा। व्यवस्थाएं व परंपरायें उसी ढांचे में ढलेंगी। जनसाधारण की गतिविधियां भी उसी दिशा में उन्मुख होंगी।
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कहा कि शासनतंत्र, धर्मतंत्र, समाजतंत्र और अर्थतंत्र का सारा क्लेश उसी स्तर पर पुनर्निर्मित होगा। ऐसी स्थिति में नारी को हर क्षेत्र में विशेष भूमिकाएं निभानी होंगी। इसका कारण यह है कि अध्यात्म की विभूतियां जन्मजात उसी को उपलब्ध हुई हैं।
इस मौके पर बीनू सिंह राजपूत, नीलम, अर्चना तिवारी, सुषमा तिवारी, सरोजनी तिवारी, मालती जायसवाल, अंजू देवी, सरोज पाठक, कामिनी श्रीवास्तव व सुरेश कुमार तिवारी आदि मौजूद रहे।
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गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए जिला समन्वयक दधिबल सिंह ने कहा कि नारी देवत्व की मूर्तिमान प्रतिमा है। यूं तो दोष सब में होते हैं, सर्वथा निर्दोष तो एक परमात्मा ही है। नारी सर्वत्र पूजनीय होती है। वह आध्यात्मिक गुणों की खान होती है। एक बच्चे के लिए मां ही उसकी प्रथम गुरु होती है। पुरुषार्थ प्रधान पुरुष अपनी जगह ठीक है, लेकिन आत्मिक संपदा की दृष्टि से वह नारी से पीछे ही रहेगा।
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उन्होंने आगे कहा कि लगातार दुर्गति से बढ़ता आ रहा नवयुग निश्चित रूप से अध्यात्म मान्यताओं से भरा होगा। इस दौरान मनुष्यों का चिंतन व दृष्टिकोण उसी स्तर का होगा। व्यवस्थाएं व परंपरायें उसी ढांचे में ढलेंगी। जनसाधारण की गतिविधियां भी उसी दिशा में उन्मुख होंगी।
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कहा कि शासनतंत्र, धर्मतंत्र, समाजतंत्र और अर्थतंत्र का सारा क्लेश उसी स्तर पर पुनर्निर्मित होगा। ऐसी स्थिति में नारी को हर क्षेत्र में विशेष भूमिकाएं निभानी होंगी। इसका कारण यह है कि अध्यात्म की विभूतियां जन्मजात उसी को उपलब्ध हुई हैं।
इस मौके पर बीनू सिंह राजपूत, नीलम, अर्चना तिवारी, सुषमा तिवारी, सरोजनी तिवारी, मालती जायसवाल, अंजू देवी, सरोज पाठक, कामिनी श्रीवास्तव व सुरेश कुमार तिवारी आदि मौजूद रहे।