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Shravasti News: प्रशासन की बदइंतजामी गरीबों पर पड़ रही भारी
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श्रावस्ती। तराई में पारा लगातार लुढ़क रहा है। इसके बावजूद गरीबों को ठंड से बचाने के लिए अब तक ठोस पहल नहीं हुई। सार्वजनिक स्थलों पर डाली गई लकड़ी गीली होने के कारण अलाव नहीं जल सके। इतना ही नहीं रैन बसेरों में संसाधनों की कमी होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इसके बावजूद प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
शासन की ओर से रात आठ बजे के बाद बसों का संचालन रोक दिया गया है। ऐसे में गैर जिलों व महानगरों से लौटने वाले लोगों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए या तो स्वयं के वाहन का इंतजाम करना पड़ रहा है। या फिर सुबह होने का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में कड़ाके की ठंड के बीच प्रशासन की बदइंतजामी गरीबों पर भारी पड़ रही है।
भिनगा व इकौना सहित जिले के अन्य क्षेत्रों में मौजूद रैन बसेरों में या तो ताला लटक रहा है या फिर उन पर स्थानीय संस्थाएं काबिज हैं। जहां न तो अलाव के लिए लकड़ी की व्यवस्था है और न ही गद्दा व कंबल की। वहीं तहसील प्रशासन की ओर से जिले के प्रमुख बाजारों, कस्बों व चौक चौराहों पर अब तक अलाव के लिए लकड़ी की व्यवस्था नहीं की गई है। जिससे सुबह होने के लिए वाहनों का इंतजार करने वाले मुसाफिरों को कड़ाके की ठंड में रात गुजारनी पड़ रही है।
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वहीं भिनगा में नगर पालिका की ओर से चुनिंदा स्थानों पर अलाव के लिए रखी गई लकड़ी गीली होने के कारण लोग तमाम प्रयास के बाद भी उसे नहीं जला पा रहे हैं। ऐसे में सिरसिया, लक्ष्मनपुर, जोखवा व मथुरा बाजार सहित तालबघौड़ा आदि क्षेत्र जाने के लिए सुबह का इंतजार करने वाले लोगों को ठंड से कंपकंपाते देखा जा रहा है। यही स्थिति जिला अस्पताल सहित सीएचसी व पीएचसी की भी है। जहां अलाव की व्यवस्था न होने के कारण तीमारदारों को ठंड से बेहाल देखा जा रहा है।
रात में छाया रहा कोहरा, दिन में निकली धूप
तराई में मौसम का मिजाज शुक्रवार को सामान्य रहा। गुरुवार शाम शुरू हुए घने कोहरे ने जहां पूरी रात वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगाए रखा। वहीं शुक्रवार की सुबह सात बजे के बाद खिली धूप ने मौसम को खुशगवार बना दिया। एक तरफ जहां रात में घने कोहरे के कारण दृष्टता काफी कम होने से बौद्ध परिपथ सहित कई अन्य प्रमुख मार्गों पर वाहन खड़े हो गए। वहीं सुबह मौसम सामान्य होने के कारण विगत तीन दिनों से अस्त व्यस्त हो चुका जनजीवन सामान्य दिखा।
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शासन की ओर से रात आठ बजे के बाद बसों का संचालन रोक दिया गया है। ऐसे में गैर जिलों व महानगरों से लौटने वाले लोगों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए या तो स्वयं के वाहन का इंतजाम करना पड़ रहा है। या फिर सुबह होने का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में कड़ाके की ठंड के बीच प्रशासन की बदइंतजामी गरीबों पर भारी पड़ रही है।
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भिनगा व इकौना सहित जिले के अन्य क्षेत्रों में मौजूद रैन बसेरों में या तो ताला लटक रहा है या फिर उन पर स्थानीय संस्थाएं काबिज हैं। जहां न तो अलाव के लिए लकड़ी की व्यवस्था है और न ही गद्दा व कंबल की। वहीं तहसील प्रशासन की ओर से जिले के प्रमुख बाजारों, कस्बों व चौक चौराहों पर अब तक अलाव के लिए लकड़ी की व्यवस्था नहीं की गई है। जिससे सुबह होने के लिए वाहनों का इंतजार करने वाले मुसाफिरों को कड़ाके की ठंड में रात गुजारनी पड़ रही है।
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वहीं भिनगा में नगर पालिका की ओर से चुनिंदा स्थानों पर अलाव के लिए रखी गई लकड़ी गीली होने के कारण लोग तमाम प्रयास के बाद भी उसे नहीं जला पा रहे हैं। ऐसे में सिरसिया, लक्ष्मनपुर, जोखवा व मथुरा बाजार सहित तालबघौड़ा आदि क्षेत्र जाने के लिए सुबह का इंतजार करने वाले लोगों को ठंड से कंपकंपाते देखा जा रहा है। यही स्थिति जिला अस्पताल सहित सीएचसी व पीएचसी की भी है। जहां अलाव की व्यवस्था न होने के कारण तीमारदारों को ठंड से बेहाल देखा जा रहा है।
रात में छाया रहा कोहरा, दिन में निकली धूप
तराई में मौसम का मिजाज शुक्रवार को सामान्य रहा। गुरुवार शाम शुरू हुए घने कोहरे ने जहां पूरी रात वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगाए रखा। वहीं शुक्रवार की सुबह सात बजे के बाद खिली धूप ने मौसम को खुशगवार बना दिया। एक तरफ जहां रात में घने कोहरे के कारण दृष्टता काफी कम होने से बौद्ध परिपथ सहित कई अन्य प्रमुख मार्गों पर वाहन खड़े हो गए। वहीं सुबह मौसम सामान्य होने के कारण विगत तीन दिनों से अस्त व्यस्त हो चुका जनजीवन सामान्य दिखा।