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प्रवासियों से गांव में बढ़ी विकास की रफ्तार
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श्रावस्ती। लॉकडाउन के कारण घर लौटे प्रवासी मजदूरों से जिले में विकास की उम्मीद बढ़ गई है। विगत वर्ष जहां मनरेगा का श्रम लक्ष्य जिले में अधूरा रह गया था। वहीं इस वर्ष वित्तीय वर्ष के दो माह बीतने पर ही मानव श्रम दिवस का लक्ष्य पचास फीसदी से अधिक हो चुका है। श्रमिकों की कमी के चलते जहां अभी तक मिट्टी के कार्य नहीं हो पाते थे, वहां आज हर गांव में विकास ने रफ्तार पकड़ रखी है।
कोरोना संक्रमण के दौरान हुए लॉकडाउन के चलते प्रवासी श्रमिक घर लौट आए हैं। इससे गांवों में विकास की गति तेज हो गई है। मनरेगा योजना के तहत गांव के चारों ओर कहीं जल संरक्षण के लिए तालाब की सफाई हो रही है, तो कहीं नए तालाब का निर्माण कराया जा रहा है। गांव को चारों तरफ से संपर्क मार्ग से जोड़ने के लिए गड्ढों में तब्दील चक मार्गों की पटाई हो रही है।
स्थिति यह है कि ग्राम पंचायत चाहे जितने स्थानों पर एक साथ काम प्रारंभ कर दें, लेकिन मजदूरों की कमी नहीं हो रही है। यह विकास की बानगी मात्र है। जिस दिन महानगरों से लौटे श्रमिकों के होम क्वारंटीन की अवधि पूरी हो जाएगी। उस दिन गांवों में चहुं ओर विकास दिखेगा। देखा जाए तो इस विकास के पीछे जिले में लौटे 37748 प्रवासी मजदूरों का बड़ा योगदान है।
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जो अब तक महानगरों से वापस कर चुके है। इसमें से मात्र 7349 श्रमिक ही काम पर पहुंचे है। यह वह मजदूर हैं जिनकी होम क्वारंटीन अवधि पूरा हो चुकी है। जबकि अभी भी जिले में 31399 मजदूर होम क्वारंटीन है। जिनका क्वारंटीन अवधि पूरा होने के बाद विकास की गति अपने चरम पर पहुंच जाएगी।
विगत वर्ष जिले में 2204977 मानव श्रम सृजन दिवस का लक्ष्य था। इसके सापेक्ष यह 2168752 अर्थात 98.6 प्रतिशत ही पूरा हो पाया था। इस लक्ष्य में इकौना विकास खंड का 381017 के सापेक्ष 357329 यानी 93.78 प्रतिशत, गिलौला में 499327 के सापेक्ष 499711, हरिहरपुररानी में 408343 के सापेक्ष 396589, जमुनहा में 436967 के सापेक्ष 438398 व सिरसिया में 479323 के सापेक्ष 476725 मानव श्रम दिवस का लक्ष्य ही पूरा हो पाया था।
प्रवासी मजदूरों की वापसी के बाद मनरेगा योजना के तहत मानव श्रम सृजन दिवस लक्ष्य अभी से 58.39 प्रतिशत पहुंच गया है। इस वर्ष मानव श्रम सृजन दिवस का वार्षिक लक्ष्य जिले में 2260099 रखा गया है। इसके सापेक्ष मई में 58.39 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो चुका है। इसके साथ ही जिले में लगभग प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्रतिदिन 200 से 250 मजदूर विभिन्न योजना में कार्य कर रहे हैं।
डीसी मनरेगा उपेंद्र पाठक ने बताया कि इस समय सभी ग्राम पंचायतों में प्रवासी मजदूरों की वापसी हुई है। किसी भी मजदूर के लिए काम की कमी न रहे, इसलिए मनरेगा योजना के तहत उन्हें काम दिया जा रहा है। मजदूरों की अधिकता होने के कारण कार्य में गति दिखाई दे रही है। जिले का कुल श्रमिक लक्ष्य अभी ही 58 फीसदी से अधिक हो चुका है। यह एक अच्छा संकेत है। - उपेंद्र पाठक, डीसी मनरेगा
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कोरोना संक्रमण के दौरान हुए लॉकडाउन के चलते प्रवासी श्रमिक घर लौट आए हैं। इससे गांवों में विकास की गति तेज हो गई है। मनरेगा योजना के तहत गांव के चारों ओर कहीं जल संरक्षण के लिए तालाब की सफाई हो रही है, तो कहीं नए तालाब का निर्माण कराया जा रहा है। गांव को चारों तरफ से संपर्क मार्ग से जोड़ने के लिए गड्ढों में तब्दील चक मार्गों की पटाई हो रही है।
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स्थिति यह है कि ग्राम पंचायत चाहे जितने स्थानों पर एक साथ काम प्रारंभ कर दें, लेकिन मजदूरों की कमी नहीं हो रही है। यह विकास की बानगी मात्र है। जिस दिन महानगरों से लौटे श्रमिकों के होम क्वारंटीन की अवधि पूरी हो जाएगी। उस दिन गांवों में चहुं ओर विकास दिखेगा। देखा जाए तो इस विकास के पीछे जिले में लौटे 37748 प्रवासी मजदूरों का बड़ा योगदान है।
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जो अब तक महानगरों से वापस कर चुके है। इसमें से मात्र 7349 श्रमिक ही काम पर पहुंचे है। यह वह मजदूर हैं जिनकी होम क्वारंटीन अवधि पूरा हो चुकी है। जबकि अभी भी जिले में 31399 मजदूर होम क्वारंटीन है। जिनका क्वारंटीन अवधि पूरा होने के बाद विकास की गति अपने चरम पर पहुंच जाएगी।
विगत वर्ष जिले में 2204977 मानव श्रम सृजन दिवस का लक्ष्य था। इसके सापेक्ष यह 2168752 अर्थात 98.6 प्रतिशत ही पूरा हो पाया था। इस लक्ष्य में इकौना विकास खंड का 381017 के सापेक्ष 357329 यानी 93.78 प्रतिशत, गिलौला में 499327 के सापेक्ष 499711, हरिहरपुररानी में 408343 के सापेक्ष 396589, जमुनहा में 436967 के सापेक्ष 438398 व सिरसिया में 479323 के सापेक्ष 476725 मानव श्रम दिवस का लक्ष्य ही पूरा हो पाया था।
प्रवासी मजदूरों की वापसी के बाद मनरेगा योजना के तहत मानव श्रम सृजन दिवस लक्ष्य अभी से 58.39 प्रतिशत पहुंच गया है। इस वर्ष मानव श्रम सृजन दिवस का वार्षिक लक्ष्य जिले में 2260099 रखा गया है। इसके सापेक्ष मई में 58.39 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो चुका है। इसके साथ ही जिले में लगभग प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्रतिदिन 200 से 250 मजदूर विभिन्न योजना में कार्य कर रहे हैं।
डीसी मनरेगा उपेंद्र पाठक ने बताया कि इस समय सभी ग्राम पंचायतों में प्रवासी मजदूरों की वापसी हुई है। किसी भी मजदूर के लिए काम की कमी न रहे, इसलिए मनरेगा योजना के तहत उन्हें काम दिया जा रहा है। मजदूरों की अधिकता होने के कारण कार्य में गति दिखाई दे रही है। जिले का कुल श्रमिक लक्ष्य अभी ही 58 फीसदी से अधिक हो चुका है। यह एक अच्छा संकेत है। - उपेंद्र पाठक, डीसी मनरेगा