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काम की तलाश में प्रवासी मजदूर जा रहे पंजाब व दिल्ली

Tue, 14 Jul 2020 09:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2020 09:57 PM IST
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Migrant laborers going to Punjab and Delhi in search of work
श्रावस्ती। लॉकडाउन के दौरान अपने घरों में लौटे प्रवासी मजदूर कोराना संक्रमण की रफ्तार बढ़ने के बाद भी वापस महानगरों की ओर लौटने लगे हैं। जिले में हर रोज कई जत्थे में प्रवासी वापस जाते दिख रहे हैं। प्रवासी मजदूरों का कहना है कि उन्हें अब जिले में काम नहीं मिला रहा है। वहीं जो काम मिल भी रहा है उसमें मजदूरी काफी कम है। इसके चलते घर में भुखमरी की स्थिति आ गई है। इस लिए उन्हें फिर से महानगरों व दूसरे प्रदेशों की ओर काम की तलाश में लौटना पड़ रहा है।
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प्रवासी मजदूरों में कोरानो संक्रमण का डर भूख के आगे खत्म सा हो गया है। इसी कारण जब संक्रमण तेजी से फैल रहा है तो प्रवासी मजदूर काम की तलाश में फिर से वापस महानगरों व दूसरे प्रदेशों को लौटने लगे है। प्रवासी मजदूरों का कहना है कि विगत कई माह से उन्हें काम नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते उनके घर में भुखमरी की स्थिति हो गई है। कुछ दिन गांव में मनरेगा में काम मिला, लेकिन अब वहां भी काम नहीं मिल पा रहा है, हालत यह है कि गांव में अब दो सौ रुपये तक की मजदूरी नहीं मिला पा रही है।
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इस लिए अब चाहे जीवन रहे या न रहे काम तो करना ही है। इस तरह मंगलवार को भंगहा क्षेत्र से एक जत्था लुधियाना व पंजाब जाने के लिए निकला था। खरगौरा मोड़ पर मिले मनोहर, दद्दन व प्रभूनाथ ने बताया की वह सभी लोग बेकरी में काम करते थे, लॉकडाउन में गांव लौटने के बाद उन्हें मनरेगा में काम मिला था।
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यह काम उनके लिए रुचिकर नहीं था। एक तो इसमें मजदूरी कम मिलती है, दूसरी यह काम छोड़े उन्हें कई वर्ष बीत गए। अब यह काम नहीं हो पा रहा है। इससे उनके परिवार का गुजारा नहीं हो पा रहा है। वही जत्थे में शामिल अखिलेश का कहना है कि महानगरों में वह बर्तन बनाने की फैक्ट्री में काम करता था। अमूमन वहां उसे बारह सौ तक की मजदूरी मिल जाती थी। गांव में मनरेगा में मिट्टी पटाई के अतिरिक्त कोई अन्य काम नहीं मिला। इसीलिए वापस जा रहा है।
निजी बसों से हो रहा पलायन
लुधियाना, पंजाब व दिल्ली से प्रतिदिन एक निजी बस क्षेत्र में आती व जाती है। इसी बस से प्रति दिन सौ से दो सौ मजदूर महानगरों की ओर पलायन कर रहे है।
इन विभागों को काम देने का लक्ष्य
वन विभाग की ओर से 18 कार्य के सापेक्ष 39942, सिंचाई विभाग के 16 कार्य के सापेक्ष 48078, लोक निर्माण विभाग के 186 कार्य के सापेक्ष 288850 मानव दिवस तथा भूमि विकास विभाग की ओर से छह कार्य के सापेक्ष 8097, आईडब्लूएमपी की ओर से 3910 व रेशम विभाग की ओर से 414 मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है। इसके तहत प्रवासी मजदूरों को गांव में ही रोजगार दिलाया जाना है।
सेक्टरवार काम देने की व्यवस्था
जिले में आए प्रवासियों की संख्या 55434 है। इन प्रवासी मजदूरों को उनके स्किल के आधार पर काम देने की व्यवस्था की गई थी। इस दौरान स्क्लि मैपिंग में कृषि क्षेत्र के तहत चार प्रतिशत, निर्माण में 40 प्रतिशत, इलेक्ट्रिकल में 15 प्रतिशत, इलेक्ट्रानिक में 10 प्रतिशत, वाहन चालन में 10 प्रतिशत, आटोमोटिव मैकेनिक में तीन प्रतिशत, गारमेंट मेकिंग दो प्रतिशत, सर्विस सेक्टर में पांच व अन्य सेक्टर के 11 प्रतिशत प्रवासी को रोजगार देने के लिए चिह्नित किया गया था, लेकिन सभी सेक्टर में प्रवासी मजदूरों को काम नहीं मिल पाया।

न मिले काम तो करें संपर्क
प्रवासी मजदूरों के लिए कई योजनाएं संचालित है। इसमें उन्हें निशुल्क अनाज के साथ एक हजार रुपये की सहायता भी दी गई है। सभी प्रवासियों को काम उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बाद भी यदि किसी को काम नहीं मिल पा रहा है तो वह उनसे संपर्क कर सकता है। - योगानंद पांडे एडीएम
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