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‘आमदनी दस पैसा खर्चा हुआ रुपइया...’
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श्रावस्ती। दीपावली मेला स्ट्रीट वेंडरों को रोजगार तक नहीं दे सका। तीन दिन के मेले में किसी ने महज बीस रुपये तो किसी ने सौ रुपये कमा कर संतोष किया। मेले की स्थिति यह रही कि आमदनी दस पैसा तो खर्चा एक रुपये हो गया। यह मेला केवल मनोरंजन तक ही सीमित रहा।
दीपावली के अवसर पर स्ट्रीट वेंडरों को कमाने का मौका देने के लिए दीपावली मेले का आयोजन भिनगा नगर में 28 से 30 अक्टूबर तक किया गया था। समापन शनिवार रात आठ बजे सीडीओ ने किया। मेला पहले दिन से ही अपने उद्देश्यों से भटक गया। जो अंतिम दिन तक पटरी पर नहीं आ सका। मेला आयोजन के लिए स्टाल बनाने से लेकर बिजली, पानी, शौचालय की व्यवस्था में नगर पालिका ने अच्छा खासा पैसा खर्च किया। लेकिन वहां दुकान लाने में वह सफल नहीं हो पाए। भिनगा की कुछ दुकानें जिसमें फल, प्लास्टिक के सामान की दुकान व स्वयं सहायता समूह के लोग आए। खर्च के बावजूद यहां ग्राहक नहीं आए। जिसके चलते किसी ने 250 तो किसी ने 300 रुपये के सामान की बिक्री की।
स्वयं सहायता समूह भी अपने उत्पाद की बिक्री करने में असफल रहे। जिसके चलते इन दुकानदारों में किसी ने बीस तो किसी ने सौ रुपये ही कमाए। साथ ही सामान लाने, ले जाने में अच्छा पैसा खर्च करना पड़ा। रात में होने वाले संास्कृतिक कार्यक्रम का भी लोगों ने लुत्फ उठाया। मेले के अंतिम दिन कस्तूरबा गांधी हरिहरपुररानी एवं आश्रम पद्धति विद्यालय भयापुरवा की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। समापन पर मुख्य विकास अधिकारी ईशान प्रताप सिंह, अपर जिलाधिकारी कमलेश चंद्र, उपजिलाधिकारी भिनगा प्रवेन्द्र कुमार, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका भिनगा यदुनाथ, डीसी एनआरएलएम रविन्द्र कुमार चतुर्वेदी, डीसी एनआरएलएम के जिला समन्वयक सहित अन्य मौजूद रहे।
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मेले की यह थी मंशा
सरकार की मंशा थी कि नगर निकाय क्षेत्रों में दीपावली मेले का आयोजन किया जाए, ताकि स्वनिधि योजना के लाभार्थी, पटरी दुकानदारों एवं खोमचे वाले दुकानदार अपने सामान की बिक्री कर लाभान्वित हो सके। इसके साथ ही स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाये गये उत्पादों की भी बिक्री बढ़ा कर उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर ले जाया जाए।
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दीपावली के अवसर पर स्ट्रीट वेंडरों को कमाने का मौका देने के लिए दीपावली मेले का आयोजन भिनगा नगर में 28 से 30 अक्टूबर तक किया गया था। समापन शनिवार रात आठ बजे सीडीओ ने किया। मेला पहले दिन से ही अपने उद्देश्यों से भटक गया। जो अंतिम दिन तक पटरी पर नहीं आ सका। मेला आयोजन के लिए स्टाल बनाने से लेकर बिजली, पानी, शौचालय की व्यवस्था में नगर पालिका ने अच्छा खासा पैसा खर्च किया। लेकिन वहां दुकान लाने में वह सफल नहीं हो पाए। भिनगा की कुछ दुकानें जिसमें फल, प्लास्टिक के सामान की दुकान व स्वयं सहायता समूह के लोग आए। खर्च के बावजूद यहां ग्राहक नहीं आए। जिसके चलते किसी ने 250 तो किसी ने 300 रुपये के सामान की बिक्री की।
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स्वयं सहायता समूह भी अपने उत्पाद की बिक्री करने में असफल रहे। जिसके चलते इन दुकानदारों में किसी ने बीस तो किसी ने सौ रुपये ही कमाए। साथ ही सामान लाने, ले जाने में अच्छा पैसा खर्च करना पड़ा। रात में होने वाले संास्कृतिक कार्यक्रम का भी लोगों ने लुत्फ उठाया। मेले के अंतिम दिन कस्तूरबा गांधी हरिहरपुररानी एवं आश्रम पद्धति विद्यालय भयापुरवा की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। समापन पर मुख्य विकास अधिकारी ईशान प्रताप सिंह, अपर जिलाधिकारी कमलेश चंद्र, उपजिलाधिकारी भिनगा प्रवेन्द्र कुमार, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका भिनगा यदुनाथ, डीसी एनआरएलएम रविन्द्र कुमार चतुर्वेदी, डीसी एनआरएलएम के जिला समन्वयक सहित अन्य मौजूद रहे।
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मेले की यह थी मंशा
सरकार की मंशा थी कि नगर निकाय क्षेत्रों में दीपावली मेले का आयोजन किया जाए, ताकि स्वनिधि योजना के लाभार्थी, पटरी दुकानदारों एवं खोमचे वाले दुकानदार अपने सामान की बिक्री कर लाभान्वित हो सके। इसके साथ ही स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाये गये उत्पादों की भी बिक्री बढ़ा कर उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर ले जाया जाए।