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अशिक्षा ही परिवार वृद्धि का मुख्य कारण
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कलेक्ट्रेट स्थित तथागत हाल में आयोजित कार्यशाला में मौजूद आशा, एएनएम व अन्य।
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। आशा बहू सम्मेलन का आयोजन रविवार को कलेक्ट्रेट के तथागत हाल में किया गया। इस दौरान परिवार नियोजन के उपायों पर चर्चा की गई। सम्मेलन में डीएम ने प्रधानों से भी परिवार नियोजन को बढ़ावा देने की अपील की।
आशा बहू सम्मेलन में इस बार परिवार नियोजन केंद्र बिंदु रहा। सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए डीएम यशु रुस्तगी ने जिले में अशिक्षा को ही परिवार वृद्धि का कारण बताते हुए इसे रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि बढ़ रही जनसंख्या व घट रहे संसाधनों के बीच संतुलन बनाने के लिए आशा बहु अहम कड़ी हैं।
परिवार नियोजन का कार्य सुनियोजित ढंग से हो सके, इसलिए प्रधान भी आगे आकर अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि जिले में शिशु मृत्यु दर 96 बच्चे प्रति हजार है। यानी कि एक हजार के सापेक्ष 96 बच्चे एक वर्ष की आयु पूरा करने से पूर्व ही मृत्यु का शिकार हो जाते हैं। देखा जाए तो प्रदेश में यह आंकड़ा मात्र 43 का ही है।
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यही नहीं जिले में गर्भवती माताओं एवं शिशुओं की अकाल मृत्यु की दर भी अधिक है। प्रधानों के थोड़े से सहयोग से ही इन आंकड़ों में परिवर्तन लाया जा सकता है। इसके लिए 18 वर्ष से पूर्व बालिकाओं का विवाह न हो। बच्चों में तीन वर्ष का अंतर हो। सम्मेलन में गर्भ निरोधक के रूप में मिलने वाली मुफ्त सहायता की भी जानकारी दी गई। इस मौके पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. बीके सिंह सहित काफी संख्या में आशा बहू व ग्राम प्रधान मौजूद रहे।
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आशा बहू सम्मेलन में इस बार परिवार नियोजन केंद्र बिंदु रहा। सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए डीएम यशु रुस्तगी ने जिले में अशिक्षा को ही परिवार वृद्धि का कारण बताते हुए इसे रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि बढ़ रही जनसंख्या व घट रहे संसाधनों के बीच संतुलन बनाने के लिए आशा बहु अहम कड़ी हैं।
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परिवार नियोजन का कार्य सुनियोजित ढंग से हो सके, इसलिए प्रधान भी आगे आकर अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि जिले में शिशु मृत्यु दर 96 बच्चे प्रति हजार है। यानी कि एक हजार के सापेक्ष 96 बच्चे एक वर्ष की आयु पूरा करने से पूर्व ही मृत्यु का शिकार हो जाते हैं। देखा जाए तो प्रदेश में यह आंकड़ा मात्र 43 का ही है।
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यही नहीं जिले में गर्भवती माताओं एवं शिशुओं की अकाल मृत्यु की दर भी अधिक है। प्रधानों के थोड़े से सहयोग से ही इन आंकड़ों में परिवर्तन लाया जा सकता है। इसके लिए 18 वर्ष से पूर्व बालिकाओं का विवाह न हो। बच्चों में तीन वर्ष का अंतर हो। सम्मेलन में गर्भ निरोधक के रूप में मिलने वाली मुफ्त सहायता की भी जानकारी दी गई। इस मौके पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. बीके सिंह सहित काफी संख्या में आशा बहू व ग्राम प्रधान मौजूद रहे।