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Shravasti News: पांच अस्पतालों को मिले स्वीकृति तो फैले आयुर्वेद का जाल
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श्रावस्ती। पांच नए आयुर्वेद यूनानी अस्पताल का प्रस्ताव जिला योजना में दिया गया है। यदि इन अस्पतालों को मंजूरी मिलती है तो जिले से लुप्त हो चुकी प्राचीन आयुर्वेद पद्धति को नवजीवन मिलेगा। इसके साथ ही अभी तक स्थानीय जड़ी बूटियों से हो रहे असाध्य रोगों के इलाज का नया रास्ता खुलेगा।
आयुर्वेद व श्रावस्ती का प्राचीन संबंध है। प्राचीन श्रावस्ती की खुदाई में धनवंतरि वैद्य की शिष्या लोना चमारिन का एक कुआं भी मिला है। यदि किवदंतियों पर जाएं तो धन्वंतरि वैद्य की मृत्यु के बाद उनकी अस्थियों को इसी कुएं में डाल दिया गया था। आज भी दूर दराज से लोग आकर इस कुएं का जल लेकर जाते हैं। इससे उनके असाध्य रोग ठीक हो जाते हैं। इस किवदंती के साथ ही जिले के जंगलों में असाध्य रोगों को ठीक करने की दुर्लभ जड़ी-बूटियां मौजूद हैं।
यदि वन विभाग की सूची पर गौर करें तो करीब 136 प्रकार की जड़ी-बूटियां इस जंगल में पाई जाती हैं। जिसका उपयोग आज भी स्थानीय वैद्य कर रहे हैं। यहां तक कि सिरसिया में कई वैद्य ऐसे हैं जिनके यहां असाध्य रोगों को ठीक कराने के लिए मरीजों की कतार लगी रहती है। इसके बावजूद जिले में जिला आयुर्वेद अस्पताल की स्थापना नहीं हो पाई है। इसके लिए शासन ने अभी कुछ दिन पूर्व 50 बेड के अस्पताल को मंजूरी दी है। जिसका निर्माण चल रहा है।
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वहीं नासिरगंज में जर्जर अस्पताल की जगह नया आयुर्वेद ओपीडी अस्पताल बनाया जा रहा है। इसका भी निर्माण अंतिम दौर में है। जबकि इस वर्ष की जिला योजना में इकौना नगर, लक्ष्मणपुर, मनिकापुर खुर्द व मल्हीपुर में चार-चार बेड के नए आयुर्वेद अस्पताल व दिकौली में चार बेड का यूनानी चिकित्सालय बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
यदि इन नए चिकित्सालयों को बनाने की मंजूरी मिल जाती है तो एक बार फिर जिले में आयुर्वेद चिकित्सा की धाक जम जाएगी। इस संबंध में प्रभारी जिला आयुर्वेद यूनानी चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार पांडे गुलशन ने बताया कि हमें पांच नए चिकित्सालयों की स्वीकृति का इंतजार है। इसके बाद संभव है कि लोगों को असाध्य रोगों का इलाज पुन: जिले में आसानी से मिल पाए।
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आयुर्वेद व श्रावस्ती का प्राचीन संबंध है। प्राचीन श्रावस्ती की खुदाई में धनवंतरि वैद्य की शिष्या लोना चमारिन का एक कुआं भी मिला है। यदि किवदंतियों पर जाएं तो धन्वंतरि वैद्य की मृत्यु के बाद उनकी अस्थियों को इसी कुएं में डाल दिया गया था। आज भी दूर दराज से लोग आकर इस कुएं का जल लेकर जाते हैं। इससे उनके असाध्य रोग ठीक हो जाते हैं। इस किवदंती के साथ ही जिले के जंगलों में असाध्य रोगों को ठीक करने की दुर्लभ जड़ी-बूटियां मौजूद हैं।
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यदि वन विभाग की सूची पर गौर करें तो करीब 136 प्रकार की जड़ी-बूटियां इस जंगल में पाई जाती हैं। जिसका उपयोग आज भी स्थानीय वैद्य कर रहे हैं। यहां तक कि सिरसिया में कई वैद्य ऐसे हैं जिनके यहां असाध्य रोगों को ठीक कराने के लिए मरीजों की कतार लगी रहती है। इसके बावजूद जिले में जिला आयुर्वेद अस्पताल की स्थापना नहीं हो पाई है। इसके लिए शासन ने अभी कुछ दिन पूर्व 50 बेड के अस्पताल को मंजूरी दी है। जिसका निर्माण चल रहा है।
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वहीं नासिरगंज में जर्जर अस्पताल की जगह नया आयुर्वेद ओपीडी अस्पताल बनाया जा रहा है। इसका भी निर्माण अंतिम दौर में है। जबकि इस वर्ष की जिला योजना में इकौना नगर, लक्ष्मणपुर, मनिकापुर खुर्द व मल्हीपुर में चार-चार बेड के नए आयुर्वेद अस्पताल व दिकौली में चार बेड का यूनानी चिकित्सालय बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
यदि इन नए चिकित्सालयों को बनाने की मंजूरी मिल जाती है तो एक बार फिर जिले में आयुर्वेद चिकित्सा की धाक जम जाएगी। इस संबंध में प्रभारी जिला आयुर्वेद यूनानी चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार पांडे गुलशन ने बताया कि हमें पांच नए चिकित्सालयों की स्वीकृति का इंतजार है। इसके बाद संभव है कि लोगों को असाध्य रोगों का इलाज पुन: जिले में आसानी से मिल पाए।