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यूरिया के लिए चक्कर लगा रहे किसान
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जमुनहा में महंगे दामों में धान लेकर जाते किसान
- फोटो : SRAWASTI
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जमुनहा (श्रावस्ती)। प्राकृतिक आपदाओं का दंश झेल रहे जमुनहा क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इन सबके बाद अब जब किसान धान की रोपाई कर चुके हैं। तब उन्हें यूरिया की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। समितियों पर यूरिया न होने के कारण किसान बाजार से यूरिया खरीदने को विवश हैं। जहां दुकानदार निर्धारित मूल्य से अधिक पैसा वसूल रहे हैं। जिसका विरोध करने वाले किसानों को बैरंग लौटना पड़ रहा है।
राप्ती में आई बाढ़ से धान की नर्सरी का कार्य पिछड़ गया था। बाढ़ का पानी कम होने के बाद धान की नर्सरी डालने वाले किसानों को समय पर बरसात न होने के कारण पंपिंग सेटों का सहारा लेना पड़ा। देर से बरसात होने के कारण किसान पहले ही नुकसान उठा चुके हैं। ऐसे में जब धान की रोपाई के बाद अब किसानों को यूरिया की आवश्यकता है। तो समितियों पर ताले लटक रहे हैं। साधन सहकारी समितियों पर यूरिया न होने के कारण किसान थक हार कर दुकान से खरीदने को विवश हैं। जहां दुकानदार किसानों से निर्धारित मूल्य से अधिक पैसा वसूल रहे हैं।
देखा जाए तो जमुनहा विकास क्षेत्र में 10 साधन सहकारी समितियां मौजूद हैं। जहां रैक न आने के कारण यूरिया का अभाव है। ऐसे में यूरिया के लिए किसान समितियों का चक्कर लगा रहे हैं। समितियों पर यूरिया न मिलने से निराश किसान निजी दुकानों से मंहगे दामों पर यूरिया खरीद रहे हैं। गौसपुर के किसान अमिरका प्रसाद व असनी के किसान अहमद हसन, नरैनापुर के मजरा जोगिया निवासी घसीटे, नक्कू, त्रिभुवन आदि का आरोप है कि दुकानों पर 45.125 किलोग्राम शक्तिमान नीम कोटेड यूरिया का मूल्य 266.50 रुपये प्रति बोरी अंकित है। जबकि दुकानदार द्वारा इसका 360 रुपये वसूल किया जा रहा है। यह स्थिति क्षेत्र के सभी दुकानों की है।
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वहीं इसका विरोध करने वाले किसानों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। इसकी जानकारी के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाए शिकायत न मिलने की बात कह रहे हैं। इस संबंध में एडीएम योगानंद पांडे बताते हैं कि सोमवार को दुकानों पर छापा मारा जाएगा। यदि कहीं ओवर रेटिंग की शिकायत मिली तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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राप्ती में आई बाढ़ से धान की नर्सरी का कार्य पिछड़ गया था। बाढ़ का पानी कम होने के बाद धान की नर्सरी डालने वाले किसानों को समय पर बरसात न होने के कारण पंपिंग सेटों का सहारा लेना पड़ा। देर से बरसात होने के कारण किसान पहले ही नुकसान उठा चुके हैं। ऐसे में जब धान की रोपाई के बाद अब किसानों को यूरिया की आवश्यकता है। तो समितियों पर ताले लटक रहे हैं। साधन सहकारी समितियों पर यूरिया न होने के कारण किसान थक हार कर दुकान से खरीदने को विवश हैं। जहां दुकानदार किसानों से निर्धारित मूल्य से अधिक पैसा वसूल रहे हैं।
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देखा जाए तो जमुनहा विकास क्षेत्र में 10 साधन सहकारी समितियां मौजूद हैं। जहां रैक न आने के कारण यूरिया का अभाव है। ऐसे में यूरिया के लिए किसान समितियों का चक्कर लगा रहे हैं। समितियों पर यूरिया न मिलने से निराश किसान निजी दुकानों से मंहगे दामों पर यूरिया खरीद रहे हैं। गौसपुर के किसान अमिरका प्रसाद व असनी के किसान अहमद हसन, नरैनापुर के मजरा जोगिया निवासी घसीटे, नक्कू, त्रिभुवन आदि का आरोप है कि दुकानों पर 45.125 किलोग्राम शक्तिमान नीम कोटेड यूरिया का मूल्य 266.50 रुपये प्रति बोरी अंकित है। जबकि दुकानदार द्वारा इसका 360 रुपये वसूल किया जा रहा है। यह स्थिति क्षेत्र के सभी दुकानों की है।
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वहीं इसका विरोध करने वाले किसानों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। इसकी जानकारी के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाए शिकायत न मिलने की बात कह रहे हैं। इस संबंध में एडीएम योगानंद पांडे बताते हैं कि सोमवार को दुकानों पर छापा मारा जाएगा। यदि कहीं ओवर रेटिंग की शिकायत मिली तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।