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गजानन के दरबार में हाजिरी को उमड़े भक्त
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भिनगा में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते बच्चे।
- फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। जिले में चल रहे गणेश पूजन महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। पूजन पंडालों में आरती और कार्यक्रमों के समय काफी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। श्री बाल गणेश पूजा समिति की ओर से भिनगा नगर चल रहे गणेश पूजा महोत्सव में शनिवार रात बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। वहीं कटरा में गणेश पूजा महोत्सव में कथा व्यास ने कार्तिकेय जन्म की कथा का बखान किया।
भिनगा के व्यास भवन व शंकरी सिंह चौराहा में आयोजित पूजा महोत्सव में शनिवार रात सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसे देखने के लिए भक्तों की भारी भीड़ एकत्र हुई।
वहीं इकौना, गिलौला, सिरसिया व लक्ष्मननगर में आयोजित पूजन पंडालों में भी कलाकारों की ओर से श्रीगणेश जी की लीलाओं का सजीव चित्रण किया गया। स मौके पर श्रद्धालुओं की ओर से लगाए जा रहे गणपति बप्पा मोरया के गगन भेदी नारों से समूचा नगर भक्ति मय बना रहा।
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वहीं कटरा स्थित महावीर स्थान पर गणेश पूजा महोत्सव में पंडित ओम प्रकाश मिश्र ने कार्तिकेय जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि एक समय तारक नामक असुर ने अपने घोर तप के प्रभाव से ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर लिया था। उसने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा कि उसकी मृत्यु न बज्र से हो, न विष्णु के सारंग से और न धनुषबाण से। ऐसा वरदान पाकर तारक असुर पूरी तरह से अत्याचारी बन गया था। उ
सके अत्याचार से देवताओं में भी खलबली मच गई थी। इससे व्यथित देवताओं ने नारद जी से तारक के वध का उपाय पूछा। इस पर नारद जी ने कहा कि जब तक देवाधिदेव महादेव का विवाह नहीं होगा तब तक तारक का वध संभव नहीं।
नारद जी ने कहा कि जब भोलेनाथ का विवाह माता पार्वती से होगा तब उनसे कार्तिकेय नामक पुत्र का जन्म होगा। वहीं तारक का वध करेगा। भोलेनाथ के विवाह के बाद माता पार्वती ने कार्तिकेय को जन्म दिया जिनके छह सिर थे। जिन्होंने बड़े होकर तारक का वध किया। इस मौके पर काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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भिनगा के व्यास भवन व शंकरी सिंह चौराहा में आयोजित पूजा महोत्सव में शनिवार रात सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसे देखने के लिए भक्तों की भारी भीड़ एकत्र हुई।
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वहीं इकौना, गिलौला, सिरसिया व लक्ष्मननगर में आयोजित पूजन पंडालों में भी कलाकारों की ओर से श्रीगणेश जी की लीलाओं का सजीव चित्रण किया गया। स मौके पर श्रद्धालुओं की ओर से लगाए जा रहे गणपति बप्पा मोरया के गगन भेदी नारों से समूचा नगर भक्ति मय बना रहा।
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वहीं कटरा स्थित महावीर स्थान पर गणेश पूजा महोत्सव में पंडित ओम प्रकाश मिश्र ने कार्तिकेय जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि एक समय तारक नामक असुर ने अपने घोर तप के प्रभाव से ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर लिया था। उसने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा कि उसकी मृत्यु न बज्र से हो, न विष्णु के सारंग से और न धनुषबाण से। ऐसा वरदान पाकर तारक असुर पूरी तरह से अत्याचारी बन गया था। उ
सके अत्याचार से देवताओं में भी खलबली मच गई थी। इससे व्यथित देवताओं ने नारद जी से तारक के वध का उपाय पूछा। इस पर नारद जी ने कहा कि जब तक देवाधिदेव महादेव का विवाह नहीं होगा तब तक तारक का वध संभव नहीं।
नारद जी ने कहा कि जब भोलेनाथ का विवाह माता पार्वती से होगा तब उनसे कार्तिकेय नामक पुत्र का जन्म होगा। वहीं तारक का वध करेगा। भोलेनाथ के विवाह के बाद माता पार्वती ने कार्तिकेय को जन्म दिया जिनके छह सिर थे। जिन्होंने बड़े होकर तारक का वध किया। इस मौके पर काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।