{"_id":"6918d493419cdb7ea2004da5","slug":"craving-is-the-root-cause-of-all-suffering-in-the-world-shraddhalok-shravasti-news-c-104-1-slko1011-115689-2025-11-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"संसार में तृष्णा ही सभी दुखों का मूल कारण : श्रद्धालोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संसार में तृष्णा ही सभी दुखों का मूल कारण : श्रद्धालोक
Sun, 16 Nov 2025 12:59 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Sun, 16 Nov 2025 12:59 AM IST
विज्ञापन
जेतवन परिसर की परिक्रमा करते अनुयायी।- संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शनिवार को महाराष्ट्र से आए अनुयायियों के 60 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु श्रद्धालोक महाथेरो के नेतृत्व में जेतवन परिसर की परिक्रमा की और पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना भी की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा में मौजूद अनुयायियों को संबोधित करते हुए भिक्षु श्रद्धालोक महाथेरो ने कहा कि महात्मा बुद्ध ने बताया है कि संसार में तृष्णा ही सभी दुखों का मूल कारण है। तृष्णा के कारण ही मनुष्य संसार की विभिन्न वस्तुओं की ओर आकर्षित होता है और जब वे वस्तुएं प्राप्त होने के बाद नष्ट हो जाती हैं, तब मनुष्य को दुख होता है।
उन्होंने आगे कहा कि तृष्णा के साथ मृत्यु प्राप्त करने वाला प्राणी फिर जन्म लेता है और संसार के दुख चक्र में पिसता रहता है। तृष्णा को त्याग देने का मार्ग ही मुक्ति का मार्ग है। भगवान बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग वह माध्यम है, जो दुख के निदान का मार्ग बताता है। सभा के बाद सभी अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
बौद्ध सभा में मौजूद अनुयायियों को संबोधित करते हुए भिक्षु श्रद्धालोक महाथेरो ने कहा कि महात्मा बुद्ध ने बताया है कि संसार में तृष्णा ही सभी दुखों का मूल कारण है। तृष्णा के कारण ही मनुष्य संसार की विभिन्न वस्तुओं की ओर आकर्षित होता है और जब वे वस्तुएं प्राप्त होने के बाद नष्ट हो जाती हैं, तब मनुष्य को दुख होता है।
विज्ञापन
उन्होंने आगे कहा कि तृष्णा के साथ मृत्यु प्राप्त करने वाला प्राणी फिर जन्म लेता है और संसार के दुख चक्र में पिसता रहता है। तृष्णा को त्याग देने का मार्ग ही मुक्ति का मार्ग है। भगवान बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग वह माध्यम है, जो दुख के निदान का मार्ग बताता है। सभा के बाद सभी अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण किया।
विज्ञापन